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अनुच्छेद 370: महबूबा मुफ्ती, सज्जाद लोन, फारूक और उमर अबदुल्ला बिना शर्त रिहाई पर अड़े

By सुरेश डुग्गर | Updated: October 10, 2019 18:15 IST

दरअसल 5 अगस्त से राज्य के दो टुकड़े करने और उसकी पहचान खत्म किए जाने की कवायद के बाद से ही 5 हजार के लगभग छोटे बड़े राजनीतिज्ञों को हिरासत में रखा गया है और अब उनमें से उनकी रिहाई संभव हो रही है जो प्रशासन की शर्तें मानते हुए मुचलके पर हस्ताक्षर कर बांड भर कर दे रहे हैं।

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ठळक मुद्देराज्य प्रशासन ने पांच अगस्त से हिरासत में लिए गए तीन नेताओं को आज रिहा कर दिया है। इन नेताओं में यावर मीर, नूर मोहम्मद और शोयब लोन शामिल हैं। अधिकारियों ने बुधवार देर रात बताया कि ये तीनों नेता पांच अगस्त से हिरासत में थे और इनको रिहाई के लिए मुचलका भी भरना पड़ा है।

राज्य प्रशासन ने पांच अगस्त से हिरासत में लिए गए तीन नेताओं को आज रिहा कर दिया है। इन नेताओं में यावर मीर, नूर मोहम्मद और शोयब लोन शामिल हैं। अधिकारियों ने बुधवार देर रात बताया कि ये तीनों नेता पांच अगस्त से हिरासत में थे और इनको रिहाई के लिए मुचलका भी भरना पड़ा है।

दरअसल 5 अगस्त से राज्य के दो टुकड़े करने और उसकी पहचान खत्म किए जाने की कवायद के बाद से ही 5 हजार के लगभग छोटे बड़े राजनीतिज्ञों को हिरासत में रखा गया है और अब उनमें से उनकी रिहाई संभव हो रही है जो प्रशासन की शर्तें मानते हुए मुचलके पर हस्ताक्षर कर बांड भर कर दे रहे हैं। पर महबूबा मुफ्ती, सज्जाद गनी लोन, डॉ. फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला जैसे कद्दावर नेता फिलहाल रिहा इसलिए नहीं किए गए हैं क्योंकि वे बिना शर्त रिहाई पर अड़े हुए हैं।

यावर मीर रफियाबाद विधानसभा सीट से पीडीपी के पूर्व विधायक हैं। जबकि शोयब लोन ने उत्तरी कश्मीर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा बाद में पार्टी से इस्तीफा दे दिया। लोन को पीपुल्स कांफ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन का करीबी माना जाता था।

तीसरे नेता नूर मोहम्मद नेशनल कांफ्रेंस कार्यकर्ता हैं और श्रीनगर शहर के आतंकवाद प्रभावित बटमालू क्षेत्र में पार्टी का चेहरा हैं। तीनों नेता शांति और अच्छे व्यवहार बनाए रखने के लिए हलफनामा भी दे चुके हैं। इससे पहले 21 सितंबर को पीपुल्स कांफ्रेंस के इमरान अंसारी और सैयद अखून को स्वास्थ्य आधार पर राज्य प्रशासन ने रिहा किया था।

गुरुवार को रिहा किए गए तीन कश्मीरी नेताओं को लेकर महबूबा मुफ्ती ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आज रिहा किए गए नेताओं को बांड पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया। इस दौरान महबूबा ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए हिरासत को ही अवैध बताया। साथ ही अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए यह बात भी सामने आई कि महबूबा मुफ्ती सहित कई नेताओं ने इन बांड पर हस्ताक्षर करने के लिए स्पष्ट रूप से मना कर दिया है।

सिद्धांतों और लोकतंत्र की वकालत करते हुए महबूबा ने कहा कि भारत जिसने हमेशा स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों के लिए लड़ाई लड़ी, वह आज कश्मीर में अपने क्रूर कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठघरे में खड़ा है। वे अपने ट्विटर पर लिखती थीं कि सरकारें आएंगी और जाएंगी लेकिन इस देश की प्रतिष्ठा और नैतिक ताने-बाने को क्या नुकसान होगा?

टॅग्स :धारा ३७०जम्मू कश्मीरमहबूबा मुफ़्तीफारूक अब्दुल्लाउमर अब्दुल्ला
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