भारत के प्रेसिडेंट को हिन्दी में क्या लिखें इसपर पहले भी हो चुका है विवाद, जानिए इसका इतिहास

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Published: July 30, 2022 03:39 PM2022-07-30T15:39:12+5:302022-07-30T16:18:41+5:30

28 जुलाई को कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपत्नी कह कर संबोधित किया। कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद संसद में हंगामा मच गया। सत्ताधारी दल ने चौधरी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दोनों से इस मुद्दे पर माफी मांगने के लिए कहा ।

Rashtrapatni debate dates back to 1947, know everything about the Rashtrpatni Row | भारत के प्रेसिडेंट को हिन्दी में क्या लिखें इसपर पहले भी हो चुका है विवाद, जानिए इसका इतिहास

भारत के प्रेसिडेंट को हिन्दी में क्या लिखें इसपर पहले भी हो चुका है विवाद, जानिए इसका इतिहास

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Highlights25 जुलाई 2007 को भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शपथ ली थी तब भी इसी तरह की बहस हुई थी। 1947 में संविधान सभा में राष्ट्रपति शब्द को लेकर बहस हुई। 1948 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने हिंदी में राष्ट्रपति की जगह हिंद का एक प्रेसीडेंट को संविधान मसौदा में रखने का सुझाव दिया

नई दिल्ली : भारत को द्रौपदी मुर्मू के रूप में देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति मिली है। जबकि मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं। 28 जुलाई को कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपत्नी कह कर संबोधित किया। कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद संसद में हंगामा मच गया । हालांकि इसके बाद एक पुरानी बहस फिर से शुरू हो गई कि लोकतांत्रिक देश में शीर्ष पद पर आसीन शख्स को राष्ट्रपति कहा जाता है तो अगर उस पद पर एक महिला हो तो उसे क्या कह कर संबोधित किया जाता चाहिए। राष्ट्रपत्नी शब्द का विवाद कोई नया नहीं है लेकिन आखिर इस बहस की शुरूआत कहां से हुई। क्या इससे पहले भी किसी महिला राष्ट्रपति को राष्ट्रपत्नी कहा गया है। जानिए इस विवाद के बारे में सब कुछ 

क्या है पूरा विवाद ?

संसद का मानसून सत्र चल रहा है। गुरूवार को संसद के सत्र में बहस हुई लेकिन महंगाई, जीएसटी जैसे किसी मुददे पर नहीं बल्कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन के उस बयान पर जिसमें उन्होंने देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति को राष्ट्रपत्नी कहकर संबोधित किया। बीजेपी के सांसदों ने इसे राष्ट्रपति का अपमान कहा। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और राज्यसभा में निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में भाजपा ने जोरदार विरोध किया। सत्ताधारी दल ने चौधरी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दोनों से इस मुद्दे पर माफी मांगने के लिए कहा है।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल करने में गलती की है उनकी जुबान फिसल गई। इसके बाद से ही देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को संबोधित करने के उचित तरीके पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। खैर ये विवाद इससे पहले भी कई बार हुआ है। 

2007 में भी राष्ट्रपति को कहा गया था राष्ट्रपत्नी

25 जुलाई 2007 को भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शपथ ली थी तब भी इसी तरह की बहस हुई थी। तब कुछ लोगों की तरफ से प्रतिभा पाटिल को संबोधित करने के लिए राष्ट्रपत्नी शब्द का इस्तेमाल करने की बात कही गई लेकिन उस वक्त इसे अमल में नहीं लाया गया। तब प्रतिभा पाटिल ने इस बहस को ज्यादा भाव नहीं देकर ये कहा कि वह राष्ट्रपति ही कहलाना पसंद करेंगी। तब ये बहस वहीं थम गई। कुछ सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भी राष्ट्रपति शब्द को पितृसत्तात्मक सोच वाला शब्द बताया था। उन लोगों का मानना था कि राष्ट्रपति में पति मतलब पुरूष है। बहरहाल ये बहस उससे भी पुरानी है कि एक महिला अगर देश के शीर्ष पद पर आसीन होती है तो हिंदी में उसे किस शब्द से संबोधित करना चाहिए। 

1947 में शुरू हुई थी बहस

भारत की आजादी से पहले ही इस विवाद की शुरूआत हुई। 1947 में संविधान सभा में राष्ट्रपति शब्द को लेकर बहस हुई। तब राष्ट्रपति शब्द की जगह राष्ट्रनेता या राष्ट्रकर्णधार जैसे शब्दों का सुझाव प्रेसीडेंट के हिंदी संबोधन के रूप में बताए गए लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी। इसके बाद ये मामला एक कमेटी को सौंप दिया गया। हालांकि बाद में वहीं विवाद का अंत हो गया और तय हुआ कि प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया के लिए हिंदी में राष्ट्रपति शब्द का ही इस्तेमाल किया जाए। विवाद भले ही उस वक्त थम गया लेकिन इसी विवाद ने फिर जोर पकड़ा 1948 में। 

जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्रपति शब्द पर लगाई मुहर

दिसंबर 1948 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने हिंदी में राष्ट्रपति की जगह 'हिंद का एक प्रेसीडेंट' को संविधान मसौदा में रखने का सुझाव दिया जबकि अंग्रेजी के ड्राफ्ट में इसे प्रेसीडेंट ही रखा गया। इसपर भी सहमति नहीं बन पाई जिसके बाद हिंदी के मसौदे में इसे प्रधान लिखा गया और उर्दू में सरदार। तब संविधान सभा में कई तरह के सुझाव रखे गए लेकिन सभी खारिज कर दिए गए। आखिर में जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्रपति शब्द पर मुहर लगाई और उसके बाद से इसी शब्द को इस्तेमाल किया गया। 

जेंडर न्यूट्रल शब्दों पर दिया जा रहा जोर

हालांकि राष्ट्रपति शब्द का विरोध आखिर क्यों होता रहा है इस पर बात की जाए तो कई सामाजिक कार्यकर्ता इस पर अपना अपना तर्क देते हैं। उनका मानना है कि वक्त के साथ हमें जेंडर न्यूट्रल शब्दों पर जोर देना चाहिए। कई शब्दों को पिछले कुछ सालों में बदला भी गया है। बता दें कि अब फायरमैन की जगह फायरफाइटर चेयरमैन की जगह चेयरपर्सन लेडी डॉक्टर की जगह केवल डॉक्टर स्टीवर्ड की जगह फ्लाइट अटैंडेंट बारमैन या बारमेड की जगह बारटेंडर जैसे शब्द प्रयोग में लाए जाने लगे हैं। 

Web Title: Rashtrapatni debate dates back to 1947, know everything about the Rashtrpatni Row

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