32 मंत्रियों ने किया 90 सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल?, चार गाड़ियों के काफिले के साथ कैबिनेट बैठक में पहुंचे बिहार सरकार के मंत्री?, अपील की धज्जियां उड़ाई
By एस पी सिन्हा | Updated: May 13, 2026 16:54 IST2026-05-13T16:53:25+5:302026-05-13T16:54:03+5:30
11 स्कॉर्पियो, एक जैमर लगी सफारी, तीन इनोवा, एक फॉर्च्यूनर, एक एंबुलेंस, दो बोलेरो, एक जीप और एक दमकल वाहन शामिल थे.

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पटनाः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की बार-बार अपील को बिहार की सत्ताधारी एनडीए सरकार ने बुधवार को खुलेआम रौंद दिया. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मुख्य सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए 32 मंत्रियों ने करीब 90 सरकारी गाड़ियों का भारी-भरकम काफिला इस्तेमाल किया। जबकि सचिवालय से उनके आवास की दूरी 100-200 मीटर है. मुख्यमंत्री इलेक्ट्रिक वाहन से सचिवालय पहुंचे, लेकिन उनके काफिले में करीब 21 पेट्रोल-डीजल वाहनों का लंबा काफिला शामिल था।
इसमें 11 स्कॉर्पियो, एक जैमर लगी सफारी, तीन इनोवा, एक फॉर्च्यूनर, एक एंबुलेंस, दो बोलेरो, एक जीप और एक दमकल वाहन शामिल थे. वहीं राज्य के अन्य 34 मंत्री भी तीन से चार गाड़ियों के काफिले के साथ कैबिनेट बैठक में पहुंचे. किसी भी मंत्री ने वाहन साझा नहीं किया। अधिकांश मंत्रियों के साथ पायलट, एस्कॉर्ट और स्टाफ वाहन भी मौजूद थे.
इसबीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में डीजल और पेट्रोल की खपत कम करने का फैसला अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट कर जानकारी साझा की. सरकार का कहना है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए ऊर्जा बचत और संसाधनों का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी हो गया है.
मुख्यमंत्री ने सबसे पहले अपने सरकारी काफिले(मुख्यमंत्री कारकेड) में वाहनों की संख्या कम करने का फैसला लिया है. इसके साथ ही मंत्रियों, निगम बोर्ड के अध्यक्षों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से भी अपील की गई है कि वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में अतिरिक्त वाहनों का इस्तेमाल न करें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि ईंधन की खपत कम करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. सरकार की ओर से मुख्यमंत्री काफिले में वाहनों की संख्या न्यूनतम रखने, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से अतिरिक्त वाहनों के बिना कार्यक्रमों में आने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सरकारी बैठकों को बढ़ावा देने और सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने की अपील की.
इसके अलावा सरकारी कैंटीनों में पाम ऑयल के कम उपयोग और सरकारी-निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम संस्कृति को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है. आम लोगों से मेट्रो, बस, ऑटो और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अधिक इस्तेमाल का आग्रह किया गया. लेकिन बिहार कैबिनेट बैठक के दौरान मंत्रियों और अधिकारियों के भारी-भरकम काफिले ने सड़क पर ऐसा दृश्य पेश किया,
जिसे देखकर सादगी की अपील खुद सवालों में घिरती नजर आई. पटना की सड़कों पर जब वीआईपी गाड़ियों की लंबी कतारें दौड़ीं, तो आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि क्या ईंधन बचत सिर्फ आम जनता के लिए है? इसी बीच मंत्री जमा खान ने दावा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से लेते हुए अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम की है.
वहीं मंत्री संतोष सुमन के काफिले में कथित तौर पर खाली गाड़ी देखी गई, जिसने सियासी बहस को और हवा दे दी. राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जब देश का शीर्ष नेतृत्व ईंधन बचत और संसाधनों के संतुलित उपयोग की अपील कर रहा है, तो क्या राज्य स्तर पर इसे सिर्फ “औपचारिक संदेश” मान लिया गया है? या फिर सत्ता का रुतबा ही उस सादगी पर भारी पड़ जाता है जिसकी नसीहत जनता को दी जाती है?