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Kashi Vishwanath Temple: सावन में कैसे पहुंचे काशी विश्वनाथ, मंदिर दर्शन और पूजा-आरती का समय

By सतीश कुमार सिंह | Updated: July 21, 2024 05:11 IST

Kashi Vishwanath Temple how to reach: सावन माह 22 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और यह 19 अगस्त 2024 को समाप्त होगा।

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ठळक मुद्देKashi Vishwanath Temple how to reach: सावन में 5 सोमवार (somvar) पड़ रहा है। Kashi Vishwanath Temple how to reach: काशी विश्वनाथ मंदिर कितने बजे से कितने बजे तक खुला रहता है?Kashi Vishwanath Temple how to reach: काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कैसे करें?Kashi Vishwanath Temple how to reach: काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने में कितना टाइम लगता है?

Kashi Vishwanath Temple how to reach: श्रावण मास (sawan mash) सबसे पवित्र महीना माना जाता है। सावन में हिंदू धर्म के लोग मां पार्वती (ma Parvati) और भगवान भोलेनाथ (Lord Bholenath) की पूजा करते हैं। इस बार सावन में 5 सोमवार (somvar) पड़ रहा है। भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। सावन माह 22 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और यह 19 अगस्त 2024 को समाप्त होगा। इस पवित्र महीने में भक्त भक्ति और समर्पण के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं। कुछ नियम और कानून हैं, जिनका पालन भगवान शिव के भक्तों को सावन के महीने में करना होता है।

सोमवार का बहुत ही महत्व होता है। शुरुआत सोमवार से हो रही है। उत्तर प्रदेश के बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) है। गंगा नदी (ganga river) यहां से बहती है। भगवान शिव (bhagwan shiv) के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों (shiv jyotirling) में से एक हैं। काशी (how to reach kashi) को आध्यात्मिक राजधानी भी कहा जाता है।

इसे शिव की नगरी (City of Lord Shiva) भी कहा जाता है। आपको बता दें कि काशी को बनारस (banaras) और वाराणसी (varanasi) नाम से पुकारा जाता है। यहां पर हर साल करोड़ों लोग दर्शन करते हैं। आपको बता दें कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (pm narendra modi) यहां से तीन बार सांसद हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन में एक माह भगवान शिव यहां विराजमान रहते हैं।

Kashi Vishwanath Temple how to reach: यहां जानें कैसे करें दर्शन, बाबा काशी विश्‍वनाथ की नगरी में मंदिर खुलने और पूजा-आरती का समय, कैसे पहुंचे-

काशी विश्वनाथ मंदिर का महात्म्य (Kashi Vishwanath Temple Importance)

काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक। कहा जाता है कि बनारस भगवान शिव की त्रिशूल पर विराजमान है। ऐसे तो सालों भर यहां लोग आते हैं, लेकिन सावन आते ही भगवान शिव के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। हिंदू धर्म में काशी का काफी महत्व है। यह तीनों लोकों में न्यारी है। इस मंदिर का निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्ला बाई होल्कर ने करवाया। पुराणों में कहा गया है कि भगवान शिवशंकर और माता पार्वती का यह स्थान प्रिय है। काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव का प्रसिद्ध और सातवां ज्योतिर्लिंग हैं। धर्म और आस्था का प्रमुख केंद्र है। 

काशी विश्वनाथ मंदिर खुलने का समय (kashi vishwanath temple timing)

बनारस में भगवान शिव खुद निवास करते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में पांच बार आरती होती है। मंदिर रोजाना सुबह (भोर) 2.30 बजे सुबह खोला जाता है और रात 11 बजे बंद कर दिया जाता है। हर समय घंटे की आवाज आपको सुनाई देती है। काशी कुछ अलग ही है। मंदिर के साथ ही यहां पर सैकड़ों घाट भी हैं।

