जानिए 'तेजोमहालय' विवाद का इतिहास, नरेंद्र मोदी सरकार संसद में कह चुकी है ताजमहल में मन्दिर का कोई सबूत नहीं

By विशाल कुमार | Published: May 10, 2022 10:55 AM2022-05-10T10:55:59+5:302022-05-10T10:55:59+5:30

ताजमहल को 'तेजोमहालय' मानने की धारणा का संसद में केंद्र सरकार, अदालतों और कई इतिहासकारों द्वारा बार-बार खारिज करने के बाद भी साल दर साल इसको लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।

up agra tajmahal tejo mahalaya narendra modi govt hindu activists | जानिए 'तेजोमहालय' विवाद का इतिहास, नरेंद्र मोदी सरकार संसद में कह चुकी है ताजमहल में मन्दिर का कोई सबूत नहीं

जानिए 'तेजोमहालय' विवाद का इतिहास, नरेंद्र मोदी सरकार संसद में कह चुकी है ताजमहल में मन्दिर का कोई सबूत नहीं

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Highlightsसबसे पहले साल 2015 में सात याचिकाकर्ताओं ने आगरा की अदालत में एक याचिका दाखिल की थी।हिंदू श्रद्धालुओं को ताजमहल में पूजा करने की मंजूरी देने की मांग की गई थी।नवंबर 2015 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने लोकसभा को बताया कि ताजमहल में किसी भी मंदिर का कोई सबूत नहीं है।

नई दिल्ली: पिछले हफ्ते इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर ताजमहल के 20 कमरों को खोलने के लिए भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) को निर्देश देने की मांग की गई ताकि संभावित हिंदू मूर्तियों का पता लगाया जा सके।

हालांकि, नवंबर, 2015 केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार ने लोकसभा को बताया कि ताजमहल में किसी भी मंदिर का कोई सबूत नहीं है।

'तेजोमहालय' की धारणा से कैसे पकड़ा जोर

ताजमहल को 'तेजोमहालय' मानने की धारणा का संसद में केंद्र सरकार, अदालतों और कई इतिहासकारों द्वारा बार-बार खारिज करने के बाद भी साल दर साल इसको लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।

साल 2015 में सात याचिकाकर्ताओं ने आगरा के एक सिविल जज की अदालत में एक याचिका दाखिल कर हिंदू श्रद्धालुओं को ताजमहल में पूजा करने की मंजूरी देने की मांग की गई थी।

याचिका में दावा किया गया था कि दुनिया के सात अजीबों में से एक 16वीं सदी का प्रतिष्ठित मुगल स्मारक मूल रूप से एक शिव मंदिर था जिसे 'तेजोमहालय' कहा जाता था। उन्होंने वहां बंद कमरों को खोलने की भी मांग की। यह मामला फिलहाल लंबित है।

अदालत और सरकार ने धारणा को किया खारिज

2015 के आगरा मामले में जब अदालत ने केंद्र सरकार, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय, गृह सचिव और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी किया, तो एएसआई ने अगस्त 2017 में कहा कि ताजमहल एक मंदिर नहीं बल्कि एक मकबरा था।

नवंबर 2015 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने लोकसभा को बताया कि ताजमहल में किसी भी मंदिर का कोई सबूत नहीं है।

इसके बाद 2017 में खास जानकारी के अभाव में आगरा की अदालत ने ताजमहल के बंद कमरों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराने की मांग को खारिज कर दिया था।

2000 में, सुप्रीम कोर्ट ने पीएन ओक द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया कि ताजमहल एक हिंदू राजा द्वारा बनाया गया था।

इतिहासकार भी कर चुके हैं खारिज

आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार आरसी शर्मा यमुना नदी के तट पर इस जमीन के लिए जयपुर के राजा जय सिंह से शाहजहाँ द्वारा की गई खरीद के बारे में ऐतिहासिक दस्तावेज और संदर्भ हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इतनी विशाल भूमि में कुछ मंदिर हो सकते हैं लेकिन ताजमहल को उस स्थान पर खड़ा करने का सिद्धांत जो पहले एक मंदिर था, जमीन पर नहीं है।उन्होंने कहा कि पीएन ओक की पुस्तक के बाद शिव मंदिर की संभावना के बारे में बहुत चर्चा शुरू हुई लेकिन पर्याप्त संदर्भ और सामग्री है जो इसके खिलाफ जाती है।

हिंदू कार्यकर्ताओं का बढ़ता जा रहा विरोध

मई 2017 में, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सहित दक्षिणपंथी संगठनों ने ताजमहल पर विरोध प्रदर्शन किया। बाद में, उनमें से कुछ ने भगवा पहनकर स्मारक में प्रवेश किया।

अक्टूबर 2017 में एक दर्जन युवकों ने ताजमहल में शिव चालीसा का पाठ किया, लेकिन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों ने उन्हें रोक दिया और बाद में माफी मांगने पर छोड़ दिया। आगरा में शिव सैनिक हर साल श्रावण के पवित्र महीने में एक अनुष्ठान के रूप में यमुना का पानी चढ़ाते हैं।

नवंबर 2018 में, राष्ट्रीय बजरंग दल की महिला विंग की जिला अध्यक्ष मीना दिवाकर ताजमहल परिसर के भीतर मस्जिद में आरती करने में कामयाब रहीं।

जनवरी 2021 में, हिंदू जागरण मंच के चार युवा वाहिनी कार्यकर्ताओं को ताजमहल परिसर में शिव चालीसा का पाठ करने और भगवा झंडे लहराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

4 मई को, अयोध्या के एक महंत को ताजमहल की ओर बढ़ने से रोक दिया गया था, जब उन्होंने स्मारक पर एक धर्म संसद के लिए एक शिव मंदिर होने का दावा किया था।

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