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बीटीसी के पहले चरण के चुनाव के लिए प्रचार थमा

By भाषा | Updated: December 5, 2020 21:50 IST

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गुवाहाटी, पांच दिसंबर असम बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) की 21 सीटों पर सात दिसंबर को होने वाले पहले चरण के लिये चुनाव प्रचार शनिवार शाम थम गया। सत्तारूढ़ बीपीएफ लगातार चौथे कार्यकाल के लिए सत्ता में वापसी की कोशिश में है।

असम की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने मतदाताओं को रिझाने के लिए जोर-शोर से प्रचार किया। बीटीसी की 40 सीटें कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदलगुरी जिलों में फैली हैं।

पहले चरण में उदलगुरी की 10 और बक्सा की 11 सीटों पर मतदान होगा, जिसमें 132 उम्मीदवार मैदान में हैं।

दूसरे चरण का चुनाव 10 दिसंबर को 19 सीटों के लिए होगा। दोनों चरणों में पड़े मतों की गिनती 12 दिसंबर को होगी।

दो चरणों के चुनाव में कुल 23,82,036 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। बीटीसी का गठन 2003 में हुआ था और 2005 से परिषद के चुनाव हो रहे हैं।

चालीस सदस्यीय बीटीसी का चुनाव चार अप्रैल को होना था, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया था।

इसके बाद असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने 27 अप्रैल 2020 को परिषद के प्रशासक का जिम्मा संभाल लिया था, क्योंकि परिषद का पांच साल का कार्यकाल 27 अप्रैल को खत्म हो गया था।

सत्तारूढ़ भाजपा की गठबंधन सहयोगी बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ) अकेली चुनाव मैदान में हैं। प्रचार के दौरान भाजपा और बीपीएफ के बीच तीखी जबानी जंग चली और दोनों पार्टियों के नेताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ असंसदीय शब्दों तक का इस्तेमाल कर दिया।

बीटीसी पर बीपीएफ का 2005 से ही कब्जा है।

प्रचार के दौरान भाजपा के पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) के संयोजक और राज्य के मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने कई बार कहा कि बीपीएफ से 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में पांच साल के लिए गठबंधन हुआ था और 2021 के विधानसभा चुनाव में उनके साथ गठजोड़ जारी रहने की संभावना नहीं है।

भाजपा, असम गण परिषद, और बीपीएफ के साथ मिलकर सरकार चला रही है। राज्य की 126 सदस्यीय विधानसभा में उसके पास पूर्ण बहुमत नहीं है। भाजपा 60 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है और उसे असम गण परिषद के 14 और बीपीएफ के 12 विधायकों का समर्थन है।

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी बीटीआर में कई चुनावी रैलियों को संबोधित किया था।

बहरहाल, यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल), गण सुरक्षा पार्टी, कांग्रेस-एआईयूडीएफ का गठबंधन भी चुनाव मैदान में हैं। इनके अलावा सैकड़ो निर्दलीय भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भास्कर ज्योति महंता ने पहले कहा था कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं और क्षेत्र में अर्द्धसैनिक बलों की 30 कंपनियों को तैनात किया गया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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