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गंगा में केवल स्नान करने से नहीं मिलती सभी पापों से मुक्ति! क्या है कारण, कहीं आप भी तो नहीं करते ये गलती

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 6, 2020 10:11 IST

Magh Mela 2020 Significance & Importance in Hindi: गंगा नदीं में स्नान को लेकर ऐसी मान्यता है कि इससे सभी पाप दूर हो जाते हैं। हर रोज हजारों लोग इस पवित्र नदी में स्नान करते हैं, तो क्या सभी के कष्ट दूर होते हैं।

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ठळक मुद्देहिंदू धर्म में गंगा नदी की है काफी मान्यता, गंगा को सबसे पवित्र नदी कहा गया हैमान्यताओं के अनुसार गंगा नदी में डुबकी लगाने से दूर होते हैं सभी कष्ट और पाप

हिंदू धर्म में गंगा स्नान का बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि गंगा में डुबकी लगाने से सभी के पाप दूर हो जाते हैं और दुखों से भी मुक्ति मिलती है। यही कारण भी है कि हर रोज और खासकर शुभ दिनों में भक्त गंगा में डुबकी लगाने के लिए कई जगहों पर भारी संख्या में जुटते हैं। वैसे, सभी को गंगा स्नान के बावजूद दुखों से मुक्ति नहीं मिलती है। इसे लेकर भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी एक कथा भी काफी प्रचलित है।

गंगा में केवल डुबकी से क्यों नहीं मिलती दुखों और पाप से मुक्ति

कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक बार भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी का भ्रमण कर रहे थे। उन्होंने देखा कि हजारों लोग गंगा में स्नान कर रहे हैं। सभी हर-हर गंगे का जाप करते हुए गंगा में डुबकी मारे जा रहे थे। यह देख माता पार्वती हैरान हुईं और शिवजी से पूछा कि इतने लोग गंगा में स्नान कर रहे हैं फिर इन सभी के दुख दूर क्यों नहीं होते, पाप नष्ट क्यों नहीं होते। माता पार्वती ने साथ ही पूछा कि क्या गंगा में अब वह सामर्थ्य नहीं कि वह पापों को नष्ट कर सकें।

इस पर शिवजी ने जवाब दिया कि अब भी गंगा में वही सामर्थ्य है लेकिन इन लोगों ने जब गंगा में स्नान ही नहीं किया तो इन्हें लाभ कैसे मिल सकता है। इस पर पार्वती ने कहा कि अभी तो इतने लोगों ने डुबकी लगाई है और हम दोनों ने देखा भी है। इनके शरीर भी भीगे हुए हैं। ऐसा सुन शिवजी ने कहा कि इन लोगों ने केवल जल में डुबकी लगाई है, गंगा में स्नान नहीं किया है और इसका रहस्य मैं आपको कल समझाता हूं।

शिवजी ने माता पार्वती को बताया गंगा स्नान का रहस्य

अगले दिन खूब बारिश हुई और गंगा नदी की ओर जाने वाले रास्ते में एक बड़ा गड्ढ़ा बन गया और उसमे गंदा पानी भी भर गया था। शिवजी ने एक वृद्ध का रूप धारण किया और माता पार्वती भी एक आम स्त्री के रूप में वहां प्रकट हुईं। शिवजी ने इसके बाद माता पार्वती को समझाया कि वे इस गड्ढ़े में उतर कर फंसने का नाटक करेंगे जबकि माता पार्वती को गंगा स्नान कर लौट रहे लोगों ने मदद मांगनी है। 

शिवजी ने साथ ही माता पार्वती को ये भी कहा कि मदद मांगने के दौरान वे लोगों से ये भी कहें कि जो निष्पाप हो वही गड्ढ़े में उतरे। पाप करने वाला व्यक्ति अगर गड्ढ़े में उतरता है तो वह भी भस्म हो जाएगा। बहरहाल, लोग आते रहे और मदद के लिए आगे भी बढ़ते लेकिन माता पार्वती की ओर से शर्त दोहरती वह डर से पीछे हट जाता। 

श्रद्धा से गंगा में डुबकी लगाने से मिलता है लाभ

इस दौरान एक युवक भी वहां से गुजरा। वह भी जब वृद्ध की मदद के लिए आगे बढ़ा तो आम स्त्री के रूप में मौजूद माता पार्वती ने भस्म होने वाली बात दोहराई। इस पर युवक ने पूछा कि उन्हें उसके निष्पाप होने पर संदेह क्यो है। युवक ने कहा कि उसने अभी-अभी पूरी श्रद्धा के साथ गंगा स्नान किया है और इसलिए उसके सभी पाप धुल गये है। ऐसा कहकर वह गड्ढ़े में उतर गया और वृद्ध रूप में फंसे भगवान शिव को वहां से निकाल लिया। 

यह देख शिवजी और माता पार्वती काफी प्रसन्न हुए और उस युवक को अपने वास्तविक रूप में दर्शन दिए। माता पार्वती भी समझ गईं कि गंगा में स्नान करने का लाभ तभी मिलता है जब लोग आस्था और पूरे विश्वास के साथ इस पवित्र नदी में डुबकी लगाएं। यही कारण भी है कि आस्था और विश्वास के साथ स्नान नहीं करने से बाकी के लोगों के पाप नहीं धुलते और जीवन में दुख बने रहते हैं।

टॅग्स :भगवान शिवमाघ मेला
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