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केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा, टीकाकरण के बाद 89 लोगों की मौत, लेकिन टीका जिम्मेदार नहीं

By हरीश गुप्ता | Updated: March 24, 2021 13:15 IST

स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने बताया कि टीके के प्रतिकूल प्रभाव (एईएफआई) की निगरानी एक सुव्यवस्थित और मजबूत निगरानी प्रणाली के जरिए की जाती है.

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ठळक मुद्देटीकाकरण स्थलों पर जरूरी किट की उपलब्घता, तुरंत रेफरल और 30 मिनट की देखरेख शामिल हैं.मामलों में पीड़ित का मुफ्त इलाज होगा.केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि जांच-निगरानी-उपचार प्रोटोकॉल को कड़ाई से लागू करना पड़ेगा.

नई दिल्लीः सरकार ने देश को एक बार पुन: आश्वस्त किया है कि कोरोना वैक्सीन की वजह से देश में किसी की मौत नहीं हुई है.

सरकार ने राज्यसभा में कहा कि 16 मार्च तक कोविड टीकाकरण किए जाने के बाद 89 लोगों की मौत हो गई लेकिन अभी तक वर्तमान साक्ष्य के अनुसार इस टीके को किसी भी मृत्यु के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है. स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने बताया कि टीके के प्रतिकूल प्रभाव (एईएफआई) की निगरानी एक सुव्यवस्थित और मजबूत निगरानी प्रणाली के जरिए की जाती है.

चौबे ने तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन के एक सवाल के जवाब में कहा कि एईएफआई की व्यवस्था के लिए उचित उपाय किए गए हैं. इनमें टीकाकरण स्थलों पर जरूरी किट की उपलब्घता, तुरंत रेफरल और टीकाकरण स्थल पर लाभार्थी की 30 मिनट की देखरेख और किसी भी तरह की प्रतिकूलता की स्थिति में तत्काल सुधारात्मक उपाय शामिल हैं. इस तरह के मामलों में पीड़ित का मुफ्त इलाज होगा.

नई लहर को रोकने कड़ाई से लागू करें  

देश के कुछ हिस्से में कोविड-19 की नई लहर के बीच केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि जांच-निगरानी-उपचार प्रोटोकॉल को कड़ाई से लागू करना पड़ेगा. आरटी-पीसीआर जांच तथा सभी प्राथमिकता समूहों के टीकाकरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए.

गृह मंत्रालय ने अप्रैल के लिए नया दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि कोविड-19 के मामलों में फिर से तेजी के मद्देनजर नए संक्रमित मरीजों को जल्द से जल्द पृथक करने और समय पर उपचार करने की जरूरत है. हर किसी द्वारा कोविड-19 के मानक प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए और सभी लक्षित समूहों को 'कवर' करने के लिए टीकाकरण बढ़ाना चाहिए.

गृह मंत्रालय के महत्वपूर्ण निर्देश

संक्रमित और उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के आधार पर निरुद्ध क्षेत्रों का सावधानीपूर्वक चिह्नांकन करना चाहिए.

जहां आरटी-पीसीआर की जांच दर कम है, वहां कुल जांच का 70 फीसदी तक पहुंचने के लिए तेजी से जांच दर बढ़ानी चाहिए.

टीकाकरण की प्रक्रिया विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समरूप नहीं है.

कुछ राज्यों में धीमी गति चिंता का कारण. 

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