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निर्भया गैंगरेप केसः दोषी मुकेश ने राष्ट्रपति के पास भेजी दया याचिका, चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 14, 2020 20:06 IST

न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने दोषी विनय शर्मा और मुकेश कुमार की सुधारात्मक याचिकाओं पर चैंबर में विचार के बाद उन्हें खारिज कर दिया।

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ठळक मुद्देसुधारात्मक याचिका किसी व्यक्ति को उपलब्ध अंतिम कानूनी विकल्प है। पांच न्यायाधीशों की यह सर्वसम्मत राय थी कि इन दोषियों की सुधारात्मक याचिकाओं में कोई दम नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में मौत की सजा पाये चार मुजरिमों में से दो की सुधारात्मक खारिज कर दी।

निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड मामले के चार दोषियों में से एक मुकेश सिंह ने मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के समक्ष दया याचिका दायर की। यह जानकारी तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने दी। सिंह ने राष्ट्रपति के समक्ष आज तब दया याचिका दायर की जब उच्चतम न्यायालय ने उसकी सुधारात्मक याचिका को खारिज कर दिया।

निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड मामले के चार दोषियों में से एक ने निचली अदालत द्वारा जारी मृत्यु वारंट को निरस्त कराने के लिए मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। दोषी मुकेश की याचिका न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ के समक्ष बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

वकील वृंदा ग्रोवर के जरिए दायर याचिका में सात जनवरी को निचली अदालत द्वारा जारी किए गए फांसी के वारंट को खारिज करने का आग्रह किया गया है। याचिका में मुकेश ने यह भी कहा है कि उसने मंगलवार को राष्ट्रपति और दिल्ली के उपराज्यपाल के समक्ष दया याचिकाएं भी दायर की हैं। निचली अदालत मामले के चारों दोषियों के खिलाफ सात जनवरी को मृत्यु वारंट जारी करते हुए उन्हें आगामी 22 जनवरी को सुबह सात बजे तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाने का आदेश दे चुकी है।

न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने दोषी विनय शर्मा और मुकेश कुमार की सुधारात्मक याचिकाओं पर चैंबर में विचार के बाद उन्हें खारिज कर दिया। निर्भया गैंगरेप केस में दोषी मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति से दया याचिका की मांग करते हुए तिहाड़ प्रशासन को पत्र सौंपा है।आज ही मुकेश सिंह की क्यूरेटिव पिटीशन यानी सजा को कम करने की गुहार वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की है। मुकेश की याचिका राष्ट्रपति के सामने दाखिय हो गई है। मामले में चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा।

सुधारात्मक याचिका किसी व्यक्ति को उपलब्ध अंतिम कानूनी विकल्प है। पांच न्यायाधीशों की यह सर्वसम्मत राय थी कि इन दोषियों की सुधारात्मक याचिकाओं में कोई दम नहीं है। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘मौत की सजा के अमल पर रोक के लिये आवेदन भी अस्वीकार किया जाता है। हमने सुधारात्मक याचिकाओं और संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया है। हमारी राय में रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा एवं अन्य के मामले में 2002 के फैसले में इस न्यायालय द्वारा प्रतिपादित मानकों के दायरे में इसमें कोई मामला नहीं बनता है। सुधारात्मक याचिकायें खारिज की जाती हैं।’’

न्यायाधीशों की इस पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल थे। दिल्ली की एक अदालत ने सात जनवरी को इस मामले के चारों मुजरिमों को 22 जनवरी को सवेरे सात बजे तिहाड़ जेल में मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाने के लिए आवश्यक वारंट जारी किया था। इसके बाद, नौ जनवरी को विनय और मुकेश ने सुधारात्मक याचिका दायर की थी। दो अन्य दोषियों अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता ने अभी तक सुधारात्मक याचिका दायर नहीं की है।

दक्षिण दिल्ली में 16-17 दिसंबर, 2012 की रात में चलती बस में छह दरिंदों ने 23 वर्षीय छात्रा से सामूहिक बलात्कार के बाद बुरी तरह से जख्मी हालत में पीड़िता को सड़क पर फेंक दिया था। इस छात्रा की बाद में 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी।

इस सनसनीखेज अपराध में शामिल एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी जबकि एक अन्य आरोपी नाबालिग था और उसके खिलाफ किशोर न्याय कानून के तहत कार्यवाही की गयी थी। इस नाबालिग को तीन साल तक सुधार गृह में रखा गया था।

शेष चार आरोपियों को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनायी थी, जिसकी पुष्टि उच्च न्यायालय ने कर दी थी। इसके बाद, मई, 2017 में उच्चतम न्यायालय ने चारों दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखते हुये उनकी अपील खारिज कर दी थी। न्यायालय ने बाद में इन दोषियों की पुनर्विचार याचिकायें भी खारिज कर दी थीं।

निर्भया के दुष्कर्मियों के लिए फांसी की सजा भी कम : डीसीडब्ल्यू प्रमुख मालीवाल

दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने मंगलवार को कहा कि निर्भया दुष्कर्म मामले के गुनहगारों के लिए फांसी की सजा भी कम है। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में मौत की सजा पाये चार मुजरिमों में से दो की सुधारात्मक खारिज कर दी।

मालीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘ऐसे जघन्य अपराध को अंजाम देते हुए इन दरिंदों को जरा भी दया नहीं आई, अब जब फांसी की सजा सुनाई गई तो इन्हें मौत का खौफ सताने लगा है। ’’ उन्होंने ट्वीट में कहा , ‘‘ऐसे हैवानों के लिए तो फांसी भी कम सजा लगती है। इनको फांसी मिलने से देश के हर बलात्कारी मानसिकता के व्यक्ति को संदेश मिलेगा।’’

निर्भया की फांसी के दिन उसके गांव में मनेगी दिवाली

निर्भया कांड में मंगलवार को दो दोषियों की तरफ से दाखिल सुधारात्मक याचिका को उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज किये जाने के निर्णय पर खुशी का इजहार करते हुए पीड़िता के परिजनों ने 22 जनवरी को उसके पैतृक गांव में दीपावली की तरह उत्सव मनाने की बात कही है।

निर्भया के दादा लाल जी सिंह ने मंगलवार को बिहार की सीमा से सटे गांव मेड़वार कला में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उच्चतम न्यायालय के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत का निर्णय स्वागत योग्य है तथा अब यह सुनिश्चित हो गया कि निर्भया के गुनहगारों को 22 जनवरी को फांसी दे दी जाएगी। सिंह ने जानकारी दी कि फांसी के दिन 22 जनवरी को निर्भया के पैतृक गांव में दीपावली की तरह उत्सव मनाया जायेगा।

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