रमेश पोखरियाल निशंक: अविभाजित यूपी के समय से ही राजनीति का बड़ा चेहरा, कहानियों-कविताओं पर लिखे चुके हैं कई किताबें

By भाषा | Published: May 31, 2019 03:53 AM2019-05-31T03:53:44+5:302019-05-31T03:53:44+5:30

उत्तराखंड के पौडी जिले में पिनानी गांव में जन्मे साठ वर्षीय निशंक को लेखन का शौक है और उनकी कहानियों और कविताओं की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा देश-विदेश में कई पुस्तकालयों में शामिल हैं।

Ramesh Pokhriyal Nishank: Big face From the time of undivided UP, Wrote many books on stories and poems | रमेश पोखरियाल निशंक: अविभाजित यूपी के समय से ही राजनीति का बड़ा चेहरा, कहानियों-कविताओं पर लिखे चुके हैं कई किताबें

मोदी सरकार में मंत्री बने रमेश पोखरियाल निशंक (फाइल फोटो)

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हरिद्वार से लगातार दूसरी बार लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल किए गए रमेश पोखरियाल निशंक अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से ही राजनीति का एक जाना—पहचाना नाम रहे हैं। पत्रकारिता से राजनीति में कदम रखने वाले निशंक जून, 2009 में उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने से पहले ही उत्तर प्रदेश में लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बन चुके थे और उन्होंने वहां पर्वतीय विकास मंत्री का पद भी संभाला था।

उत्तराखंड के पौडी जिले में पिनानी गांव में जन्मे साठ वर्षीय निशंक को लेखन का शौक है और उनकी कहानियों और कविताओं की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा देश-विदेश में कई पुस्तकालयों में शामिल हैं।

एक उर्जावान राजनीतिज्ञ की छवि रखने वाले निशंक ने नब्बे के दशक की शुरूआत में राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभायी थी। उसके बाद उन्होंने 1991 में भाजपा के टिकट पर कर्णप्रयाग से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया । इसके बाद 1993 और 1996 में हुए विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने इस सीट को अपने कब्जे में बरकरार रखा ।

नवंबर, 2000 में जब उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य बना तो उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी के साथ मिलकर राज्य के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी के खिलाफ बगावत कर दी और उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने नहीं पहुंचे।

हालांकि, वरिष्ठ पार्टी नेताओं के मान-मनौव्वल के बाद निशंक ने राज्य के पहले वित्त मंत्री के रूप में शपथ ली। वर्ष 2002 में प्रदेश के पहले विधानसभा चुनावों में हालांकि, निशंक को थलीसैंण सीट से हार का सामना करना पड़ा लेकिन 2007 में अगले चुनावों में वह फिर जीतकर विधानसभा पहुंचे और भुवन चंद्र खंडूरी मंत्रिमंडल में मंत्री बने ।

वर्ष 2009 में प्रदेश की पांचों सीटों को कांग्रेस के हाथों हारने के बाद जब खंडूरी ने उसकी नैतिक जिम्मेदारी अपने सिर ली तो उनके स्थान पर निशंक को मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि, मुख्यमंत्री के रूप में अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान उन पर महाकुंभ आयोजन, 56 लघु पनबिजली परियोजनाओं के आवंटन और ऋषिकेश में सिटुर्जिया हाउसिंग परियोजना में घोटालों के कई आरोप लगे।

वर्ष 2012 विधानसभा चुनावों को निकट देखकर भाजपा ने एक बार फिर खंडूरी को उत्तराखंड की कमान सौंपने का निश्चय किया जिसके चलते निशंक को पद से हाथ धोना पड़ा। इसके बाद 2014 लोकसभा चुनावों में निशंक ने हरिद्वार से चुनाव लड़ा और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत की पत्नी रेणुका को पराजित करके संसद पहुंचे। इस साल एक बार फिर उन्होंने कांग्रेस को पटखनी देकर हरिद्वार सीट से दोबारा जीत हासिल की और मोदी मंत्रिमंडल में स्थान पाने में कामयाब रहे। 

Web Title: Ramesh Pokhriyal Nishank: Big face From the time of undivided UP, Wrote many books on stories and poems



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