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बिहार में महिला जज की संख्या सबसे कम, तेलंगाना सबसे आगे, 7 हाईकोर्ट में एक भी महिला न्यायाधीश नहीं

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 8, 2019 19:45 IST

जून 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना में निचली अदालतों में महिला न्यायाधीशों की भागीदारी का आंकड़ा 44 प्रतिशत है जो देश में सर्वाधिक है। वहीं, बिहार में 11.5 प्रतिशत के आंकड़े के साथ महिला न्यायाधीशों की सबसे कम भागीदारी है।

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ठळक मुद्देटाटा ट्रस्ट्स’ इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2019 के अनुसार न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी कम हुई है।लैंगिक विविधता के महत्व की व्यापक स्वीकृति के बावजूद राज्यों की अदालतों में महिलाओं की वास्तविक संख्या निराशाजनक है।

देश में बड़े और मध्यम आकार के राज्यों में निचली अदालतों में महिला न्यायाधीशों की सर्वाधिक संख्या तेलंगाना में है व बिहार इस मामले में सबसे पीछे है।

वहीं, सात राज्य ऐसे हैं जहां के उच्च न्यायालयों में एक भी महिला न्यायाधीश नहीं है। जून 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना में निचली अदालतों में महिला न्यायाधीशों की भागीदारी का आंकड़ा 44 प्रतिशत है जो देश में सर्वाधिक है। वहीं, बिहार में 11.5 प्रतिशत के आंकड़े के साथ महिला न्यायाधीशों की सबसे कम भागीदारी है।

टाटा ट्रस्ट्स’ इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2019 के अनुसार न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी कम हुई है और लैंगिक विविधता के महत्व की व्यापक स्वीकृति के बावजूद राज्यों की अदालतों में महिलाओं की वास्तविक संख्या निराशाजनक है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘बड़े और मध्यम आकार के राज्यों में निचली अदालतों में तेलंगाना में 44 प्रतिशत से थोड़ी अधिक, महिलाओं की सर्वाधिक भागीदारी है, लेकिन उच्च न्यायालय के स्तर पर यह संख्या केवल 10 प्रतिशत है।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘इसी तरह पंजाब में अधीनस्थ स्तर पर महिलाओं की भागीदारी 39 प्रतिशत और उच्च न्यायालय स्तर पर यह 12 प्रतिशत है।’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि यही ढर्रा लगभग हर जगह प्रतीत होता है, सिवाय तमिलनाडु के, जिसने इस ढर्रे को तोड़ा है जहां उच्च न्यायालय स्तर पर 19.6 प्रतिशत के आंकड़े के साथ सर्वाधिक महिला न्यायाधीश हैं। वहीं, इस राज्य की निचली अदालतों में महिलाओं के लिए आरक्षित 35 प्रतिशत पदों से अधिक महिला न्यायाधीश हैं।

टाटा ट्रस्ट की रिपोर्ट में 18 बड़े और मध्यम आकार के तथा सात छोटे आकार वाले राज्यों का विवरण जुटाया गया। छोटे राज्यों में मेघालय में निचली अदालतों में सर्वाधिक 74 प्रतिशत तथा गोवा में 66 प्रतिशत महिला न्यायाधीश हैं।

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