lok sabha elections: hazaribagh parliamentary constituency bjp congress fight jayant sinha | लोकसभा चुनावः हजारीबाग में कौन मारेगा बाजी, भाजपा-कांग्रेस में कड़ी टक्कर
लोकसभा चुनावः हजारीबाग में कौन मारेगा बाजी, भाजपा-कांग्रेस में कड़ी टक्कर

हजारीबाग का अर्थ होता है हजार बागों वाला और यह दो शब्दों हजार और बाग से मिलकर बना है। खूबसूरत पर्यटक स्थलों से भरा हजारीबाग झारखंड में स्थित है। यह क्षेत्र वर्ष 2000 से पहले बिहार का एक हिस्सा हुआ करता था। देशभर में लोकसभा चुनाव जोरों पर हैं। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर केंद्र और विपक्ष दोनों ही अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। 

एक ओर जहां सत्ता पर काबिज भाजपा 2014 की शानदार जीत को दोहराना चाहती है। हजारीबाग से फिलहाल भाजपा से जयंत सिन्हा सांसद और केंद्र में मंत्री भी हैं।

देखने वाली बात होगी कि हजारीबाग में कौन सी पार्टी बाजी मार ले जाता है। जीत की राह किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगी और सभी राजनीतिक पार्टी पहले ही इस कोशिश में लग चुकी है। हजारीबाग संसदीय क्षेत्र झारखंड के 14 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। इस संसदीय क्षेत्र को देश के लिए 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनावों के दौरान गठित नहीं किया गया। 1957 में यह संसदीय क्षेत्र पहली बार अस्तित्व में आया। इस लोकसभा सीट में दो जिलों रामगढ़ और हजारीबाग के कुछ इलाकों को शामिल किया गया है।

जयंत बनाम साहू बनाम मेहता

हजारीबाग से भाजपा ने केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। भाकपा ने पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता को उतारा है। कांग्रेस ने गोपाल साहू को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर पांचवें चरण में मतदान होगा। इस सीट के लिए 6 मई को मतदान होना है।

दो जिलों के मतदाता देंगे वोट

हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधि चुनने के लिए दो जिलों के मतदाता वोट देंगे। इस लोकसभा क्षेत्र के तहत पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें से हजारीबाग, बरही और बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के तहत आते हैं। रामगढ़ और मांडू रामगढ़ जिले में है। 2014 के आम चुनाव के दौरान इस सीट पर मतदाताओं की संख्या करीब 15.18 लाख थी। इसमें 8.12 लाख पुरुष और 7.06 लाख महिला मतदाता शामिल हैं।

पिछड़े, अल्पसंख्यकों का है सहारा

हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र में पिछड़े और अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। लिहाजा सभी दल चुनाव के दौरान इन्हें साधने की कोशिश करते हैं। इसके बाद सवर्ण मतदाताओं का नंबर आता है। आदिवासी मतदाताओं की तादाद यहां कम है।

हजारीबाग पर रहा भाजपा का कब्जा

1957 में निर्दलीय प्रत्याशी ललिता राज लक्ष्मी जीतने में कामयाब हुईं। 1962 और 67 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी बसंत नारायण सिंह जीते। 1968 के उपचुनाव में कांग्रेस के मोहन सिंह ओबरॉय जीते। 1971 में कांग्रेस के दामोदर पांडेय जीतने में कामयाब हुए। 1977 और 1980 के चुनाव में जनता पार्टी के बसंत नारायण सिंह लगातार दो बार जीते।

1984 में कांग्रेस के दामोदर पांडेय फिर जीते। 1989 में बीजेपी के यदुनाथ पांडेय जीतने में कामयाब हुए। 1991 में कम्यूनिस्ट पार्टी के भुवनेश्वर प्रसाद मेहता जीते। 1996 में बीजेपी के महाबीर लाल विश्वकर्मा जीते। 1998 व 1999 का चुनाव बीजेपी के यशवंत सिन्हा जीते। 2004 में कम्यूनिस्ट पार्टी के भुवनेश्वर प्रसाद मेहता जीते। 2009 में यशवंत सिन्हा जीते। 2014 में बीजेपी के टिकट पर यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा जीते।


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