बिहार प्रदेश कांग्रेस में नहीं टल पा रहा है संकट का बादल, विधायक दल का नेता नहीं हो चुका है तय, नाराज गुट ने भी खोला मोर्चा

By एस पी सिन्हा | Updated: February 4, 2026 21:00 IST2026-02-04T21:00:04+5:302026-02-04T21:00:04+5:30

यह स्थिति खुद पार्टी के लिए भी असहज मानी जा रही है, खासकर तब जब विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। पटना में बिहार कांग्रेस की हुई एक अहम बैठक में इसपर निर्णय नहीं लिया जा सका। 

The cloud of crisis continues to hang over the Bihar Pradesh Congress, the leader of the legislative party has not yet been decided, and the disgruntled faction has also launched a protest | बिहार प्रदेश कांग्रेस में नहीं टल पा रहा है संकट का बादल, विधायक दल का नेता नहीं हो चुका है तय, नाराज गुट ने भी खोला मोर्चा

बिहार प्रदेश कांग्रेस में नहीं टल पा रहा है संकट का बादल, विधायक दल का नेता नहीं हो चुका है तय, नाराज गुट ने भी खोला मोर्चा

पटना: बिहार विधानसभा का चुनाव परिणाम आए हुए ढाई महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब तक कांग्रेस विधायक दल का नेता और उपनेता तय नहीं हो पाया है। यह स्थिति खुद पार्टी के लिए भी असहज मानी जा रही है, खासकर तब जब विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। पटना में बिहारकांग्रेस की हुई एक अहम बैठक में इसपर निर्णय नहीं लिया जा सका। 

बैठक का मुख्य एजेंडा विधायक दल के नेता और उपनेता का चयन था। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु रूस के साथ कांग्रेस के सभी 6 विधायक मौजूद थे। बैठक में यह साफ हो गया कि विधायक दल के नेता को लेकर विधायकों के बीच राय एक जैसी नहीं है। 

पार्टी नेतृत्व इस बात से वाकिफ है कि अगर बिना सहमति के नाम घोषित किया गया तो अंदरूनी नाराजगी खुलकर सामने आ सकती है, जो आगे चलकर टूट का कारण भी बन सकती है। सूत्रों के मुतबिक कोशिश यही है कि सभी विधायकों की सहमति से ही नेतृत्व तय हो, ताकि भविष्य में कोई असंतोष न उभरे। पार्टी नेतृत्व फिलहाल हर कदम बेहद संभलकर उठाना चाह रहा है। 

बता दें कि कांग्रेस में टूट की अटकलें लगातार तेज हैं। बीते कुछ दिनों से पटना स्थित कांग्रेस दफ्तर में प्रदेश अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई बैठकों में विधायक नहीं पहुंच रहे थे। इसी बीच एनडी की ओर से दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस के सभी 6 विधायक पाला बदलकर उनके साथ जा सकते हैं। 

उल्लेखनीय है कि बिहार में कांग्रेस के कुल 6 विधायक हैं, मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी), सुरेंद्र प्रसाद (वाल्मीकिनगर), आबिदुर रहमान (अररिया), अभिषेक रंजन (चनपटिया), मो. कमरूल होदा (किशनगंज) और मनोज विश्वास (फारबिसगंज) हैं। अब जबकि बिहार विधानमंडल का बजट सत्र शुरू हो चुका है। 

ऐसे में सियासी गलियारों में यह सवाल उठने लगे हैं, क्या सत्र के दौरान कोई बड़ा राजनीतिक ‘खेला’ हो सकता है? क्या कांग्रेस के विधायक सच में पाला बदलेंगे या पार्टी अंदरूनी सहमति बनाकर संकट टाल लेगी? फिलहाल जवाब भविष्य की बैठकों और फैसलों पर टिका है। 

दरअसल, 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद लगातार कांग्रेस में कलह वाली तस्वीर दिख रही है। इस बीच कांग्रेस नेता नागेंद्र पासवान विकल की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में बिहार कांग्रेस को उसकी दुर्दशा से उबारने के लिए भविष्य की रूपरेखा एवं कार्यक्रम तय किया गया। 

इस संदर्भ में पूर्व विधायक छत्रपति यादव ने पटना में एक महासम्मेलन का प्रस्ताव दिया। साथ ही साथ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसके लिए जिलेवार बैठक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिहार कांग्रेस को बचाने का एक मात्र उपाय है कि हम जिले स्तर पर संगठित हों। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य आनंद माधव ने कहा कि पहले टिकट बंटवारे में लूट हुई थी, अब संगठन सृजन के नाम पर लूट मचेगी। दलालों की फौज आ चुकी है।

उन्होंने कहा कि आलाकमान को यह समझना होगा कि विश्वसनीयता खो देने वाली टीम के नेतृत्व में किया गया कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता है। जिन लोगों ने टिकट बेचा है आज वो अध्यक्ष पद बेचेंगे, इसलिए बिना विलंब के कृष्णा अल्लावरू एवं राजेश राम को हटाना होगा। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आगामी 17 मार्च को पटना में एक बिहार कांग्रेस बचाओ महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

Web Title: The cloud of crisis continues to hang over the Bihar Pradesh Congress, the leader of the legislative party has not yet been decided, and the disgruntled faction has also launched a protest

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