कौन हैं 99 वर्षीय लोक कलाकार सिमांचल पात्रो और मूर्तिकार और कला निर्देशक नूरुद्दीन अहमद, पद्म सम्मान से सम्मानित?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 25, 2026 22:13 IST2026-01-25T22:12:14+5:302026-01-25T22:13:29+5:30

गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि कला के क्षेत्र में शरत कुमार पात्रा और सिमांचल पात्रो को पद्म श्री-2026 से सम्मानित किया जाएगा, जबकि चरण हेमब्रम और महेंद्र कुमार मिश्रा को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में यह प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार मिलेगा।

Padma Shri award 99-year-old folk artiste Simanchal Patro Family expresses happiness Yumnam Jatra Singh Renowned sculptor art director Nooruddin Ahmed  | कौन हैं 99 वर्षीय लोक कलाकार सिमांचल पात्रो और मूर्तिकार और कला निर्देशक नूरुद्दीन अहमद, पद्म सम्मान से सम्मानित?

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Highlightsभारत सरकार ने मुझे प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार के लिए नामांकित किया है।सम्मान हमारी उड़िया कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य लोगों को भी प्रेरित करेगा।मणिपुर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति समर्पित उनके जीवन को राष्ट्रीय मान्यता है।

भुवनेश्वरः ओडिशा के 99 वर्षीय अनुभवी लोक कलाकार सिमांचल पात्रो ने रविवार को कहा कि उन्हें खुशी है कि सरकार ने उनका चयन पद्मश्री पुरस्कार के लिए किया है। गृह मंत्रालय ने रविवार को घोषणा की कि पात्रो के साथ ओडिशा के तीन अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों प्रख्यात शिक्षाविद महेंद्र कुमार मिश्रा, ‘संथाली’ लेखक चरण हेमब्रम और ‘टाई एंड डाई’ कलाकार शरत कुमार पात्रा को वर्ष 2026 के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पात्रो ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि भारत सरकार ने मुझे प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार के लिए नामांकित किया है।

यह सम्मान हमारी उड़िया कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य लोगों को भी प्रेरित करेगा।’’ गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि कला के क्षेत्र में शरत कुमार पात्रा और सिमांचल पात्रो को पद्म श्री-2026 से सम्मानित किया जाएगा, जबकि चरण हेमब्रम और महेंद्र कुमार मिश्रा को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में यह प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार मिलेगा।

ओडिशा के गंजाम जिले के बामकेई गांव में 1927 में जन्मे लोक कलाकार सिमांचल पात्रो ने अपना जीवन ‘प्रह्लाद नाटक’ के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया है। ‘प्रह्लाद नाटक’ में उड़िया संगीत के लगभग 35 रागों पर आधारित 200 से अधिक गीतों के माध्यम से विष्णु के नरसिंह अवतार की कथा का वर्णन किया गया है।

मणिपुर : परिवार ने युमनाम जात्रा सिंह को पद्म श्री से सम्मानित किये जाने पर खुशी जताई

‘नट संकीर्तन’ के प्रख्यात कलाकार रहे युम्नाम जात्रा सिंह को मरणोपरांत पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा का उनके परिवार ने स्वागत किया है। परिवार ने कहा कि यह मणिपुर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति समर्पित उनके जीवन को राष्ट्रीय मान्यता है।

पद्म पुरस्कार से सम्मानित युम्नाम जात्रा सिंह के सबसे छोटे बेटे युम्नाम बिशम्बर सिंह ने केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान परिवार के लिए गर्व और खुशी का क्षण है। जात्रा सिंह को ‘गुमनाम नायकों’ की श्रेणी में रविवार को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई।

युम्नाम बिशम्बर सिंह ने कहा, ‘‘ यह हम सभी के लिए बेहद खुशी और उत्साह का क्षण है। दशकों तक किए गए उनके जुनून, समर्पण और कार्यों को आखिरकार राष्ट्रीय मान्यता मिली है। मैं इसके लिए केंद्र सरकार का बहुत आभारी हूं।’’ मणिपुर की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र मानी जाने वाली पारंपरिक वैष्णव कला शैली ‘नट संकीर्तन’ के एक प्रख्यात कलाकार जात्रा सिंह को मरणोपरांत कला के क्षेत्र में पद्म श्री से सम्मानित किये जाने की घोषणा की गई। बिशम्बर सिंह ने कहा कि वह अपने पिता की ओर से यह पुरस्कार ग्रहण करेंगे।

