PM MODI in SCO: countries sponsoring terrorism must be accountable, members of Bishkek Declare support | पीएम मोादी ने SCO में कहा- आतंकवाद को प्रायोजित कर रहे देशों को जवाबदेह बनाया जाए, सदस्यों ने बिश्केक घोषणा-पत्र में किया समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटो- एएनआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को प्रोत्साहन, समर्थन और धन मुहैया कराने वाले देशों की शुक्रवार को ‘एससीओ’ शिखर सम्मेलन में आलोचना की। साथ ही, उन्होंने यहां मौजूद शीर्ष नेताओं से कहा कि ऐसे देशों को अवश्य ही जवाबदेह ठहराया जाए। मोदी ने पाकिस्तान का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए यह कहा,हालांकि वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान भी उपस्थित थे। मोदी ने यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए आतंकवाद से निपटने के लिए एक वैश्विक सम्मेलन का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग को मजबूत करने की एससीओ की भावना और उसके विचारों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक आतंकवाद मुक्त समाज की हिमायत करता है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं पिछले रविवार श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान सेंट एंथनी गिरजाघर गया, जहां मैंने आतंकवाद का घिनौना चेहरा देखा। इस आतंकवाद ने हर जगह निर्दोष लोगों की जान ली है।’’ उन्होंने श्रीलंका में ईस्टर के दिन हुए आतंकी हमलों में निशाना बनाए गए इस स्थान का जिक्र करते हुए यह कहा। इन हमलों में 258 लोग मारे गए थे। मोदी ने कहा कि आतंकवाद की बुराई से लड़ने के लिए राष्ट्रों को इसके खिलाफ एकजुट होने की खातिर अपने संकीर्ण दायरे से बाहर निकलना होगा। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी में यह कहा।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आतंकवाद को प्रोत्साहन, समर्थन और धन मुहैया कराने वाले राष्ट्रों को जिम्मेदार ठहराना जरुरी है।’’ उन्होंने कहा कि एससीओ के सदस्य देशों को आतंकवाद का खात्मा करने के लिए एससीओ-क्षेत्रीय आतंक रोधी ढांचा(आरएटीएस) के तहत सहयोग करना चाहिए। मोदी ने कहा, ‘‘साहित्य एवं संस्कृति हमारे समाज को एक सकारात्मक गतिविधि प्रदान करते हैं। खासकर, वे हमारे समाज के युवाओं में चरमपंथ के प्रसार को रोकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि एक शांतिपूर्ण, एकीकृत, सुरक्षित और समृद्ध अफगानिस्तान एससीओ में स्थिरता और सुरक्षा के लिए जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य अफगान नीत, अफगान का अपना और अफगान नियंत्रित व्यापक शांति प्रक्रिया का समर्थन करना है। हम इस बात को लेकर खुश हैं कि एससीओ अफगानिस्तान संपर्क समूह में आगे का एक खाका तैयार किया गया है। ’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के एससीओ का पूर्ण सदस्य देश बने दो साल हो गए हैं।

भारत ने एससीओ की सभी गतिविधियों में सकारात्मक योगदान दिया है। मोदी दो दिवसीय एससीओ सम्मेलन के लिए बृहस्पतिवार को बिश्केक पहुंचे थे। एससीओ चीन के नेतृत्व वाला आठ सदस्यीय आर्थिक एवं सुरक्षा संगठन है, जिसमें भारत और पाकिस्तान को 2017 में शामिल किया गया। भारत अपने यहां हुए आतंकवादी हमलों के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराता रहा है और उसने पाकिस्तान से कहा है कि वह अपनी सरजमीं से संचालित हो रहे आतंकवादी संगठनों की मदद करना बंद कर दे।

