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Kanya Pujan 2020: लॉकडाउन के बीच इन तरीकों से कर सकते हैं कन्या पूजन-पढ़ें पूजा विधि

By मेघना वर्मा | Updated: March 31, 2020 11:41 IST

अगर आप भी चिंतित हैं कि इस लॉकडाउन में आप कैसे कन्याओं का पूजन करें तो यहां हम आपको पूजन विधि बताने जा रहे हैं।

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ठळक मुद्देदेवी दुर्गा की पूजन के बाद दुर्गाष्टमी या नवमी पर छोटी कन्याओं का पूजन किया जाता है।लॉकडाउन के नियमों को फॉलो करके भी आप कन्या पूजन कर सकते हैं। 

नवरात्रि के नौ दिनों के बाद कन्या पूजन का विधान होता है। जो जातक नवरात्रि का व्रत रखते हैं वो अष्टमी या नवमी वाले दिन कन्याओं का पूजन कर उनसे आशीर्वाद  लेते हैं। इस साल चैत्र नवरात्रि 24 मार्च से शुरू ह गई है। मां दुर्गा को समर्पित इस नवरात्र में लोग देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। 

देवी दुर्गा की पूजन के बाद दुर्गाष्टमी या नवमी पर छोटी कन्याओं का पूजन किया जाता है और उन्हें भोग लगाया जाता है इस साल देश की स्थिति और लॉकडाउन को देखते हुए कन्याओं को घर पर बुलाने में बहुत अधिक मुसीबत हो सकती है। ऐसे में लॉकडाउन के नियमों को फॉलो करके भी आप कन्या पूजन कर सकते हैं। 

अगर आप भी चिंतित हैं कि इस लॉकडाउन में आप कैसे कन्याओं का पूजन करें तो यहां हम आपको पूजन विधि बताने जा रहे हैं। जिन्हें अपनाकर आप कन्यापूजन या दुर्गा अष्टमी की पूजा कर सकते हैं-

इस नवरात्रि में घर पर बाहर से किसी भी कन्या को आमंत्रित नहीं कर सकते तो आप अपने घर की छोटी बेटियों, भतीजियों या भांजियों को भोजन करवा कर उनकी पूजा कर सकती हैं। 

अगर घर में कोई भी छोटी कन्या नहीं है तो आप घर में स्थित मंदिर में माता का पूजन करें और उन्हें विभिन्न तरह की सामग्री भेंट करें। 

अब जो सामान आपने माता को प्रसाद के रूप में चढ़ाया है उसे गाय को भेंट करें। इसके बाद ही आप और घर के अन्य सदस्य भोजन ग्रहण करें। 

आप देवी माता को सुहाग की सामग्री चढ़ा सकती हैं। फिर लॉकडाउन खत्म होने के बाद आप उसे सुहागिन महिलाओं को जरूर बांटे। 

ऐसे करें अष्टमी की पूजा

1. सबसे पहले श्री गणेश और देवी दुर्गा की प्रतिमा का आवाहन करें।2. देवी-देवता की मूर्तियों को स्नान कराएं। दूध, दही, घी, और शकर मिलाकर पंचामृत बनाएं।3. इससे भी आप भगवान को नहला सकती हैं। 

4. अब मूर्तियों को वस्त्र और जनेऊ अर्पित करें।5. धूप, दीप औरकपूर जलाकर परिक्रमा करें। भोग लगाएं, पान चढ़ाएं।6. माता को लाल चुनरी अर्पित करें। अब दुर्गा मंत्र या चालिसा का पाठ करें। अंत में भक्तों को प्रसाद वितरित करें।

टॅग्स :चैत्र नवरात्रिनवरात्रिनवरात्री महत्वमां दुर्गापूजा पाठ
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