कर्नाटक कांग्रेस संकटः अब्दुल जब्बार के बाद सीएम सिद्धारमैया के राजनीतिक सचिव नजीर अहमद का इस्तीफा, दिल्ली में डीके शिवकुमार और 20 विधायक?
By सतीश कुमार सिंह | Updated: April 14, 2026 11:44 IST2026-04-14T11:33:32+5:302026-04-14T11:44:45+5:30
Karnataka Congress crisis:केपीसीसी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अब्दुल जब्बार पार्टी उम्मीदवार समर्थ शमनूर को हराने की साजिश रचने के आरोप में पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।

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बेंगलुरु: कर्नाटककांग्रेस में संकट जारी है। 20 विधायक कई दिन से दिल्ली में डारे हुए हैं और उममुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी दिल्ली पहुंच गए हैं। इस बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के राजनीतिक सचिव पद से एमएलसी नजीर अहमद के बहुप्रतीक्षित इस्तीफे से सिद्धारमैया के खेमे को बड़ा झटका लगा है। खबरों के मुताबिक, पार्टी हाई कमांड ने सिद्धारमैया को नजीर का इस्तीफा स्वीकार करने को कहा है। क्योंकि ऐसी खबरें हैं कि 9 अप्रैल को हुए दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के दौरान नसीर कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे।
रविवार को सिद्धारमैया ने चिक्कमगलुरु में भाषण देकर पुष्टि की कि नजीर अपने पद से इस्तीफा देंगे। सोमवार को नजीर ने आवास मंत्री जमीर अहमद खान समेत अपने शुभचिंतकों के साथ इस्तीफे पर विचार-विमर्श किया। केपीसीसी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अब्दुल जब्बार पार्टी उम्मीदवार समर्थ शमनूर को हराने की साजिश रचने के आरोप में पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।
विधानसभा के मुख्य सचेतक सलीम अहमद और शिवाजीनगर विधायक रिजवान अरशद के अनुसार, नसीर और ज़मीर ने सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के निर्देशों का उल्लंघन किया था, जिसमें कांग्रेस के बागी उम्मीदवार सादिक पहलवान को नामांकन पत्र वापस लेने के लिए कहा गया था।
आरोप है कि उन्होंने सादिक को नामांकन पत्र वापस न लेने की सलाह दी थी, जिसके बाद भी वह चुनाव में बने रहे। सलीम और रिजवान ने सादिक को चुनाव से हटने के लिए मना लिया, और मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उन्होंने आखिरकार ऐसा ही किया।
सूत्रों के अनुसार, सादिक ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव अभिषेक दत्त को बताया था कि ज़मीर ने उन्हें चुनाव में बने रहने की सलाह दी थी। ज़मीर के विरोधी इस बात को उछाल रहे हैं ताकि मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान उच्च कमान उन्हें कैबिनेट से हटा दे। वे इस बात से भी ईर्ष्या करते हैं कि वह अल्पसंख्यक कोटे से उपमुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं।
ज़मीर, नसीर और जब्बार सिद्धारमैया खेमे से हैं, और यह असहमति मुख्यमंत्री के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। पहले सहकारिता मंत्री के.एन. राजन्ना को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाजपा विरोधी 'वोट चोरी' अभियान की कथित तौर पर आलोचना करने के आरोप में इस्तीफा देना पड़ा था।
कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पार्टी अनुशासन के उल्लंघन के मामले में सिद्धारमैया भी बेबस हो जाते हैं, क्योंकि वे अपने समर्थकों का बचाव नहीं कर सकते। उन्होंने टिप्पणी की, “उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया है, क्योंकि उनका पूरा ध्यान कैबिनेट फेरबदल के लिए उच्च कमान की मंजूरी प्राप्त करने पर है।”