नई दिल्लीः ऐसा माना जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए बुधवार को मसौदा विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने और उनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है तथा इसे 2029 के आम चुनाव में लागू किया जायेगा। घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से जाना जाता है, में संशोधन के लिए मसौदा विधेयक को मंजूरी दी गई।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने महिला आरक्षण पर कहा, "मैं उन्हें(ममता बनर्जी) चुनौती देता हूं, वे महिलाओं की रहनुमा बनती हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम आ रहा है। बंगाल की महिलाओं को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल रहा है, निश्चित तौर पर उन्हें(ममता बनर्जी) इसका समर्थन करना चाहिए लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे राजनीति से ऊपर उठ पाएंगी।"
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने महिला आरक्षण पर कहा, "16,17 और 18 तारीख को मोदी सरकार के माध्यम से लोकसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। उसमें महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होने की संभावना है... ये कानून 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव में अमल होगा। उस समय होने वाले विधानसभा चुनावों में भी ये कानून लागू होगा। महिलाओं को सामाजिक न्याय दिलाने की जिम्मेदारी मोदी सरकार ने ली है और महिलाओं को इससे न्याय मिलेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।"
भाजपा राजस्थान महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठोड़ ने 33% महिला आरक्षण पर कहा कि 10 अप्रैल से हम कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे, जो 20 अप्रैल तक चलेगा। जिस तरह का उपहार महिलाओं को मिल रहा है, हमें लगता है कि ये जश्न काफी लंबे समय तक चलेगा, हम लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनना चाहते हैं, हम जश्न मनाना चाहते हैं।
जिस तरह से महिलाओं की भागीदारी लाभार्थी वर्ग से निकलकर एक नेतृत्व कर्ता के रूप में पीएम मोदी ने सुनिश्चित की है, उसका भी हम जश्न मनाएंगे... हम प्रधानमंत्री को बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं। 33% महिला आरक्षण पर दिल्ली हज कमेटी की चेयरपर्सन कौसर जहां ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा 16-18 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया गया है। महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण देने का निर्णय केवल एक विधेयक या बिल नहीं है।
ये आधी आबादी को उनका अधिकार या सम्मान दिलवाने की दिशा में बहुत क्रांतिकारी कदम है। लंबे समय से आधी आबादी के नाम पर केवल राजनीतिक बयान बाजी होती है लेकिन पहली बार किसी सरकार ने इतनी दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए महिलाओं को वास्तविक भागीदारी देने का साहसी निर्णय लिया है।