असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन?, सोनिया गांधी ने कहा- ‘परिसीमन प्रस्ताव अत्यंत खतरनाक’ और ‘संविधान पर हमला’
By सतीश कुमार सिंह | Updated: April 13, 2026 10:12 IST2026-04-13T10:07:41+5:302026-04-13T10:12:59+5:30
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि केंद्र सरकार ने इस सप्ताह संसद का विशेष सत्र विधानसभा में आरक्षण के बजाय परिसीमन के मुद्दे पर बुलाया है।

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नई दिल्लीः कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को जोर देकर कहा कि इस सप्ताह संसद के विशेष सत्र में विधेयक लाने के सरकार के कदम को लेकर असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन है। गांधी ने दावा किया कि यह ‘‘परिसीमन प्रस्ताव अत्यंत खतरनाक’’ है और ‘‘संविधान पर भी हमला’’ है। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सभी दलों को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन के लिए समर्थन मांगने के बाद सामने आई है। महिला आरक्षण विधेयक, या नारी शक्ति वंदन अधिनियम, विधायी निकायों में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है।
इसे संसद ने 2023 में पारित किया था। एक प्रस्तावित विधेयक में इसके कार्यान्वयन को 2027 की जनगणना से अलग करने और इसे 2011 की जनगणना पर आधारित करने का प्रस्ताव है, ताकि यह 2029 के आम चुनाव से पहले लागू हो सके। गांधी ने कहा है कि प्रधानमंत्री विपक्ष से उन विधेयकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
संसद के विशेष सत्र में जबरदस्ती पारित कराना चाहते हैं, जबकि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। उन्होंने लिखा, "इस असाधारण जल्दबाजी का केवल एक ही कारण हो सकता है, और वह है राजनीतिक लाभ उठाना और विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में डालना। प्रधानमंत्री हमेशा की तरह सच को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं।"
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने ही महिला आरक्षण विधेयक को अगली जनगणना से जोड़ा है। उन्होंने लिखा, "विपक्ष ने यह शर्त नहीं रखी थी। दरअसल, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पुरजोर मांग की थी कि आरक्षण का प्रावधान 2024 के लोकसभा चुनावों से ही लागू किया जाए। सरकार ने अपने कारणों से इस पर सहमति नहीं जताई।"
“The monsoon session of Parliament will begin in mid-July. The heavens will not fall if the government were to call an all-party meeting after April 29 to discuss its proposals with the Opposition, allowing time for a public debate, and then have the Constitution Amendment Bills… pic.twitter.com/oYC0HRbytH
— Congress (@INCIndia) April 13, 2026
संसद का मानसून सत्र जुलाई के मध्य में शुरू होगा। अगर सरकार 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर विपक्ष के साथ अपने प्रस्तावों पर चर्चा करे, जिससे सार्वजनिक बहस का समय मिल सके और फिर मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयकों पर विचार किया जाए।
तो आसमान नहीं गिर पड़ेगा। मुश्किल समय में राजनीतिक माहौल को अपने पक्ष में करने के अलावा, हमारी राजनीति में इतने बड़े बदलाव लाने की इस जल्दबाजी का कोई औचित्य नहीं है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण और अलोकतांत्रिक है। महिलाओं के लिए आरक्षण यहाँ मुद्दा नहीं है।
वह तो पहले ही तय हो चुका है। असली मुद्दा परिसीमन है, जो अनौपचारिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर, बेहद खतरनाक है और संविधान पर सीधा हमला है।” यहाँ सीपीपी अध्यक्ष सोनिया गांधी जी का द हिंदू में प्रकाशित एक लेख है, जिसका शीर्षक है 'महिलाओं के आरक्षण से ज़्यादा परिसीमन मुद्दा है'।
Congress Parliamentary Party (CPP) Chairperson, Smt. Sonia Gandhi asserts that the real issue why the Modi Govt is calling a special session of Parliament is not Women’s Reservation but delimitation and delaying & derailing Caste Census.
— Mallikarjun Kharge (@kharge) April 13, 2026
Do read her opinion in @the_hindu today,… pic.twitter.com/0MAhhfcfwC
“Any delimitation involving an increase in the strength of the Lok Sabha must be politically, and not just arithmetically equitable.”
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 13, 2026
Congress Parliamentary Party Chairperson Sonia Gandhi ji writes about how the real concern in the important process of women’s reservation are… pic.twitter.com/y9JARS8bRU