कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को राहत?, सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत
By सतीश कुमार सिंह | Updated: May 1, 2026 12:00 IST2026-05-01T11:52:50+5:302026-05-01T12:00:33+5:30
सुप्रीम कोर्ट ने 30 अप्रैल को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज मानहानि और जालसाजी के मामले में अग्रिम जमानत दे दी।

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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर झूठे आरोप लगाने से जुड़े जालसाजी और मानहानि के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने खेड़ा को जांच में सहयोग करने और समन मिलने पर पेश होने का निर्देश दिया है, साथ ही सबूतों को प्रभावित करने या उनमें छेड़छाड़ करने से बचने को भी कहा है।
Supreme Court grants anticipatory bail to Congress leader Pawan Khera in forgery and defamation case linked to the allegedly making false allegations against the wife of Assam CM Himanta Biswa Sarma, Riniki Bhuyan Sharma. pic.twitter.com/tvqYgeGpEh
— ANI (@ANI) May 1, 2026
न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के अग्रिम जमानत देने से इनकार करने वाले आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि मामले की परिस्थितियां राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की मौजूदगी का संकेत देती हैं, जिसके चलते खेड़ा की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा आवश्यक है।
खेड़ा को यह भी बताया गया है कि वे कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकते। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को जरूरत पड़ने पर इन शर्तों में और शर्तें जोड़ने की अनुमति भी सुरक्षित रखी है, साथ ही उसे जमानत सुनवाई में उद्धृत दस्तावेजों या तथ्यों को नजरअंदाज करने का निर्देश दिया है। गुरुवार को दोनों पक्षों की तीखी टिप्पणियों से भरी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खेडा द्वारा यह दावा करने के बाद कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति है, उनके खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया। असम पुलिस 7 अप्रैल को दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर गई थी, लेकिन वे वहां मौजूद नहीं थे।
इसके बाद खेड़ा ने तेलंगाना उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल को उन्हें एक सप्ताह की मोहलत दी ताकि वे असम की अदालतों में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर सकें। 15 अप्रैल को असम सरकार द्वारा दायर अपील पर सर्वोच्च न्यायालय ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के 10 अप्रैल के आदेश पर रोक लगा दी।
इसके बाद 17 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के लिए कहा। इसके बाद खेड़ा ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। 24 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे "अभूतपूर्व मामला" बताया और मुख्यमंत्री को "अभियोजक के बॉस के बॉस के बॉस" कहकर तंज कसा। डॉ. अंबेडकर अपनी कब्र में करवट बदल लेंगे अगर उन्हें यह पता चले कि कोई संवैधानिक पदधारी किसी काउबॉय या रैम्बो की तरह बोलेगा।