उन्होंने हालांकि कहा कि परिवार के किसी भी सदस्य ने ‘नट संकीर्तन’ को आगे नहीं बढ़ाया जिसने उनके पिता के जीवन को परिभाषित किया था। बिशम्बर सिंह ने कहा, ‘‘दुर्भाग्यवश, परिवार में किसी ने भी उस कला रूप को आगे नहीं बढ़ाया है जिसे मेरे पिता पसंद करते थे।’’ युम्नाम जात्रा सिंह का निधन अक्टूबर 2025 में 102 वर्ष की आयु में हो गया था।

जात्रा सिंह को सम्मानित किये जाने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि पद्म श्री से सम्मानित होना राज्य की सांस्कृतिक विरासत में जात्रा सिंह के अद्वितीय योगदान को मान्यता है। ‘नट संकीर्तन’ मणिपुर के मैतेई वैष्णव समुदाय का एक जीवंत, अनुष्ठानिक गायन, नृत्य और ढोल वादन प्रदर्शन है, जो भगवान कृष्ण के जीवन को समर्पित है। यह एक सांस्कृतिक विरासत है जिसमें भक्त ढोल (पुंग) और झांझ के साथ गाते-नाचते हैं।

प्रख्यात मूर्तिकार और कला निर्देशक नूरुद्दीन अहमद को पद्मश्री पुरस्कार मिला

असम के प्रख्यात मूर्तिकार और कला निर्देशक नूरुद्दीन अहमद ने रविवार को पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं की सूची में उनका नाम शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। अहमद असम के पांच पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं में शामिल हैं। राज्य से उनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ (मरणोपरांत), कृषि के लिए जोगेश देउरी और कला के लिए पोखिला लेकथेपी और हरिचरण सैकिया का नाम भी इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों की सूची में शामिल हैं। अहमद ने बताया, “कालियाबोर में असम नाट्य सम्मेलन से एक अन्य पुरस्कार प्राप्त करते समय मंच पर रहते हुए ही मुझे इस (पद्म) पुरस्कार की खबर मिली।”

उन्होंने कहा कि कला के क्षेत्र में उनके योगदान को केंद्र सरकार द्वारा मान्यता मिलने से वे 'अत्यंत प्रसन्न' हैं। अहमद ने कहा, “मैं पुरस्कारों के लिए काम नहीं करता लेकिन मुझे अपनी कला से प्यार है। हालांकि, इस सम्मान ने मेरे दिल को छू लिया है और मुझे और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा दी है।” उन्होंने कहा कि लोगों से मिले 'सम्मान और प्यार' एवं उनकी रचनाओं की सराहना ने उन्हें वर्षों से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है और यह पुरस्कार उन्हें “और अधिक परियोजनाओं पर काम करने के लिए प्रेरित करेगा।”

अहमद ने पुरस्कार के लिए मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, राज्य सरकार और केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया। अहमद राज्य में विभिन्न सांस्कृतिक परियोजनाओं के डिजाइन और क्रियान्वयन में अग्रणी रहे हैं, जिनमें गणतंत्र दिवस परेड में राजकीय झांकी, विभिन्न 'मोबाइल थिएटर' के लिए सेट निर्माण और फिल्मों के लिए मंच डिजाइनिंग शामिल है।

अहमद का जन्म असम के नलबाड़ी जिले के सथिकुची गांव में हुआ था और उन्होंने मुंबई के जे.जे. कॉलेज ऑफ आर्ट्स में थोड़े समय के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया था। बाद में उन्होंने गढ़ी स्थित ललित कला अकादमी के स्टूडियो में मूर्तिकला में आधुनिक तकनीक के अनुप्रयोग का अध्ययन किया। उन्होंने सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र से कठपुतली कला में डिप्लोमा भी प्राप्त किया और कठपुतली कला से अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन उनकी जिज्ञासा ने उन्हें न केवल 'मोबाइल थिएटर' तक पहुंचाया, बल्कि उन्होंने परिवेश डिजाइन के क्षेत्र में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई।

अहमद ने कठपुतली कला, नाटक, चित्रकला, मूर्तिकला, वेशभूषा और साजो-सामान पर कई कार्यशालाओं में भाग लिया है और उनका संचालन भी किया है। अहमद को रंगमंच कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 2017 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।

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