बिहार में कांग्रेस और राजद में टूट की आशंका पर हो रही है बलवती, ऑपरेशन लोटस की संभावना से दोनों दलों के अंदर मची खलबली

By एस पी सिन्हा | Updated: April 26, 2026 16:45 IST2026-04-26T16:45:39+5:302026-04-26T16:45:45+5:30

राज्यसभा चुनाव में राजद और कांग्रेस के विधायकों ने एनडीए का साथ दिया। वह भी उस बिरादरी के विधायक ने राजद को धोखा दिया, जिस पर राजद ज्यादा भरोसा करती है। अर्थात मुस्लिम विधायक से ही धोखा मिला।

'Operation Lotus' in Bihar Apprehensions of a split between the Congress and the RJD | बिहार में कांग्रेस और राजद में टूट की आशंका पर हो रही है बलवती, ऑपरेशन लोटस की संभावना से दोनों दलों के अंदर मची खलबली

बिहार में कांग्रेस और राजद में टूट की आशंका पर हो रही है बलवती, ऑपरेशन लोटस की संभावना से दोनों दलों के अंदर मची खलबली

पटना: बिहार में कांग्रेस और राजद में टूट की आशंका पर बलवती होती दिख रही है। कहा जाए तो ऑपरेशन लोटस की संभावना से दोनों दलों के अंदर खलबली की स्थिति है। यह आशंका इसलिए बलवती होती दिखती है क्योंकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ ऐसा हो चुका है। 7 सांसदों का टूट कर भाजपा में जाना सामान्य घटना नहीं है। अब तो पंजाब में आप के विधायकों के टूटने के भी दावे किए जा रहे हैं। जहां तक बिहार में राजद और कांग्रेस का सवाल है तो पहले ही उसे इसका संकेत मिल चुका है। राज्यसभा चुनाव में राजद और कांग्रेस के विधायकों ने एनडीए का साथ दिया। वह भी उस बिरादरी के विधायक ने राजद को धोखा दिया, जिस पर राजद ज्यादा भरोसा करती है। अर्थात मुस्लिम विधायक से ही धोखा मिला।

राजद विधायक तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी इतनी प्यारी है कि उसके जाने के भय से वे उस विधायक को शो कॉज नोटिस तक नहीं दे पाए। इसी भय से सम्राट चौधरी के विश्वासमत के दौरान पक्ष-विपक्ष के विधायकों की गिनती कराने की जरूरत भी उन्होंने नहीं समझी। वहीं, राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 3 विधायकों ने एनडीए का साथ दिया। तब से ही बिहार में कांग्रेस पर तलवार लटक रही है। 

शुक्रवार को चनपटिया के विधायक अभिषेक रंजन ने सम्राट चौधरी से उनके आवास पर मुलाकात की थी। शनिवार को कांग्रेस के ही एमएलसी समीर कुमार सिंह भी सम्राट से मिले। कांग्रेस के 6 विधायक हैं। 3 तो पहले ही बागी हो चुके हैं। चर्चा है कि कांग्रेस के सभी विधायक एनडीए के किसी न किसी घटक दल से सटना चाहते हैं। चूंकि सम्राट चौधरी अब मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उनकी ओर कांग्रेस विधायकों का मुखातिब होना स्वाभाविक है। ऐसे में यह कहा जाए तो बिहार कांग्रेस में "सब कुछ ठीक (ऑल इज नॉट वेल)" नहीं है। 

वहीं, कांग्रेस सांसद तारिक अनवर के संकेतों से साफ हो गया कि बिहार कांग्रेस दो खेमों में बंटी है। एक गुट अखिलेश प्रसाद सिंह के समर्थन में है, जबकि दूसरा राजेश राम के पक्ष में खड़ा दिखता है। सूत्रों के अनुसार, अखिलेश प्रसाद सिंह को कांग्रेस के साथ-साथ लालू प्रसाद यादव जैसे राजद के वरिष्ठ नेताओं का भी समर्थन प्राप्त है, जिसकी वजह से संगठन में उनका प्रभाव अधिक माना जाता है। लालू प्रसाद यादव सार्वजनिक मंच से यह कह चुके हैं कि उन्होंने ही सोनिया गांधी से कहकर अखिलेश प्रसाद सिंह को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनवाया था। कांग्रेस में आने से पहले अखिलेश प्रसाद सिंह राजद से जुड़े हुए थे। 

बता दें कि तारिक अनवर ने खुद स्वीकार किया है कि बिहार कांग्रेस में स्थितियां अच्छी नहीं हैं और पार्टी को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। तारिक अनवर ने संकेत दिया है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो चुनाव के बाद पार्टी में बड़ा बदलाव या "भूचाल" आ सकता है। तारिक अनवर के ताजा बयान ने इस बात को और बल दे दिया है कि प्रदेश संगठन के भीतर असंतोष और गुटबाजी गहराती जा रही है। ऐसे में तारिक अनवर के बयान के बाद बिहार कांग्रेस में बड़े राजनीतिक बदलाव और भूचाल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। 

सियासी गलियारों में चर्चा है कि अब बिहार कांग्रेस और राजद में टूट देखने को मिल सकती है। कांग्रेस विधान पार्षद समीर सिंह की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात को ऑपरेशन लोटस का हिस्सा बताया जा रहा है। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण में पैसे लेकर टिकट देने के कई आरोप लगे थे। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यालय में नेताओं ने धरना-प्रदर्शन भी किया था। अब प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम पर जिला स्तर की राजनीति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। 

जानकारों की मानें तो भाजपा ने राजद में विभाजन करा दिया तो राजद के कुल 25 विधायकों में 2/3 विधायक (15-16) टूट कर भाजपा में शामिल हो जाते हैं तो विधानसभा का परिदृश्य बदल जायेगा। भाजपा के अभी 88 विधायक हैं। ऐसे में राजद से 15 आ गए तो संख्या 103 पर पहुंच जाएगी। नितिन नवीन की खाली हुई सीट भी भाजपा निकाल लेती है तो संख्या 104 हो जाएगी। भाजपा की पहल पर ही जीतन राम मांझी की पार्टी हम, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) और चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) एनडीए का हिस्सा बनी हैं। यानी इनके 20 विधायक पर भाजपा का नैतिक हक बनता है। तब यह संख्या 104 से बढ़ कर 124 हो जाएगी। 

सरकार बनाने के लिए 122 का ही तो जादुई आंकड़ा है। हालांकि अपनी ताकत बढ़ाने के बावजूद भाजपा अपने प्रमुख सहयोगी नीतीश कुमार को नाराज करने से बचेगी। जदयू का साथ छोड़ने की भूल शायद ही करे। कारण कि केंद्र में सरकार बनाए रखने के लिए जदयू के 12 सांसदों के समर्थन की भाजपा को सख्त जरूरत है। वैसे भी नीतीश कुमार एनडीए के सबसे पुराने साथी हैं। इसलिए उनकी उपेक्षा करने से भाजपा बिल्कुल बचेगी। भाजपा सरकार में जदयू को उसी तरह तरजीह देती रहेगी, जैसा अब तक दिया है।

Web Title: 'Operation Lotus' in Bihar Apprehensions of a split between the Congress and the RJD

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