पूरे देश में आज दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में उजाले और दीपों के इस त्योहार का सबसे ज्यादा महत्व बताया जाता है। दिवाली पर ना सिर्फ लोग अपने घर को अच्छी तरह सजाते हैं बल्कि पहले से ही घर की सफाई में जुट जाते हैं। मान्यता है कि साफ-सुथरे घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है।
आज देर शाम लोग लक्ष्मी की पूजा करने के बाद अपने घर के हर कोनों में दीयों को जलाते हैं। जो उजाले का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम लंकापति का वध करके वापिस अयोध्या लौठे थे। उसी खुशी में लोगों ने अपन घर को दीयों से सजाया था। तभी से दीये जलाने की ये परंपरा चली आ रही है।
सिर्फ यही नहीं दिवाली के दिन लोग लक्ष्मी पूजा के साथ कई उपाय भी करते हैं। कुछ लोग दिवाली पर दान-दक्षिणा भी देते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इस साल बाद पूरे 37 साल बाद महासंयोग बन रहा है
37 साल बाद बन रहा है महासंयोग
ज्योतिशाचर्या की मानें तो कार्तिक के महीने में इस बार दिवाली पर 37 साल बाद महासंयोग बन रहा है। दिवाली के दिन सूर्यदेव का दिन, चित्रा नक्षत्र और अमावस्या का लभगव 37 साल बाद संयोग हो रहा है। दिवाली की रात साल की सबसे काली रात होगी। इस दिन पूजा करने और लक्ष्मी मां की सेवा करने से आपको लाभ होगा।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल: शाम 05:28 बजे से 08:10 बजे तकपूजा के लिए उत्तम समय (वृश्चिक लग्न): 07:30 बजे से 07:35 बजेउत्तम लाभ के लिए चौघड़िया पूजा समय : 08:36 बजे से 10:52 बजे तकसुबह 10:30 बजे से लेकर दोपहर 1:30 बजे तक लाभ अमृत का मुहूर्त