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विदेशों में फंसे भारतीय, गृह मंत्रालय ने कहा- विमान, नौसेना के जहाज से वापस लाया जाएगा, सात मई से प्रक्रिया शुरू

By भाषा | Updated: May 4, 2020 19:17 IST

पंजाब CM कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पंजाब में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने के लिए 5 मई से शुरू होकर अगले 10-15 दिनों के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था करने की मांग की है।

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ठळक मुद्देमंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि विदेशों में फंसे भारतीय लोगों को चरणबद्ध तरीके से वापस लाने के लिए सात मई से प्रक्रिया शुरू होगी।विदेश में फंसे भारतीय लोगों को वापसी की सुविधा भुगतान के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी।

नई दिल्लीः दुनिया भर में कोरोना का कहर जारी है। इस बीच विदेश में फंसे भारतीयों को लाने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है। गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार विदेशों में फंसे भारतीय लोगों की वापसी के लिए प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से कदम उठाएगी।

मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि विदेशों में फंसे भारतीय लोगों को चरणबद्ध तरीके से वापस लाने के लिए सात मई से प्रक्रिया शुरू होगी। विदेशों में फंसे भारतीय लोगों को विमान, नौसेना के जहाज से वापस लाया जाएगा।

ऐसे भारतीय लोग जिनमें संक्रमण के लक्षण नहीं होंगे, केवल उन्हें ही लौटने की मंजूरी होगी। उन्हें भुगतान के आधार अस्पताल या संस्थागत पृथक-वास में रखा जाएगा। विदेश में फंसे भारतीय लोगों को वापसी की सुविधा भुगतान के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी।

विदेश में फंसे भारतीयों को स्वदेश वापस आने में केंद्र सरकार उनकी सहायता करेगी और यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से सात मई से शुरू होगी। गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि केवल उन लोगों को वापस आने की अनुमति दी जाएगी जिनमें कोविड-19 के लक्षण नहीं हैं। वक्तव्य में कहा गया कि विमान और पोत द्वारा यात्रा का प्रबंध किया जाएगा और इसका खर्च यात्रियों को वहन करना होगा। मंत्रालय ने कहा कि भारत आने के बाद सभी यात्रियों की चिकित्सा जांच की जाएगी और इसके बाद उन्हें 14 दिन के लिए पृथक-वास में रखा जाएगा।

मंत्रालय ने कहा, “विदेश में फंसे भारतीयों को वापस आने में भारत सरकार उनकी सहायता करेगी। बहुत आवश्यक होने पर ही उन्हें स्वदेश आने की अनुमति दी जाएगी और यह चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।” मंत्रालय के अनुसार सरकार ने इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है और भारतीय दूतावास और उच्चायोग फंसे हुए नागरिकों की सूची बना रहे हैं। मंत्रालय ने कहा, “यात्रियों को यात्रा का खर्च वहन करना होगा। वाणिज्यिक उड़ान द्वारा उन्हें लाया जाएगा।”

मंत्रालय ने कहा कि विमान में सवार होने से पहले यात्रियों की चिकित्सा जांच की जाएगी और केवल उन्हें यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी जिनमें कोविड-19 के लक्षण नहीं होंगे। यात्रा के दौरान उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय द्वारा जारी नियमों का पालन करना होगा।

गृह मंत्रालय ने कहा, “गंतव्य पर पहुंचने के बाद सभी को आरोग्य सेतु एप्प पर पंजीकरण करवाना होगा।” वक्तव्य में कहा गया, “सभी की चिकित्सा जांच की जाएगी। जांच के बाद उन्हें 14 दिन के लिए राज्य सरकार द्वारा पृथक-वास में रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें अपना खर्च वहन करना होगा।” चौदह दिन बाद कोविड-19 की जांच की जाएगी और स्वास्थ्य नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। विदेश मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय द्वारा इस संबंध में जल्दी ही वेबसाइट पर जानकारी साझा की जाएगी।

अंतरराज्यीय माल ढुलाई में कोई समस्या नहीं हो :गृह मंत्रालय ने राज्यों से कहा

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों से एक बार फिर कहा है कि राज्यों के बीच माल ढुलाई में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। उसने ट्रक संचालकों से किसी भी तरह की समस्या आने पर नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने को कहा है।

गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने संवाददाताओं से यह भी कहा कि पुलिस अधिकारियों के कोविड-19 से संक्रमित होने के बढ़ते मामलों को देखते हुए मंत्रालय ने पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो तथा स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ परामर्श करके ड्यूटी करने के दौरान पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिहाज से दिशा-निर्देश जारी किये हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को परामर्श जारी करके उनका ध्यान कार्यस्थल पर सुरक्षा के संबंध में स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और मानक परिचालन प्रक्रियाओं की ओर आकृष्ट किया है।

श्रीवास्तव ने कहा कि मंत्रालय ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अंतरराज्यीय माल ढुलाई में कोई समस्या नहीं आनी चाहिए। ट्रक संचालकों के लिए नियंत्रण कक्ष का नंबर ‘1930’ जारी करते हुए उन्होंने कहा कि वे आवाजाही के दौरान किसी तरह की दिक्कत होने पर इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

श्रीवास्तव ने कहा कि यह नियंत्रण कक्ष हर समय कार्यरत है और तीन मई तक 12,000 शिकायतों का निस्तारण कर चुका है। उन्होंने कहा कि यदि ट्रक किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे हैं तो वे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की हेल्पलाइन ‘1033’ पर संपर्क कर लॉकडाउन के संबंध में कोई भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

लॉकडाउन के कारण नेपाल में फंसे भारतीयों ने सरकार से वापसी में मदद की गुहार लगायी

लॉकडाउन के कारण नेपाल के दारचुला शहर में फंसे 20 से ज्यादा भारतीयों ने केंद्र सरकार से उनकी देश वापसी में मदद करने की अपील की है । ये भारतीय 25 मार्च से पहले नेपाल गए थे लेकिन दोनों देशों में कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिये लागू लॉकडाउन के कारण वहीं फंस गए।

जिले के धारचूला क्षेत्र के उपजिलाधिकारी ए के शुक्ला ने बताया कि भारतीय पर्यटकों तथा वहां अपने रिश्तेदारों से मिलने गये लोगों के इस समूह ने भारतीय अधिकारियों से अपने नेपाली समकक्षों से उनकी घर वापसी के लिये बात करने का आग्रह किया है।

अधिकारी ने बताया कि सीमा के भारत की तरफ स्थित धारचूला शहर और नेपाल की तरफ स्थित दारचुला एक सीमा पुल से जुडे हुए हैं । उन्होंने बताया कि इन नागरिकों के अलावा, चांद घाटी के आदिवासी गांवों के करीब 30 जानवर भी नेपाली क्षेत्र में फंस गये हैं।

उन्होंने बताया कि 25 मार्च से पहले अपने जानवरों को लेकर नेपाल के उंचाई वाले हरे क्षेत्रों में चराने ले गये कुछ लोगों ने भी भारतीय प्रशासन से गर्ब्यांग क्षेत्र के सीतापुल के जरिए घर वापसी में सहयोग के लिये आवेदन किया है । हांलांकि, नेपाली अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों को आश्वस्त किया है कि वहां फंसे लोगों की अच्छी तरह से देखभाल की जा रही है। 

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