पठानकोट एयरबेस में जनवरी 2016 में एक पाकिस्तानी आतंकी संगठन द्वारा किए गए हमले के बाद भारत पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से बातचीत नहीं कर रहा है। भारत का यह कहना है कि वार्ता और आतंकवाद साथ- साथ नहीं चल सकते। वहीं, इस साल की शुरुआत में भारत-पाक संबंध उस वक्त और तनावपूर्ण हो गए, जब 14 फरवरी को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती हमले में कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। इसके बाद, भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर पर हवाई हमला किया था। इसके अगले ही दिन पाकिस्तानी वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई की और इस हवाई झड़प में भारत के एक मिग-21 विमान को गिरा दिया तथा वायुसेना के एक पायलट को पकड़ लिया। इसपर, चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव घटाने की कोशिश की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ सदस्यों के बीच व्यापक सहयोग का किया आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद से मुकाबले, अर्थव्यवस्था, वैकल्पिक ऊर्जा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने में एससीओ देशों के बीच व्यापक सहयोग का आह्वान करते हुए क्षेत्र में शांति और आर्थिक समृद्धि के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यापक सहयोग के लिए उन्होंने ‘हेल्थ’ शब्द पर जोर दिया । मोदी ने कहा, ‘‘हमारा दृष्टिकोण हमारे बीच स्वस्थ सहयोग को मजबूत करना है। ‘हेल्थ’ शब्द का इस्तेमाल कर हम सहयोग के लिए अच्छा आदर्श बना सकते हैं।’’

मोदी ने ‘हेल्थ’ शब्द को विस्तार से बताया, ‘‘एच से हेल्थकेयर को-ऑपरेशन(स्वास्थ्य सुविधा सहयोग), ई से इकनॉमी को-ऑपरेशन (अर्थव्यवस्था सहयोग), ए से अल्टरनेट एनर्जी (वैकल्पिक ऊर्जा), एल से लेंग्वेज एंड लिटरेचर (साहित्य और संस्कृति), टी से टेररिज्म फ्री सोसाइटी (आतंकवाद मुक्त समाज) और एच से हयूमनिटेरियन कोऑपरेशन (मानवीय सहयोग)।’’ उन्होंने कहा कि एससीओ क्षेत्र और भारत का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति हजारों वर्षों से आपस में जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘आधुनिक समय में बेहतर संपर्क के लिए हमारा साझा क्षेत्र समय की जरूरत है ।’’

मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय उत्तरी दक्षिण परिवहन कॉरिडोर, चाबहार बंदरगाह, असगाबट समझौते संपर्क पर भारत के फोकस को स्पष्ट करता है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरने वाले चीन के चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, सुशासन, पारदर्शिता, व्यावहारिकता और स्थिरता संपर्क पहल का आधार होना चाहिए । लोगों के आपसी संपर्क का महत्व कम नहीं है। ’’ उन्होंने कहा कि एससीओ का सदस्य बने हुए भारत को दो साल हो चुके हैं और भारत ने एससीओ की गतिविधियों में सकारात्मक योगदान दिया है ।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे नौजवानों को एक दूसरे के साहित्य की पेशकश करने से हमारे संबंध मजबूत होंगे। भारत की 10 शीर्ष रचनाओं का एससीओ के सदस्य देशों की भाषाओं में अनुवाद होगा। ’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने के प्रति कटिबद्ध है। आज भारत नवीकरणीय ऊर्जा का छठा सबसे बड़ा उत्पदक और सौर ऊर्जा का पांचवां बड़ा उत्पादक है। उन्होंने साथ ही कहा कि आतंकवाद के खतरे से मुकाबले के लिए देशों को अपने संकीर्ण दायरे से उठकर इसके खिलाफ एकजुट होना पड़ेगा ।

उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवाद को प्रायोजित करने, सहायता करने और वित्त पोषण करने वाले देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’’ इस शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी थे। उन्होंने कहा कि आपदा और मानवीय सहयोग की दिशा में भारत बड़ी भूमिका निभा रहा है। मोदी एससीओ के दो दिवसीय सम्मेलन के लिए बृहस्पतिवार को किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक आए हैं । 

