महाराष्ट्र: बोइंग 777 की मरम्मत की मजदूरी ₹85 प्रति घंटे, आमरण अनशन पर बैठे एआईईएसएल एमआरओ के इंजीनियर और तकनीशियन
By वसीम क़ुरैशी | Updated: May 16, 2026 20:32 IST2026-05-16T20:32:24+5:302026-05-16T20:32:31+5:30
आंदोलनकारी कर्मचारियों के मुताबिक उन्हें वाइट बॉडी जंबो जेट बोईंग 777 जैसे बड़े विमान की मरम्मत की एवज में प्रति घंटा ₹85 दिए जा रहे हैं जबकि श्रम कानून के मुताबिक 224 रुपए प्रति घंटे मिलनी चाहिए

महाराष्ट्र: बोइंग 777 की मरम्मत की मजदूरी ₹85 प्रति घंटे, आमरण अनशन पर बैठे एआईईएसएल एमआरओ के इंजीनियर और तकनीशियन
नागपुर: मिहान-सेज में सबसे पहले बने एमआरओ में इन दिनों भूचाल मचा हुआ है. इस संस्थान के करीब 200 इंजीनियर और टेक्नीशियन वेतन और पदोन्नति की मांग को लेकर बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलनकारी कर्मचारियों के मुताबिक उन्हें वाइट बॉडी जंबो जेट बोईंग 777 जैसे बड़े विमान की मरम्मत की एवज में प्रति घंटा ₹85 दिए जा रहे हैं जबकि श्रम कानून के मुताबिक 224 रुपए प्रति घंटे मिलनी चाहिए, वह कुशल कर्मचारी हैं वही अप्रेंटिस को 190 रुपए प्रतिमा मिल रहा है हालांकि अप्रेंटिस की संख्या 30 के आसपास ही है जबकि आंदोलन कर रहे कर्मचारियों की संख्या करीब 200 है.
इतनी बड़ी संख्या में इंजीनियर और टेक्नीशियन के बाहर होने के चलते एमआरओ का काम ठप पड़ गया है. बीते 20 दिन में यहां दो बोइंग 777 विमान मरम्मत व रखरखाव के लिए आए हैं समय पर इनका काम पूरा करना एक बड़ी चुनौती है लेकिन कुशल हाथों के बाहर रहने पर इन विमानों का रखरखाव पर सवाल बना हुआ है.
नाराज कर्मचारियों का कहना है की वह यहां की नौकरी छोड़ना चाहते हैं लेकिन ऐसी शर्ते तय कर दी गई हैं जो हमें मुश्किल में डाले हुए हैं. दूसरी जगह जाने का अवसर ही नहीं दिया जा रहा है. कहा जाता है की नौकरी छोड़ने के लिए 3 महीने पहले नोटिस देना होगा, रिलीविंग आर्डर के लिए सीईओ और सी एचआरओ से एनओसी हासिल करनी होगी.
कई लोगों ने एनओसी के लिए आवेदन किया लेकिन उनके मुताबिक अब तक निक ही नहीं दी गई, अनुभव प्रमाण पत्र भी नहीं दिया जा रहा है. दिक्कत में डालने वाली एक शर्त यह भी है कि यहां से नौकरी छोड़कर जाने वाला कर्मचारी 2 साल तक एविएशन के संबंधित सेक्टर में काम नहीं कर सकता.
रोषित आंदोलनकारियों का कहना है कि हमें जैसे 'बंधुआ मजदूर' बनाकर रख दिया गया है. यह दमन चरम पर पहुंच जाने के कारण ही हमें आंदोलन का सहारा लेना पड़ा. कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें डीए भी नहीं मिल रहा है.
ऐसे होती है नियुक्ति
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ए आईईएसएल में इंजीनियरों और टेक्निशियनों की भर्ती फिक्स टर्म अपॉइंटमेंट (एफटीई) रूल के तहत होती है. इन्हें 50 साल के करियर प्रोग्रेस के लिए रखा जाता है लेकिन हर 5 साल में कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू किया जाता है यह भर्ती स्थाई नियुक्ति की तरह ही होती है.
2019 से जारी है मांग
आंदोलन कार्यों के मुताबिक नियमानुसार वेतन व पदोन्नति देने के लिए वे 2019 से मांग कर रहे हैं. पिछले आंदोलन के बाद आश्वासन दिया गया था. इस वजह से आंदोलन स्थगित किया गया लेकिन अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ.
चुप्पी साधे हुए हैं अधिकारी
कर्मचारियों के इन मुद्दों को लेकर लॉस प्रतिनिधि ने एआईईएसएल के सीईओ शरद अग्रवाल और नागपुर एमआरओ के महाप्रबंधक मनीष शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की मैसेज भी भेजें लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया.
महत्वपूर्ण तथ्य
-देशभर में एआईईएसएल के 180 कर्मचारियों द्वारा नौकरी छोड़ने के लिए आवेदन करने के बाद उन्हें बर्खास्त किया गया. इन 180 कर्मचारियों के समर्थन में भी ये आंदोलन किया जा रहा है.
-शनिवार को नागपुर एमआरओ के भी एक कर्मचारी को बर्खास्त किया गया.
-एमआरओ के बाहर प्रदर्शनकारियों में शामिल महिला कर्मचारियों को कंपनी का टॉयलेट तक उपयोग करने नहीं दिया गया.
-इंजीनियर व तकनीशियनों का ये आरोप भी है कि उनका मानसिक शोषण भी किया जा रहा है.