बिहार में 9 विधायक करेंगे 'खेला'?, कांग्रेस के 6 और रालोमो के 3 विधायक मारेंगे पलटी?, जदयू-भाजपा करेंगे दोस्ती?

By एस पी सिन्हा | Updated: January 16, 2026 15:21 IST2026-01-16T15:19:20+5:302026-01-16T15:21:36+5:30

बिहार विधानसभा की वर्तमान स्थिति में एनडीए के पास 202 विधायक हैं। इसमें भाजपा के 89, जदयू के 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के 05 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के 04 विधायक हैं।

bihar rajniti politics Kharmas 'game' in Bihar 6 Congress and 3 RLMO MLAs turn against each other Will JDU-BJP make friendship | बिहार में 9 विधायक करेंगे 'खेला'?, कांग्रेस के 6 और रालोमो के 3 विधायक मारेंगे पलटी?, जदयू-भाजपा करेंगे दोस्ती?

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Highlightsमहागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। राजद के 25, कांग्रेस के 06 हैं।भाकपा-माले 02, माकपा के 01 और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) के 01 विधायक हैं।एआईएमआईएम के पास 05 और बहुजन समाज पार्टी के पास एक सीट है। 

पटनाः खरमास खत्म होते ही बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। राज्य की सियासत में एक बार फिर दलबदल और सियासी उठापटक की आहट सुनाई देने लगी है। गठबंधन के भीतर वर्चस्व की जंग और विपक्ष में बिखराव के संकेतों ने कड़ाके की ठंड में भी बिहार का सियासी पारा बढ़ा दिया है। एक ओर जहां उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) में टूट का दावा किया जा रहा है तो दूसरी ओर कांग्रेस के छह विधायकों के भी टूटने की चर्चा होने लगी है। रालोमो में टूट का दावा किसी और ने नहीं बल्कि जदयू विधायक भगवान सिंह कुशवाहा ने किया है।

भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि अगर उपेंद्र कुशवाहा के विधायक जेडीयू में आते हैं तो स्वागत

भगवान सिंह कुशवाहा ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के तीन विधायक बागी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा(रालोमो) में अंदरूनी कलह साफ दिखाई दे रही है और पार्टी के विधायक खुद को अब बागी बता रहे हैं। भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि अगर उपेंद्र कुशवाहा के विधायक जेडीयू में आते हैं तो उनका स्वागत है।

इसमें कोई जबर्दस्ती नहीं है, जो भी नीतीश कुमार के साथ काम करना चाहता है। उन्होंने कहा कि उसके लिए जदयू के दरवाजे खुले हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ रालोमो ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भी अगर नीतीश कुमार के साथ काम करना चाहते हैं, तो उनका भी स्वागत किया जाएगा।

कांग्रेस के सभी छह विधायक

रालोमो  के 4 में से 3 विधायक रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह भाजपा और जदयू के संपर्क में बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस के सभी छह विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक रंजन, आबिदुर रहमान, मोहम्मद कामरुल होदा और मनोज बिस्वान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में शामिल होने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।

यदि ऐसा होता है तो 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार, रालोमो और कांग्रेस के विधायक जदयू नेतृत्व के संपर्क में हैं और पार्टी की वर्तमान कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हैं। बता दें कि हाल ही में कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय पटना के सदाकत आश्रम में आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज और 8 जनवरी को 'मनरेगा बचाओ' अभियान की बैठक में इन सभी कांग्रेस विधायकों ने दूरी बनाए रखी। जदयू के वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि अब केवल कुछ ही दिन बाकी हैं जब यह निर्णय सार्वजनिक रूप ले सकता है।

243 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व शून्य हो जाएगा

यदि कांग्रेस के विधायक पाला बदलते हैं, तो 243 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व शून्य हो जाएगा। जबकि रालोमो में असंतोष की मुख्य वजह कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक को कैबिनेट में शामिल करना माना जा रहा है। इसबीच भाजपा अपनी संख्या बल (वर्तमान में 89) को और बढ़ाना चाहती है ताकि गठबंधन में उसका दबदबा बना रहे।

जदयू की संख्या बढ़कर 91 हो जाएगी

वहीं जदयू (85 सीटें) कांग्रेस विधायकों को तोड़कर भाजपा से आगे निकलने की जुगत में है। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के अनुसार भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि जदयू को 85 सीटें मिली थीं। यदि कांग्रेस के छह विधायक जदयू में शामिल हो जाते हैं, तो जदयू की संख्या बढ़कर 91 हो जाएगी।