मंगला आरती के साथ पूरे दिन भर में चार बार आरती होने की परंपरा हैं। भक्तों के लिए सुबह 4 बजे खोला जाता है। आरती के बाद लोग दोपहर 12 से 7 बजे तक पूजा कर सकते हैं। शाम को सात बजे सप्त ऋषि आरती का आयोजन होता है। फिर रात 9 बजे तक भक्त दर्शन कर सकते हैं। रात 10.30 में शयन आरती का आयोजन किया जाता है और राज 11 बजे मंदिर को बंद किया जाता है।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराके मंदिर में दर्शन-पूजन

भक्त गण अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराके मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए समय ले सकते हैं। श्रद्धालु दर्शन का समय अपनी मर्जी और सुविधानुसार चुन सकते हैं। श्रद्धालुओं को mahadevdarshan.org वेब पेज पर जाकर अपना विवरण भरना होगा। तिथि और समय का विकल्प क्लिक करने के बाद अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल और दर्शन करने वालों की संख्या का विवरण भर कर स्लिप का प्रिंट ले लें, क्योंकि मंदिर परिसर में मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं है।

काशी विश्वनाथ मंदिरः कहां ठहरें

बनारस में महत्यपूर्ण पर्यटन स्थल है। यहां पर आपको सस्ते और महंगे होटल और लॉज मिल जाएंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर के आस-पास में कई होटल और लॉज हैं, जो किफायती दाम में उपलब्ध हैं। 

काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन का मार्ग कैसे जा सकते हैं...

बनारस की यात्रा देश के बड़े शहरों से कर सकते हैं। फ्लाइट, ट्रेन और बस आसानी से उपलब्ध है। आपको बता दें लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा दिल्ली और मुंबई से जुड़ा हुआ है। यहां पर कई रेलवे स्टेशन हैं। लेकिन वाराणसी और मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन प्रमुख हैं। आप या तो हवाई यात्रा करके वाराणसी पहुंच सकते हैं या फिर रेल और सड़क के जरिए पवित्र काशी नगरी जा सकते हैं।

वायु मार्ग

बनारस के लिए हर दिन हवाई सेवा है। आप दिल्ली, मुंबई, आगरा, खुजराहो, कोलकाता, लखनऊ, गया, पटना आदि शहरों से यहां पहुंच सकते हैं। बनारस सिटी से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट यहां का नजदीकी एयरपोर्ट है। हवाई सेवाएँ टर्मिनल मैनेजर बाबतपुर एयरपोर्ट : 0542-2623060 एयरपोर्ट डायरेक्टर : 0542-2622155

रेल मार्ग

बनारस देश का प्रमुख जंक्शन है। उत्तर भारत का एक बड़ा रेलवे जंक्शन है। यहां पर देश के किसी भी जगह से पहुंच सकते हैं। यहां कई प्रमुख स्टेशन है। वाराणसी और मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन प्रमुख हैं। नई दिल्ली, मुंबई, सूरत, कोलकाता, पटना, इलाहाबाद,चेन्नई, हैदराबाद, मेरठ, लखनऊ, देहरादून, गुवाहाटी, पुणे से सीधी रेल सेवा से जुड़ा है। 

बनारस से 18 किमी की दूरी पर मुगलसराय रेलवे स्टेशन है जहां से पश्चिम से पूर्व की ओर जाने वाली कई ट्रेनें गुजरती हैं। आप चाहे तो मुगलसराय भी उतरकर बस या ऑटो के जरिए वाराणसी पहुंच सकते हैं।

 

सड़क मार्ग

बनारस कई राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है। यहां पर एनएच 2, एनएच 7, एनएच 28 सहित कई मार्ग हैं। पूरे देश में सभी प्रमुख सड़कों से जुड़ा हुआ है। कई राज्य से बस सेवा सर्विस हैं। आप बस से यहां पर पहुंच सकते हैं। इलाहाबाग, लखनऊ, गया, कोलकाता, सासाराम, नई दिल्ली सहित कई शहर से बस सुविधा हैं। 

राज्‍य की और कई प्राइवेट बसें वाराणसी के लिए देश के टियर 1 और टियर 2 शहरों से उपलब्‍ध हैं। काशी विश्‍वनाथ मंदिर पहुंचने के लिए आपको टैक्‍सी या ऑटोरिक्‍शा लेकर लहोरी टोला पहुंचना होगा।

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