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क्या मोहन भागवत का बयान वाकई 'विवादित' है? आइए समझते हैं

By सुवासित दत्त | Updated: February 12, 2018 16:02 IST

हम भागवत के उस बयान को शब्द-दर-शब्द समझने की कोशिश करते हैं कि उस बयान में क्या गलत है और क्या सही। 

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आज बात आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन राव भागवत के एक बयान की जिसकी वजह से पिछले दो दिनों से देश की राजनीति गरमाई हुई है। क्या सच में ये बयान ऐसा है जिसे राजनीतिक रंग देकर एक बड़ा विवाद बनाया जा सके? संघ और उससे जुड़े कई बयान आते रहते हैं जिस पर आए दिन विवाद होते रहते हैं। हम भागवत के उस बयान को शब्द-दर-शब्द समझने की कोशिश करते हैं कि उस बयान में क्या गलत है और क्या सही। 

पढ़ें: मोहन भागवत के विवादित बोल- मिलिट्री 6 महीने में सेना तैयार करती है, संघ 3 दिन में कर सकता है

आरएसएस को लेकर देश में लोगों की अलग-अलग राय है। कुछ लोग इसे एक राष्ट्रवादी संस्था मानते हैं वहीं, कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सोहार्द बिगाड़ने वाली एक संस्था का नाम देते हैं। एक लोकतांत्रिक देश होने के नाते लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है और हमें उसका पूरा सम्मान भी करना चाहिए।

आइए, समझते हैं कि ये विवाद शुरू कहां से हुआ। दरअसल, संघ प्रमुख मोहन भागवत 6 फरवरी से बिहार के मुजफ्फरपुर में प्रवास पर हैं। भागवत ने वहां स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा, 'देश को अगर हमारी ज़रूरत पड़े तो हम उसकी सेवा के लिए तुरंत तैयार हो जाएंगे। अगर हमारा संविधान हमें इजाज़त दे तो हम सेना की तरह देश की सेवा करेंगे। सेना को तैयार करने में 6-7 महीने लग जाते हैं लेकिन, हमारा अनुशासन ऐसा है कि हमें इसकी तैयारी के लिए दो से तीन दिन ही लगेंगे।'

भागवत के इस बयान के बाद जो विवाद खड़ा हुआ है उससे पूरा देश वाकिफ है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भागवत पर सेना का अपमान करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर भागवत के इस बयान की निंदा की है। ताज्जुब की बात तो ये है कि मीडिया एक तबका भी विपक्षी पार्टियों की तरह बर्ताव कर रहा है और भागवत के इस बयान को सेना के अपमान से जोड़ रहा है।

अब आइए, एक नज़र डालते हैं मोहन भागवत के उस पूरे बयान पर जिसे आरएसएस ने अपने ट्विटर हैंडल के ज़रिए जारी किया है और कहा है कि भागवत के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

जैसा कि आप वीडियो में सुन पा रहे हैं कि मोहन भागवत के इस बयान में सेना के अपमान जैसी कोई बात सुनाई नहीं दे रही। भागवत ने साफ कहा है कि, 'हम मिलिट्री संगठन नहीं हैं। मिलिट्री जैसा अनुशासन हम में हैं। और अगर देश को ज़रूरत पड़े, देश का संविधान और कानून कहे तो सेना के जवानों को तैयार करने में 6-7 महीना लग जाएगा लेकिन संघ के स्वयंसेवक तीन दिन में तैयार हो जाएंगे। ये हमारी क्षमता है। हम मिलिट्री संगठन नहीं हैं, पैरा-मिलिट्री भी नहीं हैं। हम तो पारिवारिक संघठन हैं।'

इस 29 सेकेंड के क्लिप में भागवत द्वारा कहे गए शब्दों पर गौर करें तो कहीं भी इसमें सेना का अपमान जैसा कुछ भी नहीं है। यहां भागवत ने सेना के अनुशासन को बेहतर माना है और ये भी माना है कि हम सेना की तरह मिलिट्री या पैरा-मिलिट्री संगठन नहीं हैं, हम पारिवारिक संगठन हैं अगर देश का कानून हमें इजाज़त दे कि हम देश की सेवा करें तो हमारा अनुशासन ऐसा है कि हम तीन दिन में खुद को लड़ने के लिए तैयार कर सकते हैं।

लेकिन, मोहन भागवत के इस बयान को विपक्षी पार्टियों ने गंभीर रूप से लिया है और आरएसएस और केंद्र सरकार पर निशाना साधने से नहीं चूक रही हैं। केंद्र सरकार के मंत्री किरण रिजिजू और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मोहन भागवत का बचाव किया है। लेकिन, यहां आपको तय करना है कि क्या सचमुच ये बयान विवादित था?

टॅग्स :मोहन भागवतआरएसएसकांग्रेसबीजेपीनरेंद्र मोदीअमित शाहनितीश कुमार
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