कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?, बरेली के नगर मजिस्ट्रेट से दिया इस्तीफा, आखिर वजह
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 26, 2026 20:16 IST2026-01-26T18:38:58+5:302026-01-26T20:16:08+5:30
प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा।

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बरेलीः बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा।
Bareilly, Uttar Pradesh: City Magistrate, Alankar Agnihotri says, "You may have seen the incidents I mentioned in my statement. One concerns what happened during the fair when our Shankaracharya went for bathing at Mauni Amavasya. Their disciples’ hair was pulled, and they were… pic.twitter.com/bTFarLjX7L
— IANS (@ians_india) January 26, 2026
सूत्रों ने बताया कि अग्निहोत्री ने इस्तीफे का कारण सरकारी नीतियों, विशेषकर यूजीसी के नए नियमों से गहरी असहमति को बताया है। कानपुर नगर के निवासी अग्निहोत्री पहले उन्नाव, बलरामपुर और लखनऊ समेत कई जिलों में एसडीएम के रूप में कार्य कर चुके हैं और प्रशासनिक हलकों में अपने स्पष्ट विचारों व सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि बीते दो सप्ताह में दो बड़े निंदनीय मामले सामने आए हैं, जिन्होंने उन्हें झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि पहला मामला प्रयागराज माघ मेले से जुड़ा है, जहां मौनी अमावस्या के स्नान के लिए जाते समय ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों को चोटी खींचकर घसीटा गया।
पिटाई की गई। इस पूरी घटना को लेकर उन्होंने स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कृत्य बेहद निंदनीय है और वास्तविक अर्थों में प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इस समय उनके भीतर जो पीड़ा और व्यथा है, उसे शब्दों में पूरी तरह बयान करना संभव नहीं है।
अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि अब वह इस तंत्र का हिस्सा नहीं बन सकते, क्योंकि न जनतंत्र बचा है और न गणतंत्र, अब केवल गनतंत्र शेष रह गया है। अपने इस्तीफे में अग्निहोत्री ने कहा कि जब सरकारें ऐसी नीतियां अपनाती हैं जो समाज और राष्ट्र को विभाजित करती हैं, तो उन्हें जगाना आवश्यक हो जाता है।
उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को "काला कानून" बताते हुए आरोप लगाया कि ये नियम कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर देंगे और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने 13 जनवरी को प्रकाशित यूजीसी विनियम 2026 पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इससे ब्राह्मण समुदाय के लोगों पर अत्याचार होंगे।
उन्होंने कहा कि इसके प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं और सामाजिक अशांति व आंतरिक असंतोष को जन्म दे सकते हैं। अग्निहोत्री ने कहा कि ब्राह्मण जनप्रतिनिधि किसी कॉरपोरेट कंपनी के कर्मचारी बनकर रह गए हैं। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीटेक और एलएलबी की पढ़ाई की थी। अग्निहोत्री ने अमेरिका में भी काम किया है।
इस मामले में बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह से लगातार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। बरेली के मंडल आयुक्त बीएस चौधरी की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विनियम, 2026 की हाल में जारी अधिसूचना की सामान्य वर्ग ने काफी आलोचना की है।
आलोचकों का तर्क है कि जाति-आधारित पूर्वाग्रह को दूर करने के प्रयास के तहत उठाया गया यह कदम उनके खिलाफ भेदभाव पैदा कर सकता है। यूजीसी ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत संस्थानों को विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी दल गठित करने होंगे ताकि विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके।
कांग्रेस और सपा ने बरेली के नगर मजिस्ट्रेट के इस्तीफे को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधा
देश के 77 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के पद से इस्तीफा देने के मामले को लेकर विपक्षी दलों कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश को डर से नहीं संविधान से चलाया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा, “बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा कथित तौर पर इस्तीफा दिया जाना बेहद गंभीर संकेत है।” उन्होंने कहा, “शंकराचार्य व उनके शिष्यों पर लाठीचार्ज और प्रशासनिक दबाव यह सब दर्शाता है कि भाजपा सरकार में संविधान, आस्था व अभिव्यक्ति तीनों असुरक्षित हैं।”
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “सच्चाई सामने आनी चाहिए। प्रदेश को डर से नहीं, संविधान से चलाया जाए।” समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और बरेली के पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने एक बयान में कहा, “एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी के इस्तीफा देने से जुड़ी परिस्थितियां इस ओर ध्यान दिलाती हैं कि ये मुद्दा किसी जाति या धर्म का नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा व संविधान का है।”
उन्होंने कहा कि “चाहे अधिकारी किसी भी बिरादरी से हो, कर्तव्य का पालन करने पर दबाव या अपमान अस्वीकार्य है।” ऐरन ने कहा कि “शासन की असली ताकत राजधर्म और संवैधानिक मर्यादाओं में है। यह राजनीति नहीं, लोकतंत्र की आत्मा का सवाल है।”
बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया।
आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा।