कोरोनो वायरस के प्रसार को रोकने और उसे मारने की क्षमता रखने वाले एक उपकरण स्कैलेन हाइपरस्चार्ज कोरोना कैनन (साइकोकैन) को यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेसन (एफडीए) और यूरोपीय संघ (ईयू) से मंजूरी मिल गई है। न्यूज -18 की रिपोर्ट में इसे बेंगलुरु की एक संस्था 'डि स्कैलेन' ( De Scalene) द्वारा विकसित किया गया है।
साइकोकैन (Shycocan) दरअसल एक छोटे ड्रम की तरह है जिसे आराम से किसी ऑफिस, स्कूल, मॉल, होटल, एयरपोर्ट या किसी ऐसे अन्य बंद जगह में रखा जा सकता है और इसका इस्तेमाल सतह को रोगाणुओं से मुक्त कराया जा सकता है। ये भी साबित हुआ है कि कोरोना वायरस में मौजूद स्पाइक प्रोटिन या जिसे एस-प्रोटिन भी कहते हैं, उसे 99.9 प्रतिशत तक बेअसर कर सकता है।
हालांकि, ये सक्रमित शख्स को ठीक नहीं कर सकता लेकिन वायरस को फैलने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
ये खास उपकरण किसी भी कमरे या बंद स्थान को सैंकड़ों इलेक्ट्रोन से भर देता है। ऐसे में अगर कोई संक्रमित व्यक्ति भी कमरे में आता है तो उसके छींकने या खांसने से फैले वायरस को ये निष्प्रभावी कर देगा। साथ ही ये सतह पर मौजूद वायरस को भी खत्म कर देगा। इससे हवा से वायरस के फैलने का खतरा बहुत कम हो जाता है।
अधिकारियों के अनुसार इस उपकरण के निर्माण की मंजूरी पिछले ही हफ्ते मिली है। संस्थान से जुड़े राजा विजय कुमार ने बताया कि साइकोकैन को 26 टेस्ट से गुजरना पड़ा। इस टेस्ट के तहत उपकरण से जुड़ी सुरक्षा, क्षमता और इस बात को भी परखा गया कि इसका कोई नुकसान इंसानों पर तो नहीं होगा।
विजय कुमार के अनुसार इस उपकरण के दाम और इसक उत्पादन लाइसेंस हासिल करने वालों पर निर्भर होगा। कुमार के अनुसार भारत में 9 कंपनियों ने इसमें दिलचस्पी अभी दिखाई है। तीन कंपनियों तो लाइसेंस एग्रीमेंट के लिए भी तैयार हैं।