chetna sinha founder mann deshi bank one-of-its-kind bank is empowering women in Indian villages | #KuchhPositiveKarteHain: अनपढ़ और बेरोजगार महिलाओं के लिए माण देशी बैंक ने खोली नई राह, 2 लाख महिलाओं का सपना हुआ साकार
#KuchhPositiveKarteHain: अनपढ़ और बेरोजगार महिलाओं के लिए माण देशी बैंक ने खोली नई राह, 2 लाख महिलाओं का सपना हुआ साकार

नई दिल्ली, 13 अगस्त: महाराष्ट्र के महसवाड की क्षेत्र की महिलाएं जो किसी समय बेबस, लाचार और रोजगार से मारी होती थी। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के पास रोजगार के कोई साधन नहीं था। गांव की महिलाएं थोड़ी बहुत कमाती थी लेकिन उनकी कमाई कभी पति के शराब में चला जाता तो कभी घर के सदस्यों के इलाज में चला जाता था। ऐसे में महिलाओं का पैसा बचाना तो बहुत दूर की बात थी। लेकिन 'माण देशी' संस्था के आने के बाद न केवल महिलाओं को रोजगार मिला बल्कि उनके पैसों की बचत भी संभव हो सका। यह सब 'माण देशी' संस्था की फाउंडर चेतना गाले सिन्हा की वजह से संभव हुआ। चेतना महिलाओं का महिलाओं द्वारा और महिलाओं के लिए चलाए जाने वाले देश के इकलौते ग्रामीण सहकारी महिला बैंक की संस्थापक हैं। 

शायद आपको याद होगा कि अमिताभ बच्चन द्वारा आयोजित रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति-9' के स्पेशल एपिसोड चेतना सिन्हा भी शामिल हुई थी। इस शो में उन्होंने अभिनेता आयुष्मान खुराना की मदद से 50 लाख रुपए जीतने में कामयाब रहीं थी।  'माण देशी' नाम से चलने वाले इस बैंक को चेतना ने 1997 में शुरू किया था। बता दें कि बैंक की कुल  शाखाएं हैं जो 140 लोगों के माध्यम से 300,000 से अधिक महिलाओं तक सुविधा पहुंचती हैं। ऐसे में इस पॉजिटिव सफर को शुरू करने से पहले जान लेते हैं चेतना को माण देशी बैंक जैसी चीज सुझी। 

माण देशी बैंक की संस्थापक चेतना सिन्हा का जन्म मुंबई में हुआ था लेकिन शादी के बाद उनको अपने पति विजय सिन्हा के साथ मसवाड गांव में आकर रहना पड़ा। बताया जा रहा था कि दोनों खेती-बाड़ी कर गुजर बसर करते थे। इसके बाद जयप्रकाश नारायण के छात्र आंदोलन से प्रभावित होकर दोनों बिहार चले गए। वहां उन्होंने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।  इसके बाद वो दोबारा वापस चले आएं। यहां आने के बाद उन्होंने महिलाओं का जीवन स्तर ऊपर उठाने के लिए काम करने लगी। आगे चलकर उन्होंने देश की प्रथम महिला सहकारी बैंक की आधारशिला रखी।

पहली महिला सहकारी बैंक का आइडिया चेतना सिन्हा के दिमाग में तब आया जब एक ग्रामीण महिला ने बैंक खाता खोलने की सलाह के लिए उनसे संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने अपना बैंक खोला। यह बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया स्वीकृत है। आरबीआई से स्वीकृति के लिए मसवाड की महिलाओं को कठिन परिश्रम करना पड़ा।  बैंक की ज्यादातर मेंबर अनपढ़ थीं। 1995 में मसवाड की 600 महिलाओं ने अंगूठे का निशान लगा बतौर प्रमोटिंग मेंबर बैंक के लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। जिसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। 

इसके बाद बैंक की संस्थापक चेतना गाले सिन्हा के नेतृत्व में एक महिलाओं का एक ग्रुप आरबीआई गया और उनके अधिकारियों को विश्वास दिलाया कि वे भले ही अनपढ़ हैं लेकिन पैसों का हिसाब एक बैंक कर्मचारी की तरह रख सकती हैं। इसी का परिणाम था कि 1997 में माण देसी को बैंक का दर्जा मिल गया।

 यह बैंक अन्य बैंको की अपेक्षा अलग है।  यह बैंक अपने छोटे निवेशकों का पूरा ख्याल रखता है। यहां लो 10 रुपए से 20 रुपए तक भी जमा करा सकते हैं।  इतना ही नहीं छोटे उद्यमियों को यह बैंक 100-200 रुपए का भी ऋण उपलब्ध कराता है। यह ऋण साधारण ब्याज दरों पर उपलब्ध है और ऋण लेने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है।

जैसा कि माण देसी बैंक गरीब महिलाओं पर ज्यादा केंद्रित है। वह लड़कियों के स्कूल जाने के लिए साइकिल खरीदने और दूर-दराज गांवों में महिलाओं को सिलाई-बुनाई सिखाने के लिए लोन देता है। 2012 में बैंक ने महिला उद्यमियों की सहायता के लिए देश का पहला महिला वाणिज्य चैंबर स्थापित किया था।
एक अकाउंट में दस अकाउंट बता दें कि इस बैंक की शाखाएं सतारा, सोलापुर, सांगली, रायगढ़ के साथ कर्नाटक में भी खुल चुका है। 

चेतान सिन्हा का मानना है कि यह सब उन सभी महिलाओं की वजह से संभव हो पाया है जिन्होंने आत्मविश्वास से भरे और आत्मनिर्भता से जुड़े। 

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