मोदी ने संरक्षणवाद की आलोचना की, नियम आधाारित व्यापार प्रणाली का आह्वान किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एकतरफा नीतियों और व्यापार में संरक्षणवाद पर शुक्रवार को चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि नियम आधारित, भेदभाव रहित और हर तरीके से समावेशी विश्व व्यापार संगठन केंद्रित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की जरूरत है। मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यहां कहा कि एकतरफावाद और संरक्षणवाद से लोगों को किसी तरह का फायदा नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘आर्थिक तालमेल हमारे लोगों के भविष्य का आधार है।’’ मोदी ने कहा, ‘‘हमें नियम आधारित, पारदर्शी, भेदभाव रहित, खुली और समावेशी डब्ल्यूटीओ केंद्रित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की जरूरत है जो सभी देशों विशेषकर विकासशील देशों के हितों का ख्याल रख सके।’’ प्रधानमंत्री ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मौजूदगी में कहा कि भारत एससीओ के सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इससे पहले मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि उनकी शी के साथ बैठक काफी रचनात्मक रही। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर बातचीत हुई। दोनों देशों ने आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। इस बीच एससीओ के नेताओं ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में तनाव के माहौल पर शुक्रवार को चिंता जताते हुए कहा कि एकतरफा संरक्षणवादी नीतियों में वृद्धि समेत वैश्विक व्यापार की अन्य चुनौतियों से आर्थिक वैश्वीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

आठ सदस्यीय समूह के नेताओं ने कहा कि डब्ल्यूटीओ के नियमों एवं नियमनों का उल्लंघन करने वाले एकतरफा संरक्षणवादी कदमों से बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का महत्व कम हो रहा है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा व्यापार को नुकसान हो रहा है। एससीओ की राष्ट्रों के प्रमुखों की समिति की एक बैठक के बाद नेताओं ने राजनीति, सुरक्षा, व्यापार और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में तालमेल विकसित करने तथा सांस्कृतिक एवं मानवीय संबंधों को बढ़ाने की भी वकालत की। 

भारत सहित एससीओ सदस्यों ने बिश्केक घोषणा-पत्र में आतंकवाद की एक सुर में निंदा की

भारत और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के अन्य सदस्य देशों ने शुक्रवार को आतंकवाद के हर स्वरूप की निंदा की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद से मुकाबले में सहयोग बढ़ाने की अपील की। एससीओ की राष्ट्राध्यक्ष परिषद के बिश्केक घोषणा-पत्र के मुताबिक, सदस्य देशों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवादी एवं चरमपंथी कृत्यों को सही नहीं ठहराया जा सकता। घोषणा-पत्र में कहा गया कि आतंकवाद, आतंकवादी एवं चरमपंथी विचारधारा का फैलाव, जनसंहार के हथियारों का प्रसार, हथियारों की होड़ जैसी चुनौतियां और सुरक्षा संबंधी खतरे सीमा पार प्रकृति के होते जा रहे हैं। इन पर वैश्विक समुदाय द्वारा विशेष ध्यान देने, बेहतर समन्वय और रचनात्मक सहयोग करने की जरूरत है।

बिश्केक घोषणा-पत्र के मुताबिक, ‘‘सदस्य राष्ट्र आतंकवाद के हर स्वरूप की निंदा करते हैं।’’ घोषणा-पत्र में कहा गया, ‘‘वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान करते हैं कि आतंकवाद से मुकाबले में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दें। इसमें संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका हो, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को बगैर किसी राजनीतिकरण और दोहरे मानदंड के पूरी तरह लागू करेगा और ऐसा करते हुए सभी देशों की संप्रभुता एवं आजादी के प्रति आदर का भाव रखेगा।’’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां एससीओ शिखर सम्मेलन में शुक्रवार को हिस्सा लिया। एससीओ चीन की अगुवाई वाला आठ देशों का आर्थिक एवं सुरक्षा समूह है। भारत और पाकिस्तान को इसमें 2017 में शामिल किया गया था। चीन, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान एसीओ के अन्य सदस्य देश हैं। सदस्य देशों ने वैश्विक समुदाय से यह अपील भी की कि वे अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) पर आम राय बनाने की दिशा में काम करें।


Web Title: PM MODI in SCO: countries sponsoring terrorism must be accountable, members of Bishkek Declare support
भारत से जुड़ी हिंदी खबरों और देश दुनिया की ताज़ा खबरों के लिए यहाँ क्लिक करे. यूट्यूब चैनल यहाँ सब्सक्राइब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Page लाइक करे