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राज्यसभा में कांग्रेस सदस्य पीएल पुनिया ने वोटर लिस्ट बनाने की व्यवस्था में सुधार को बताया समय की मांग

By भाषा | Updated: July 30, 2019 16:41 IST

पीएल पुनिया ने कहा कि चुनाव सुधार के मुद्दे में मतदाता सूची में भी सुधार को भी प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिये। शून्यकाल में ही भाजपा के महेश पोद्दार ने गोमांस और चमड़ा उद्योग के लिये पालतू पशुओं की तस्करी पर सख्त निगरानी सुनिश्चित करने हेतु कानून को कठोर बनाने की मांग की।

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ठळक मुद्देमतदाता सूची से नाम गायब होने के कारण मतदाताओं को होने वाली परेशानियों का जिक्र करते हुये राज्यसभा में कांग्रेस के एक सदस्य ने मंगलवार को सुझाव दिया कि इस समस्या से निपटने के लिये स्थायी मतदाता सूची बनायी जानी चाहिये।राज्यसभा में शून्यकाल में कांग्रेस के पी एल पुनिया ने यह मुद्दा उठाते हुये कहा कि ऐसे मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है जिनके नाम मतदाता सूची से हट जाते हैं या गायब हो जाते हैं।

मतदाता सूची से नाम गायब होने के कारण मतदाताओं को होने वाली परेशानियों का जिक्र करते हुये राज्यसभा में कांग्रेस के एक सदस्य ने मंगलवार को सुझाव दिया कि इस समस्या से निपटने के लिये स्थायी मतदाता सूची बनायी जानी चाहिये। राज्यसभा में शून्यकाल में कांग्रेस के पी एल पुनिया ने यह मुद्दा उठाते हुये कहा कि ऐसे मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है जिनके नाम मतदाता सूची से हट जाते हैं या गायब हो जाते हैं।

उन्होंने ग्राम पंचायतों, विधानसभाओं और लोकसभा के लिये अलग अलग मतदाता सूची को भी समस्या की वजह बताते हुये कहा कि सभी चुनाव के लिये स्थायी मतदाता सूची होनी चाहिये। मतदाता द्वारा अपना निवास परिवर्तित करने पर ही उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जाना चाहिये।

पुनिया ने कहा कि चुनाव सुधार के मुद्दे में मतदाता सूची में भी सुधार को भी प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिये। शून्यकाल में ही भाजपा के महेश पोद्दार ने गोमांस और चमड़ा उद्योग के लिये पालतू पशुओं की तस्करी पर सख्त निगरानी सुनिश्चित करने हेतु कानून को कठोर बनाने की मांग की।

उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि बाघ संरक्षण के काम में लगे लोगों को सामाजिक कार्यकर्ता और कुत्तों के कल्याण में लगे लोगों को पशुप्रेमी कहा जाता है लेकिन गोरक्षा में लगे लोगों को ‘कट्टरपंथी’ करार दिया जाता है। अन्नाद्रमुक के एस मुथुकरुपन ने तमिलनाडु से बाहर अन्य राज्यों में अध्ययनरत छात्रों को तमिल भाषा के अध्ययन की सुविधा नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुये केन्द्र सरकार से अनुरोध किया कि अन्य राज्यों में भी तमिल को वैकल्पिक भाषा के रूप में शामिल किया जाना चाहिये।

इस पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि ‘‘यह काम तमिलनाडु को भी अन्य भाषाओं के मामले में करना चाहिये।’’ भाजपा के शिवप्रताप शुक्ला ने बाढ़ की समस्या पर काबू के लिये नदियों से गाद निकालने की नियमित व्यवस्था सुनिश्वित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नदियों को जोड़ने की परियोजना से इस समस्या के समाधान में मदद मिलेगी। कांग्रेस के मोतीलाल वोरा ने इसरो के वैज्ञानिकों के वेतन में कटौती का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के इस फैसले से 16 हजार वैज्ञानिक प्रभावित होंगे। उन्होंने सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की। बीजद के अमर पटनायक ने संस्थागत ऋण के कारण छोटे और सीमांत किसानों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया।

उन्होंने किसानों के ऋण के लिये पृथक गारंटी कोष बनाये जाने का सुझाव दिया। द्रमुक सदस्य टी के एस इलानगोवन ने टीशर्ट और सिल्क के कपड़ों के बांग्लादेश से आयात किए जाने के कारण भारतीय कपड़ा उद्योग के लिये उपजे खतरे का मुद्दा उठाया। माकपा के बिनॉय विस्वम ने भोजन का अधिकार कानून के तहत गरीबों के लिये सुरक्षित खाद्यान्न में चावल को मणिपुर एवं अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भेजने का मुद्दा उठाते हुये कहा कि इससे अन्य राज्यों में चावल की कालाबाजारी शुरु होने से गरीबों को अधिक कीमत पर चावल खरीदना पड़ रहा है।

तृणमूल कांग्रेस के मानस रंजन भूनिया ने पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था पर कर्ज के बढ़ते बोझ का मुद्दा उठाते हुये कहा कि राज्य की ममता बनर्जी सरकार इसके लिये गंभीर प्रयास कर रही है। इसमें केन्द्र सरकार को मदद करनी चाहिये। भाजपा के के जे अल्फोंस ने भारतीय शोध संस्थानों में विचारों और लेखों की चोरी के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुये सरकार से इस मामले में निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने की मांग की। जद (यू) के रामनाथ ठाकुर ने बैंकों द्वारा बचत खातों में निर्धारित राशि से कम राशि होने पर लगने वाले अर्थदंड को हटाने की मांग की।

उन्होंने बचत खाताधारकों से बैंकों द्वारा वसूली गयी राशि वापस कराने की भी मांग की। अन्नाद्रमुक की विजिला सत्यनाथन ने सैन्यबलों के लिये ड्रेस की आपूर्ति का काम निजी क्षेत्र से कराने के सरकार के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। माकपा सदस्य के के रागेश ने भारतीय खाद्य निगम द्वारा किसानों को दी गयी सब्सिडी का सरकार की ओर से पुनर्भुगतान नहीं होने के कारण निगम के समक्ष वित्तीय संकट पैदा होने का मुद्दा उठाया। 

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