महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन से बारामती के लोग चिंतित?, ‘दादा’ के बाद कौन?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 29, 2026 20:32 IST2026-01-29T20:31:53+5:302026-01-29T20:32:45+5:30

नए प्रयोगों और पहल के लिए उत्सुक रहते थे। एक पल में हमने उन्हें खो दिया और अब आगे सिर्फ अंधकार दिखता है। हर कोई बारामती के भविष्य को लेकर चिंतित है।

ajit pawar death People Baramati worried over demise Maharashtra Deputy Chief Minister Who after 'Dada' | महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन से बारामती के लोग चिंतित?, ‘दादा’ के बाद कौन?

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Highlightsनए और नवाचारपूर्ण परियोजनाओं को लाने के लिए तत्पर रहते थे।कभी लोगों को दादा से विकास या नई योजनाओं की मांग करनी पड़ी हो।विमान हादसे को बारामती के इतिहास का सबसे काला दिन बताया।

पुणेः महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के अचानक निधन से उबरने की कोशिश कर रहे लोगों के बीच, पुणे जिले के उनके पैतृक स्थान बारामती के निवासियों के मन में एक और चिंता उभरने लगी है। पुणे से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित इस क्षेत्र में बीते कई वर्षों से विकास का पर्याय बन चुके अजित पवार को स्थानीय लोग ‘दादा’ कहकर संबोधित करते थे। बरामती के निवासियों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए उन्हें कभी पवार के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि वे खुद ही नए और नवाचारपूर्ण परियोजनाओं को लाने के लिए तत्पर रहते थे।

बरामती में विमान हादसे में मारे गए पवार का बृहस्पतिवार को अंतिम संस्कार किए जाने के बाद, शोकाकुल लोग यह सोचने लगे हैं कि अब उनके क्षेत्र का भविष्य क्या होगा। शिक्षक गणेश लोंढे ने कहा कि बारामती का विकास मॉडल पवार की दूरदृष्टि और सोच का नतीजा था। उन्होंने कहा, “मुझे याद नहीं कि कभी लोगों को दादा से विकास या नई योजनाओं की मांग करनी पड़ी हो।

वे हमेशा नए प्रयोगों और पहल के लिए उत्सुक रहते थे। एक पल में हमने उन्हें खो दिया और अब आगे सिर्फ अंधकार दिखता है। हर कोई बारामती के भविष्य को लेकर चिंतित है।” स्थानीय वकील विलास गायकवाड़ ने इस विमान हादसे को बारामती के इतिहास का सबसे काला दिन बताया।

उन्होंने कहा, “यह हमारे लिए अविश्वसनीय है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख अजित दादा अब हमारे बीच नहीं रहे। अब भविष्य बहुत धुंधला नज़र आ रहा है।” निवासियों ने अपराध, विशेषकर महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर पवार की कत्तई बर्दाश्त नहीं करने की नीति को भी याद किया।

छात्रा वैशाली लोखंडे ने कहा, “उनकी सख्त नीतियों और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के चलते महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करती थीं और देर रात भी शहर में बेझिझक आ-जा सकती थीं।” राहुल नाहरगोजे के लिए पवार का निधन स्वीकार कर पाना कठिन है।

उन्होंने कहा, “अजित दादा के नेतृत्व में बारामती जैसी विकास की मिसाल शायद देश में किसी और शहर में नहीं होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे क्या होगा। मुझे लगता है कि यहां विकास की रफ्तार थम जाएगी।” राकांपा प्रमुख अजित पवार का बृहस्पतिवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान कॉलेज मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

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