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छत्तीसगढ़ चुनावः सत्ता की चाबी हैं ये 12 सीटें, अजीत जोगी ने लगा दिया है इन पर करारा दांव

By लोकमत न्यूज़ ब्यूरो | Updated: October 28, 2018 07:46 IST

2003 से लेकर 2013 तक भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा संघर्ष होता आया है। तीसरी शक्ति के रूप में अजीत जोगी आज मैदान में डटे हैं।

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- गोपाल वोरा

छत्तीसगढ़ में पहली बार त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति निर्मित हुई है। बस्तर की 12 सीटों को सत्ता की चाबी के रूप में समझा जाता है। इस समय कांग्रेस के पास 12 में से आठ सीटें हैं और भाजपा के पास चार। मुख्यमंत्री डॉ। रमन सिंह ने कहा है कि इस बार हम बस्तर की स्थिति को पलटकर रख देंगे। इसी वजह से उन्होंने आज अपने चुनाव प्रचार अभियान का आगाज बस्तर की कोंटा सीट से किया है।

2003 से लेकर 2013 तक भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा संघर्ष होता आया है। तीसरी शक्ति के रूप में अजीत जोगी आज मैदान में डटे हैं। उनकी पार्टी के साथ दो और दलों का महागठबंधन नि:संदेह त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति पैदा करने में सक्षम है। प्रदेश में 2013 के चुनाव में बमुश्किल ।75 प्रतिशत मतों के अंतर से ही भाजपा की सरकार बनी थी। इस मामूली खाई को पाटना कोई बड़ी बात नहीं है।

इसी प्रमुख तथ्य को देखते हुए कांग्रेस ने इस चुनाव में एड़ी-चोटी का जोर लगाया है। तीसरी शक्ति के रूप में अजीत जोगी का अपना पूरे प्रदेश में जनाधार और वोट बैंक है। उनके अपने व्यक्तिगत समर्थक भी पूरे राज्य में फैले हुए हैं। जातिगत समीकरण के लिहाज से भी सतनामी समाज के वोट बैंक पर उन्होंने सेंध लगा रखी है। कांग्रेस को वे सबसे बड़ा झटका देने की तैयारी में हैं। उनका अपना दावा है कि इस बार जोगी सरकार बनेगी। 

रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक जोगी कांग्रेस के गठबंधन ने अपने प्रत्याशी खड़े कर दिए हैं। हर विधानसभा क्षेत्र में वे चुनौती बनकर कांग्रेस और भाजपा दोनों को परेशानी में डाल चुके हैं। निश्चित रूप से त्रिकोणीय संघर्ष में भाजपा ज्यादा लाभ की स्थिति में है। इसका मूल कारण यह है कि जोगी के ज्यादातर समर्थक कांग्रेस के कैंप से ही हैं। उनका अपना जनाधार भी कांग्रेस में रहते हुए ही बना है। 

बस्तर अकेले में कोंटा विधानसभा पर नजर दौड़ाएं तो यहां साफ तौर पर त्रिकोणीय संघर्ष दिख रहा है। कांग्रेस के प्रत्याशी कवासी लखमा, भाजपा के धनीराम बारसे और जोगी गठबंधन के सीपीआई प्रत्याशी मनीष कुंजाम तीनों का मुकाबला दिलचस्प होने जा रहा है। मनीष कुंजाम भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी और साथ ही साथ नक्सलियों से संपर्क के मद्देनजर उनका अपना प्रभाव क्षेत्र है। वे बाजी पलटने की स्थिति में भी हैं।

2013 के पिछले विधानसभा चुनाव में कोंटा में कुल एक लाख 64 हजार 366 मत थे। इसमें पुरुष मतदाता 77634 और महिला मतदाता 86732 थे। चुनाव परिणाम आने पर कुल वोट पड़े 75848 यानी 48.36 प्रतिशत मतदान हुआ। कवासी लखमा कांग्रेस 27610 मत प्राप्त कर विजयी हुए।(गोपाल वोरा लोकमत समाचार से जुड़े हैं)

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