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महाराष्ट्र: आशीष शेलार ने कहा- 10 दिनों में न्यूनतम साझा कार्यक्रम का फैसला नहीं ले सके वे 10 मिनट में MLA परेड कैसे करा सकते हैं?

By रोहित कुमार पोरवाल | Updated: November 24, 2019 11:43 IST

महाराष्ट्र के नाटकीय घटनाक्रम को लेकर जहां विपक्ष एकजुट होकर बीजेपी नीत सरकार को गिराने के प्रयासों में लगा है वहीं, बीजेपी नेता आशीष शेलार ने कांग्रेस-शिवसेना और एनसीपी के गठजोड़ को लेकर निशाना साधा है।

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ठळक मुद्देआशीष शेलार ने मीडिया से कहा, ''वे कहते हैं कि रात के अंधेरे में शपथ ग्रहण हुआ। हम वे लोग हैं जो सुबह तड़के शाखा जाते हैं और आस्था के अनुसार वह राम प्रहर होता है। जिन्होंने राम को भुला दिया वे राम प्रहर का महत्व क्या जानेंगे?''उन्होंने कहा, ''राज्यपाल ने शिवसेना से उनकी सरकार बनाने की इच्छा और सक्षमता के बारे में पूछा था। सरकार बनाने के लिए रुचि दिखाना और सरकार बनाने के लिए समय देना दोनों अलग बातें हैं। शिवसेना इन दोनों भ्रामक कर रही है।''

महाराष्ट्र के नाटकीय घटनाक्रम को लेकर जहां विपक्ष एकजुट होकर बीजेपी नीत सरकार को गिराने के प्रयासों में लगा है वहीं, बीजेपी नेता आशीष शेलार ने कांग्रेस-शिवसेना और एनसीपी के गठजोड़ को लेकर निशाना साधा है। आशीष शेलार ने मीडिया से कहा, ''वे कहते हैं कि रात के अंधेरे में शपथ ग्रहण हुआ। हम वे लोग हैं जो सुबह तड़के शाखा जाते हैं और आस्था के अनुसार वह राम प्रहर होता है। जिन्होंने राम को भुला दिया वे राम प्रहर का महत्व क्या जानेंगे?'' 

बता दें कि यहां आशीष शेलार का 'शाखा' से मतलब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा से है। 

उन्होंने आगे कहा, ''राज्यपाल ने शिवसेना से उनकी सरकार बनाने की इच्छा और सक्षमता के बारे में पूछा था। सरकार बनाने के लिए रुचि दिखाना और सरकार बनाने के लिए समय देना दोनों अलग बातें हैं। शिवसेना इन दोनों भ्रामक कर रही है।''

आशीष शेलार ने यह भी कहा, ''जो लोग पिछले 10 दिनों में अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम के बारे में फैसला नहीं ले सके वे राज्यपाल के सामने 10 मिनट में विधायकों की परेड कैसे करा सकते हैं?''

बता दें कि महाराष्ट्र में विपक्ष की नाराजगी राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को लेकर भी है। एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस ने साझा तौर पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस को सरकार बनाने के आमंत्रण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। तीनों पार्टियों की यह भी मांग है कि अदालत जल्द से जल्द शक्ति परीक्षण कराने का फैसला सुनाए।

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