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सवर्ण आरक्षण बिल: राज्यसभा में चर्चा जारी, कपिल सिब्बल ने पूछा, सरकार को बिल लाने की क्या जल्दी थी?

By जनार्दन पाण्डेय | Updated: January 9, 2019 20:54 IST

राज्यसभा में भाजपा के पास सबसे अधिक 73 सदस्य हैं, जबकि मुख्य विपक्षी कांग्रेस के 50 सदस्य हैं। राज्यसभा में अभी सदस्यों की कुल संख्या 244 है।

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ठळक मुद्देमंगलवार को लोकसभा में पेश किए गए आरक्षण विधेयक का लगभग सभी पार्टियों ने समर्थन किया कांग्रेस इस विधेयक का समर्थन कर रही है, जबकि विपक्षी पार्टियां इसे पारित करने में बाधा उत्पन्न कर रही हैं

सवर्णों को सरकारी नौकरियों एवं शिक्षा संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण देने का बिल राज्यसभा में बुधवार को पेश हो गया।  बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता काबिल सिब्बल ने सरकार से पूछा कि आपके पास 5 साल थे लेकिन आपने बिल लाने में इतनी जल्दबाजी क्यों की? क्या आपने आंकड़े जुटाये हैं कि देश में कितने लोगों के पास 5 एकड़ से कम जमीन है? उन्होंने नौकरियों की कम होती संख्या पर भी आपत्ति जताई है। 

बिल को लेकर अधिकांश पार्टियों ने अपनी सहमती दी है, लेकिन एक सवाल जो सभी नेताओं में कॉमन दिख रहा था, वो बिल की टाइमिंग को लेकर।वामपंथी नेता डी. राजा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नौकरियां हैं नहीं और सरकार सवर्ण आरक्षण का तमाशा कर रही है। कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आपकी पार्टी और आपके हेडक्वार्टर नागपुर ने हमेशा से ही आरक्षण को खत्म करने की कोशिश की है।

इस बिल पर जारी चर्चा में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी सरकारों को सवर्णों को आरक्षण देने से किसने रोका था। रविशंकर प्रसाद ने साथ ही इस बात से इनकार किया कि मोदी सरकार इस आरक्षण के बिल को पारित कराने के लिए संविधान से छेड़छाड़ कर रही है। 

इससे पहले केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने बुधवार को यह बिल राज्यसभा में पेश किया। लेकिन विपक्ष हंगामे के चलते राज्यसभा दोपहर 2 बजे तक स्‍थगित कर दी गई था। 

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए विधेयक के समय पर राज्यसभा में विपक्षी पार्टियां बुधवार को सवाल उठा रही हैं। विपक्ष का कहना है कि ऐसे बिल पहले संसदीय समितियों के पास जाते हैं।

सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि विपक्षी पार्टियों ने अपने सभी सदस्यों से बुधवार को राज्यसभा में मौजूद रहने के लिए कहा है।

मंगलवार को लोकसभा में पेश किए गए आरक्षण विधेयक का लगभग सभी पार्टियों ने समर्थन किया, लेकिन राज्यसभा में विपक्षी पार्टियां इस पर कड़ा रुख अपना रही हैं।

राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है। राज्यसभा में भाजपा के पास सबसे अधिक 73 सदस्य हैं, जबकि मुख्य विपक्षी कांग्रेस के 50 सदस्य हैं। राज्यसभा में अभी सदस्यों की कुल संख्या 244 है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि विपक्षी पार्टियों के नेता राज्यसभा की कार्यवाही एक दिन के लिए बढ़ाने के सरकार के ‘‘एकतरफा’’ कदम का भी विरोध कर रहे हैं और वे सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस इस विधेयक का समर्थन कर रही है, जबकि विपक्षी पार्टियां इसे पारित करने में बाधा उत्पन्न कर रही हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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