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रंगपंचमी 2018: जानें क्यों मनाते हैं ये पर्व, इस विधि से करें पूजा और पाएं देवताओं का आशीर्वाद

By गुलनीत कौर | Updated: March 6, 2018 09:06 IST

Rang Panchami 2018: चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन 'रंगपंचमी' का पर्व मनाया जाता है। इस दिन आखिरी बार होली खेली जाती है।

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हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रति वर्ष रंग वाली होली से ठीक पांचवें दिन यानी चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन 'रंगपंचमी' का पर्व मनाया जाता है। इस दिन आखिरी बार होली खेली जाती है और इसके बाद होली खेलने की मनाही होती है। इस साल रंगपंचमी का पर्व 6 मार्च को मनाया जाएगा। इसदिन विशेष पूजन के साथ कुछ शास्त्रीय उपाय भी किए जाते हैं। आइए जानते हैं क्या है रंग पंचमी का पर्व, क्यों मनाये इसे और साथ ही पाएं सरल पूजन विधि।

क्यों मनाते हैं रंगपंचमी?

यूं तो रंग वाली होली से कुछ दिन पहले ही छोटे-छोटे त्योहार आरम्भ हो जाते हैं लेकिन अमूमन क्षेत्रों में रंग वाली होली ही आखिरी त्योहार होता है। किन्तु प्राचीन समय से लेकर आज भी भारत के कुछ क्षेत्रों में होली के बाद कुछ विशेष पर्व मनाये जाते हैं जिनमें से एक है रंगपंचमी का पर्व। यह पर्व रंगों से होली खेलने से लेकर पूजन करने का ही दिन है। मान्यता है कि विशेष पूजन से देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

इसके अलावा यह मान्यता है कि इसदिन जिन रंगों से होली खेली जाती है, उन्हें हवा में उड़ाने पर देवता आकर्षित होते हैं। इसदिन ब्रह्माण्ड में विशेष तरंगों का वास होता है जो रंगों के साथ मिलकर देवताओं के स्पर्श की अनुभूति कराते हैं। रंगों के माध्यम से देवता हमें आशीर्वाद देते हैं।

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कहां मनाई जाती हैं रंगपंचमी'

भारत में विशेस रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में रंगपंचमी पर्व मनाने का अधिक चलन है। इन राज्यों में रंगारंग जुलूस भी निकाले जाते हैं। लोग रंगों से होली खेलते हैं, नाचते गाते हुए गलियों से निकलते हुए हवा में रंग गुलाल उड़ाते हैं। एक अन्य मान्यता के अनुसार यह दिन पापी शक्तियों पर रंगों भरी सकारात्मक शक्तियों के माध्यम से विजय प्राप्ति का भी है। 

रंगपंचमी पूजन विधि

रंगपंचमी के दिन विशेषकर भगवान शिव समेत उनके परिवार का पूजन किया जाता है। यदि आप इसदिन पूजा करने जा रहे हैं तो भगवान शिव की परिवार सहित मूर्ति या फिर एक ऐसी तस्वीर ले आएं जिसमें वे अपने परिवार के साथ हों। इस तस्वीर को घर की पूर्व दिशा में लाल वस्त्र पर स्थापित करें। 

सबसे पहले तेल के दीपक को तस्वीर के समक्ष रखें। अब गुग्गुल धूप करें, लाल फूल चढ़ाएं, सिंदूर व लाल चंदन चढ़ाएं। इसके बाद अबीर व गुलाल भी अपिर्त करें। प्रसाद स्वरूप गुड़ से बनी रेवड़ियों का भोग लगाएं। पूजन करते समय इस मंत्र का जाप करें - ह्रीं हरित्याय नमः शिवाय ह्रीं ॥

रंगपंचमी पर करें ये उपाय

- यदि मन में कोई इच्छा हो तो दूध में शहद मिलाकर इसदिन शिवलिंग अभिषेक करें- समाज में पड़ प्रतिष्ठा के लिए नारियल पर सिन्दूर लगाकर भगवान शिव को अर्पित करें- रोगों से मुक्ति हेतु मसूर भरा तांबे का कलश शिवजी को चढ़ाएं

 

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