बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार पर गाज?, विधानसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद छुट्टी तय?, सभी 6 विधायक नाराज
By एस पी सिन्हा | Updated: January 27, 2026 14:49 IST2026-01-27T14:47:40+5:302026-01-27T14:49:10+5:30
सूत्रों की मानें तो करारी हार के बाद कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल के साथ-साथ संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद तेज कर दी है।

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पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली शर्मनाक हार के बाद अब पार्टी आलाकमान एक्शन मूड में नजर आ रहा है। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। चुनाव में हार के बाद से ही नेताओं कार्यकर्ताओं में विवाद देखने को मिल रहा था। इसी बीच अब पार्टी पुराने समीकरण पर लौट सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार की छुट्टी हो सकती है। दोनों नेताओं से उनकी जिम्मेदारी छीनी जा सकती है। जिसके बाद से ही सियासी हलचल तेज हो गई है।
अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली में बैठक बुलाई
सूत्रों की मानें तो करारी हार के बाद कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल के साथ-साथ संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद तेज कर दी है। बता दें कि विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा के लिए पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल ही में दिल्ली में प्रदेश स्तरीय नेताओं की बैठक बुलाई थी, जिसमें पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे।
इस बैठक में प्रदेश स्तरीय नेताओं से हार के कारण पूछे गए। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पार्टी के सभी विधायकों ने टिकट वितरण में देरी को बड़ा कारण बताया। जीते हुए विधायकों ने कहा कि टिकट इतनी देरी से बांटे गए कि पार्टी प्रत्याशियों को अपना प्रचार करने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका। हालांकि, इसके लिए राजद को जिम्मेदार ठहराया।
संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद
सभी विधायकों ने एक सुर में राजद से गठबंधन तोड़ने की मांग रखी थी। इसके बाद पार्टी आलाकमान प्रदेश में नए सिरे से संगठन को खड़ा करने पर विचार कर रहा है। सूत्रों की मानें तो सभी जिलों के जिलाध्यक्षों की भी विदाई भी तय मानी जा रही है। इसके बाद संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद शुरू होगी।
बैठक में राहुल गांधी ने साफ कहा था कि सभी को अपनी-अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अब प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के सिर पर ही इस करारी हार की पूरी जिम्मेदारी डाली जा रही है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए इस बार नेशनल सर्च कमेटी का गठन किया जाएगा, ताकि पिछली बार की तरह विवाद न हो।
राजेश राम को करीब एक साल पहले ही अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी
कमेटी 5–6 नाम आलाकमान को भेजेगी, जिनमें से एक को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा चुनाव में 61 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद कांग्रेस को महज 6 सीटें जीतने में कामयाबी मिली थी। बता दें कि अल्लावरु और राजेश राम को करीब एक साल पहले ही अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
बिहार की कुल आबादी का करीब 44 प्रतिशत
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने ईबीसी-ओबीसी पर अत्यधिक निर्भरता छोड़कर अपने पारंपरिक वोट बेस भूमिहार, ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम पर फोकस करने का निर्णय लिया है। जातीय सर्वे के मुताबिक ये वर्ग बिहार की कुल आबादी का करीब 44 प्रतिशत हैं।
कांग्रेस इसी सामाजिक समीकरण के सहारे 1990 तक बिहार की सत्ता में प्रभावी रही थी। लालू यादव के उदय के बाद यह समीकरण बिखर गया। वर्तमान में सवर्ण और दलित एनडीए के साथ हैं, जबकि मुस्लिम वोट बैंक का बड़ा हिस्सा राजद के पास है।