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रामायण: जब श्री राम ने तोड़ा था शिव धनुष, आग बबूला हो गए थे परशुराम- फिर हुआ कुछ ऐसा...

By मेघना वर्मा | Updated: April 24, 2020 10:46 IST

रामायण से जुड़े कई प्रसंग ऐसे हैं जिन्हें लोगों को सुनना पसंद है। उन्हीं में से एक प्रसंग मिलता है श्रीराम और परशुराम का।

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ठळक मुद्देजिस समय भगवान श्रीराम धनुष के पास पहुंचे उन्होंने धनुष को प्रणाम किया। रामायण के अनुसार जनक की सभी में सीता स्वंयवर के लिए सभी उपस्थित थे।

श्रीराम की कहानी और उनकी महानता आपको रामायण में पढ़ने को मिलेगी। कोरोना में लॉकडाउन के चलते सरकार ने लोगों के मनोरंजन के लिए दूरदर्शन पर रामानंद सागर वाली रामायण शुरू कर दी है। जिसमें इस समय उत्तर रामायण कांड चल रहा है।  

वहीं रामायण से जुड़े कई प्रसंग ऐसे हैं जिन्हें लोगों को सुनना पसंद है। उन्हीं में से एक प्रसंग मिलता है श्रीराम और परशुराम का। परशुराम को भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है। मगर जब श्रीराम ने सीता स्वयंवर में शिव धनुष तोड़ा था तब परशुराम आग बबूला हो गए थे। वहीं हर साल परशुराम की जयंती मनाई जाती है। इस साल परशुराम जयंती 26 अप्रैल को पड़ने वाली है। आइए आपको बताते हैं क्या है कथा-

जब नहीं टूटा था धनुष पिनाक

रामायण के अनुसार जनक की सभी में सीता स्वंयवर के लिए सभी उपस्थित थे। सभी राजाओं ने धनुष को तोड़ने का प्रयास किया मगर कोई तोड़ नहीं पाया। तोड़ना दूर कोई उस धनुष को हिला तक नहीं पाया। ये देखकर राजा जनक बड़े दुखी हुए। इसके बाद भगवान राम ने धनुष भंग कर दिया। पूरा दरबार पहले आश्चर्य से भर उठा। उसके बाद सभी के मुख पर प्रसन्नता छा गई।

आग बबूला हुए परशुराम

जिस समय भगवान श्रीराम धनुष के पास पहुंचे उन्होंने धनुष को प्रणाम किया। इसके बाद भगवान शिव का नाम लिया। फिर धनुष तोड़ दिया। धनुष की गर्जना सुनकर भगवान परशुराम आ गए। जब उन्होंने धनुष को टूटा हुआ देखा तो अत्यधिक क्रोधित हुए। तभी परशुराम और लक्ष्मण के बीच रोचक संवाद से सभी घबरा गए। लक्ष्मण और परशुराम का तीखा संवाद हुआ। 

श्रीराम ने ऐसे किया गुस्से को शांत

जब चारों ओर लक्ष्मण और परशुराम के संवाद की चर्चा होने लगी तो पूरा दरबार हैरान रह गया। दोनों महारथियों की तीखी बातें ही सभी का आश्चर्य जनक लगने लगीं। तब परशुराम के गुस्से को शांत करने और भाई के वाकयुद्ध को खत्म करने भगवान राम आए श्रीराम अपने छोटे भाई को समझाते हैं और परशुराम और लक्ष्मण में वाकयुद्ध खत्म होता है। इसके बाद श्रीराम, माता सीता को वरमाला पहनाते हैं। पूरा पंडाल जयकारों से गूंज जाता है। 

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