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अमित शाह की रैली में कोविड प्रोटोकॉल उल्लंघन पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेलगावी पुलिस कमिश्नर से पूछा- FIR दर्ज क्यों नहीं हुई

By दीप्ती कुमारी | Updated: May 26, 2021 14:38 IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेलगावी पुलिस आयुक्त को गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करने के मामले में तलब किया है। कोर्ट ने पूछा कि कोरोना नियमों का उल्लंघन करने के बावजूद उनपर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

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ठळक मुद्देकर्नाटक हाईकोर्ट नें बेलगावी पुलिस आयुक्त को किया तलब , पूछा कोरोना नियमों के उल्लंघन पर मामला दर्ज क्यों नहीं किया गयाजनवरी में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बेलगावी में की थी रैली रैली में भाजपा नेता ने मास्क नहीं लगाया था और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया

बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को बेलगावी शहर के पुलिस आयुक्त को कोविड प्रोटोकॉल तोड़ने के मामले भाजपा नेताओं पर कार्रवाई नहीं करने को लेकर खिंचाई की। दरअसल इसी जनवरी में शहर में आयोजित एक रैली में कोविड प्रोटोकॉल नियमों का उल्लंघन किया गया था।

17 जनवरी को गृहमंत्री और भाजपा नेता अमित शाह की रैली में  कई लोगों बिना मास्क लगाए और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आए थे। ये रैली लोकसभा उपचुनाव को लेकर आयोजित की गई थी।

मुख्य न्यायधीश अभय श्रीनिवास और न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की खंडपीठ ने कहा कि' पुलिस आयुक्त कर्नाटक महामारी रोग अधिनियम 2020 के प्रावधानों औऱ नियमों की अनदेखी की है ।' कोर्ट ने कहा कि 'शायद आयुक्त कर्नाटक महामाीर रोग अधिनियम 2020 के तहत बनाए गए विनियमन के प्रावधानों से अनजान है । आयुक्त के हलफनामे से पता चलता है कि उल्लंघनकर्ता के खिलाफ एक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई ।' 

हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण और भ्रष्टाचार अपराध नियंत्रण आयोग ट्रस्ट बेलागवी द्वारा दर्ज की गई याचिक पर सुनवाई करते हुए कहा ।  पीठ ने कहा कि आयुक्त ने मामले को बहुत लापरवाही से पेश किया है । बेलगावी में सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का उल्लंघन किया गया और आयुक्त केवल 20,900 जुर्माना वसूल कर संतुष्ट हो गए ।  अदालत ने 3 जून तक कमिश्नर को हलफनामा दाखिल करने को कहा है । 

दरअसल कर्नाटक कोर्ट ने इससे पहले 12 मार्च को प्रथम दृष्टया कहा था कि रैली में मास्क न पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का उल्लंघन किया गया है । अदालत ने तब पुलिस आयुक्त को उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था । 

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