मुझे नहीं लगता कि मैं भारत में रहकर नोबेल पुरस्कार जीत सकता था: अर्थशास्त्री बनर्जी, जानें और क्या कहा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Published: January 27, 2020 10:04 AM2020-01-27T10:04:47+5:302020-01-27T10:04:47+5:30

उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता है कि मैं भारत में रहकर इस पुरस्कार को जीत पाता। उन्होंने इसके बाद कहा कि ऐसा नहीं है कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन उसके लिए जो व्यवस्था चाहिए देश में उसकी कमी है।

I don't think I could have won the Nobel Prize in India: economist Banerjee, know what else | मुझे नहीं लगता कि मैं भारत में रहकर नोबेल पुरस्कार जीत सकता था: अर्थशास्त्री बनर्जी, जानें और क्या कहा

मुझे नहीं लगता कि मैं भारत में रहकर नोबेल पुरस्कार जीत सकता था: अर्थशास्त्री बनर्जी, जानें और क्या कहा

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Highlightsबनर्जी ने यह भी कहा कि जिन कामों के लिए उन्हें श्रेय मिलते हैं उनमें ज्यादातर काम दूसरों के द्वारा किए गए हैं।एक राजनीतिक सवाल के जवाब में बनर्जी कहते हैं कि विपक्ष किसी देश के लोकतंत्र की आत्मा है।

अर्थशास्त्री व नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी से जब यह पूछा गया कि क्या आप भारत में रहकर नोबेल पुरस्कार जीत पाते? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता है कि मैं भारत में रहकर इस पुरस्कार को जीत पाता। उन्होंने इसके बाद कहा कि ऐसा नहीं है कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन उसके लिए जो व्यवस्था चाहिए देश में उसकी कमी है।  बनर्जी ने यह भी कहा कि जिन कामों के लिए उन्हें श्रेय मिलते हैं उनमें ज्यादातर काम दूसरों के द्वारा किए गए हैं।

एक राजनीतिक सवाल के जवाब में बनर्जी कहते हैं कि विपक्ष किसी देश के लोकतंत्र की आत्मा है। इसलिए भारत की मजबूती के लिए एक अच्छे विपक्ष की जरूरत है। इसके साथ ही एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चीन की तरह कर्ज समाप्त करने के लिए भारत पैसे नहीं लगा सकता है क्योंकि भारत के पास इतने सारे पैसे नहीं हैं। 

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने रविवार को कहा कि देश में बैंकिंग क्षेत्र दबाव में है और सरकार प्रोत्साहन पैकेज देकर इसे संकट से बाहर निकालने की स्थिति में नहीं है। जयपुर साहित्य महोत्सव के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में बनर्जी ने कहा कि वाहन क्षेत्र में मांग में नरमी से भी पता चलता है कि लोगों में अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसे की कमी है। ]

उन्होंने कहा, ‘‘वित्तीय क्षेत्र फिलहाल सबसे बड़ा दबाव वाला केंद्र है। बैंक क्षेत्र दबाव में है और यह चिंता वाली बात है। वास्तव में सरकार प्रोत्साहन पैकेज देकर इसे संकट से उबार पाने की स्थिति में नहीं है...।’’ बनर्जी ने कहा, ‘‘हम यह भी जानते हैं कि अर्थव्यवस्था में मांग में कमी के कारण कार और दोपहिया वाहनों की बिक्री नहीं हो रही। यह सब संकेत है कि लोगों को अर्थव्यवस्था में तीव्र वृद्धि होने के अनुमान पर भरोसा नहीं है। इसीलिए वे खर्च नहीं कर रहे हैं।’’

‘गुड इकोनॉमिक्स फॉर हार्ड टाइम’ के लेखक ने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था में नरमी का देश में गरीबी उन्मूलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा क्योंकि शहरी और गरीबी क्षेत्र आपस में जुड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘‘गरीबी उन्मूलन इस आधार पर होता है कि शहरी क्षेत्र कम कौशल वाला रोजगार सृजित करता है और गांवों के लोगों को शहरी क्षेत्र में ऐसे रोजगार मिलते हैं, जिससे पैसा वापस गांव में आता है।’’

भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘इस प्रकार से शहरी क्षेत्र से वृद्धि ग्रामीण क्षेत्र में जाती है, और जैसे ही शहरी क्षेत्र में नरमी आती है, गांवों पर असर पड़ता है। गांवों के लोगों को निर्माण क्षेत्र में रोजगार नहीं मिलता और इसका असर ग्रामीण क्षेत्र पर पड़ता है।’’

English summary :
I don't think I could have won the Nobel Prize in India: economist Banerjee, know what else


Web Title: I don't think I could have won the Nobel Prize in India: economist Banerjee, know what else

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