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मृत्यु के बाद इतने दिनों में यमलोक पहुंचती है आत्मा, कुछ ऐसा होता है यमलोक का मार्ग

By मेघना वर्मा | Updated: May 11, 2020 09:01 IST

मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा यमलोक की ओर चली जाती है। हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा के सफर पर कई तरह के विचार रखे गए हैं। 

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ठळक मुद्देगरुण पुराण में इस बात का जिक्र मिलता है कि यममार्ग में 16 पुरियां यानी नगर हैं। हिन्दू धर्म में इस बात की मान्यता है कि मरने के बाद इंसान की आत्मा को यमलोक जाना पड़ता है।

जीवन और मृत्यु सच्चाई है। जीवन का अंतिम सच मृत्यु ही है। एक दिन सभी को शरीर त्यागना है। वहीं हमारी आत्मा अमर है। ये एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर को धारण करती है। मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा यमलोक की ओर चली जाती है। हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा के सफर पर कई तरह के विचार रखे गए हैं। 

हिन्दू धर्म में इस बात की मान्यता है कि मरने के बाद इंसान की आत्मा को यमलोक जाना पड़ता है। जहां उसके जीवन भर के कर्मों का लेखा-जोखा रखा जाता है। मान्यता ये भी है कि इसी के बाद ये तय किया जाता है कि उसे स्वर्ग में जगह दी जाएगी या नर्क में। यमलोक नगरी तक आत्मा कैसे पहुंचती है और कैसा होता है ये सफर आइए आपको बताते हैं इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें।

सफर चलता है एक साल

इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिलता मगर लोक मान्यताओं में बताया जाता है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति की आत्मा प्रेत के रूप में 2 सौ योजन यानी 1600 किलोमीटर चलती है। एक योजन 8 किलोमीटर का होता है। ऐसे ही एक वर्ष का सफर तय करने के बाद वो यमराज नगह में पहुंचती है। यमलोक का मार्ग 86 हजार योजन का है।

ऐसा है यमलोक का मार्ग

गरुण पुराण में इस बात का जिक्र मिलता है कि यममार्ग में 16 पुरियां यानी नगर हैं। ये सभी नगर बड़े भयानक हैं। इस मार्ग में व्यक्ति की आत्मा को महीने में एक बार ठहरने का अवसर मिलता है। यहां आत्मा अपने पूर्वजन्मों के कर्मों और परिवार के लोगों को याद करके दुखी होता है। 

 

यमलोक के द्वारपाल

बताया जाता है कि यमराज के भवन पर धर्मध्वज नाम का द्वारपाल पहरा देता है। यहीं चित्रगुप्त को पापी लोगों की आत्माओं के आने की सूचना देते हैं। यमलोक के द्वार पर दो भयानक कुत्ते भी पहरा देते हैं जो पापियों को झपटना चाहते हैं।

होता है कर्मों का हिसाब

यमराज के दरबार में ब्रह्माजी के पुत्र श्रवण और पत्नी श्रवणी निवास करते हैं। श्रवण पुरुषों के पाप-पुण्य का और श्रवणी महिलाओं के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखते हैं। इनके कहे अनुसार यमराज उन्हें फल देते हैं। 

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