जिससे वह भाजपा को पीछे छोड़कर सदन में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी।  यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि बिहार में सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।  राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायकों में नाराजगी का कारण कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक को कैबिनेट मंत्री बनाना बताया जा रहा है।

जदयू में लौटने की संभावनाओं पर चर्चा

हाल ही में इन विधायकों ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की, जिससे पार्टी टूटने की अटकलें और तेज़ हो गई हैं। इसी बीच जदयू के पूर्व कद्दावर नेता आरसीपी सिंह, जो नीतीश कुमार से अलग होकर प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' में गए थे, उनके भी फिर से जदयू में लौटने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।

हाल ही में एक 'कुर्मी सम्मेलन' में नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की मौजूदगी को राजनीतिक गलियारों में बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों की मानें तो भले ही एनडीए के पास स्पष्ट और भारी बहुमत है, लेकिन घटक दलों के बीच सर्वोच्चता की लड़ाई और छोटे दलों में आंतरिक असंतोष ने बिहार की राजनीति को एक अस्थिर दौर में धकेल दिया है।

यदि ये दल-बदल हकीकत में बदलते हैं, तो यह न केवल विपक्षी गठबंधन (महागठबंधन) के लिए बड़ा झटका होगा, बल्कि नीतीश कुमार और भाजपा के बीच के शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के विधायक एनडीए में मिल जाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो विधानसभा में जदयू-भाजपा का संतुलन और बदल सकता है।

ऐसे में कांग्रेस में किसी बिखराव से पहले राजद के लिए महागठबंधन को एकजुट रखने की चुनौती है, जिसकी बुनियाद कांग्रेस नेताओं के बयानों से हिलने लगी है। जानकारों की मानें तो आने वाले हफ्तों में इस खेल से सदन की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। हालांकि, कांग्रेस और रालोमो नेतृत्व इसे ‘भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बता रहा है।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह ए कहा कि ऐसी अफवाहें सियासी गलियारे में चलती रहती हैं। लेकिन इसमें कोई दम नहीं है। हमारे सभी विधायक एकजुट हैं और एनडीए के खिलाफ झंडा बुलंद करते रहेंगे। वहीं, रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है कि हमारे विधायक हम से नाराज हों।

सभी साथ हैं और एनडीए सरकार में बिहार को आगे बढाने के लिए काम करते रहेंगे। अभी कुछ दिन पहले वे अभी अपने-अपने क्षेत्र में हैं। यही कारण है कि पटना से बाहर हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि वे सभी रालोमो को छोड़ने जा रहे हैं। विपक्ष के द्वारा अफवाहें उड़ाई जाती रहती हैं। लेकिन हकीकत कुछ और होता है।

बता दें कि बिहार विधानसभा की वर्तमान स्थिति में एनडीए के पास 202 विधायक हैं। इसमें भाजपा के 89, जदयू के 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के 05 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के 04 विधायक हैं। जबकि महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं।

इसमें राजद के 25, कांग्रेस के 06, भाकपा-माले 02, माकपा के 01 और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) के 01 विधायक हैं। जबकि अन्य के खाते में कुल 06 सीटें हैं। इनमें एआईएमआईएम के पास 05 और बहुजन समाज पार्टी के पास एक सीट है। इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार से राज्यव्यापी समृद्धि यात्रा पर निकल गए हैं।

उनकी इस यात्रा में विकास योजनाओं की समीक्षा, जनता से फीडबैक और राजनीतिक संदेश देने पर फोकस रहेगा। चुनाव जीत के बाद यह यात्रा सरकार की शक्ति दिखाने और विपक्ष को कमजोर करने का माध्यम बनेगी। चिराग की आभार यात्रा भी एनडीए को कुछ संबल ही देगी।

भाजपा के छोटे-छोटे कार्यक्रम वर्षपर्यंत चलते रहते हैं, लेकिन कुछ इसी तरह सक्रिय रहने वाले वामदलों के लिए कठिन संघर्ष की घड़ी है। जदयू पंचायत स्तर से संगठन चुनाव शुरू करेगा। पार्टी का लक्ष्य एक करोड़ सदस्य बनाने का है, जिससे आधार मजबूत करने का प्रयास होगा।

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद नितिन नवीन बिहार मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र दे चुके हैं। इस कारण अब सरकार में दस रिक्तियां हैं। संभव है कि बजट सत्र से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार हो, जिसमें नए चेहरों या गठबंधन साझेदारों को जगह मिल सकती है। दो फरवरी से बजट सत्र शुरू होने वाला है।

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