लाइव न्यूज़ :

बिहार के स्थायी निवासियों को झारखंड की नौकरी में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगाः हाईकोर्ट

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 25, 2020 20:41 IST

न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति बीबी मंगलमूर्ति भी थे। सबसे पहले, पीठ का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति एचसी मिश्र ने अपना आदेश पढ़कर सुनाया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थी एकीकृत बिहार के समय से ही झारखंड क्षेत्र में रह रहा है, इसलिए उसे आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

Open in App
ठळक मुद्देराज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया और प्रार्थियों को नौकरी में बहाल करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने अपना आदेश पढ़ते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बीर सिंह के मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया।

झारखंड उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी कि बिहार के स्थायी निवासियों को झारखंड राज्य की नौकरी में किसी भी प्रकार के आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।

उच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने बहुमत से आज इस मामले में अपना फैसला सुनाया। पीठ के दो न्यायाधीशों ने एक मत से यह फैसला सुनाया, वहीं पीठ का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति एचसी मिश्र ने इससे असहमति जताई और कहा कि राज्य बनने से पहले से बिहार से यहां आकर रह रहे लोगों को भी राज्य की सेवा में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

इस पीठ में न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति बीबी मंगलमूर्ति भी थे। सबसे पहले, पीठ का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति एचसी मिश्र ने अपना आदेश पढ़कर सुनाया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थी एकीकृत बिहार के समय से ही झारखंड क्षेत्र में रह रहा है, इसलिए उसे आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने यह कहते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया और प्रार्थियों को नौकरी में बहाल करने का आदेश दिया। इसके बाद न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने अपना आदेश पढ़ते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बीर सिंह के मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया और कहा कि एक राज्य का निवासी दूसरे राज्य में आरक्षण का हकदार नहीं होगा। यही आदेश बीबी मंगलमूर्ति का भी था।

इसके बाद दोनों जजों ने प्रार्थियों की अपील को खारिज करते हुए सरकार के पक्ष को सही माना। इससे पूर्व सुनवाई के दौरान पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने पीठ को बताया था कि एकीकृत बिहार के समय से अथवा 15 नवंबर 2000 से राज्य में रहने के बाद भी वैसे लोग आरक्षण के हकदार नहीं होंगे जिनका ओरिजिन (मूल) झारखंड नहीं होगा। आरक्षण का लाभ सिर्फ उन्हें ही मिलेगा जो झारखंड के मूल निवासी होंगे। इस मामले में प्रार्थी की ओर से कहा गया था कि एकीकृत बिहार वर्तमान बिहार और वर्तमान झारखंड में उनकी जाति एससी-एसटी व ओबीसी के रूप में शामिल है इसलिए वर्तमान झारखंड में उन्हें एससी-एसटी व ओबीसी के रूप में आरक्षण मिलना चाहिए।

उनका कहना था कि पिछले कई सालों से वे झारखंड क्षेत्र में रह रहे हैं और सिर्फ इसलिए उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है कि वो वर्तमान में बिहार राज्य के स्थाई निवासी हैं। उन्होंने न्यायालय को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 16 (4) में जो अधिकार मिला हुआ है। उसके अनुसार उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए। इस मामले में वादी पंकज यादव की झारखंड में सिपाही के रूप में बहाली हुई थी। इस दौरान बिहार के स्थाई निवासियों ने आरक्षण का लाभ लिया था।

बाद में मामला उजागर होने पर उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद पंकज कुमार ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। एकलपीठ ने सरकार के फैसले खारिज करते हुए उन्हें बहाल करने का निर्देश दिया। इसके बाद सरकार ने खंडपीठ में अपील की।

एक दूसरे मामले में रंजीत कुमार सहित सात अभ्यर्थियों ने पुलिस में बहाली आरक्षण का लाभ नहीं मिलने पर उच्च न्यायालय की शरण ली थी। एकलपीठ ने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इन्होंने भी खंडपीठ में अपील दाखिल की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों मामलों को खंडपीठ ने एक साथ टैग करते हुए 9 अगस्त 2018 को तीन न्यायाधीशों की पीठ को सुनवाई के लिए भेजने की अनुशंसा की थी। इसके बाद बड़ी पीठ में मामले की सुनवाई हुई।

टॅग्स :झारखंडहाई कोर्टबिहारहेमंत सोरेननीतीश कुमार
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टबिहार के मोतिहारी जिले में जहरीली शराब कांड में मरने वालों की संख्या हुई 10, कई लोगों की स्थिति अभी भी गंभीर

भारतबिहार में CM नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग को लेकर महिलाओं ने शुरू किया सत्याग्रह

क्राइम अलर्टबिहार की राजधानी पटना से सटे खगौल में अपराधियों ने खुद को कस्टम अधिकारी बताकर स्वर्ण व्यापारियों से लूटा 16 किग्रा सोना

भारतWATCH: बिहार के सारण जिले में जदयू के प्रखंड अध्यक्ष का एक लड़की के साथ अश्लील वीडियो वायरल, दोनों आपत्तिजनक अवस्था में थे खेत में एक लड़की नेता के पीछे भाग रही है

भारतबिहार में सत्ता हस्तांतरण को लेकर सियासी हलचल हुई तेज, 12 अप्रैल को नीतीश कुमार दे सकते हैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, भाजपा में मुख्यमंत्री को लेकर जारी है मंथन 

भारत अधिक खबरें

भारतबारामती विधानसभा उपचुनावः सीएम फडणवीस की बात नहीं मानी?, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को चुनाव मैदान में उतारा

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल

भारतयूपी बोर्ड ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक NCERT और अधिकृत पुस्तकें अनिवार्य कीं

भारतपाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमले की धमकी वाले बयान पर सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' अंदाज़ में आई प्रतिक्रिया