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बैठे-बैठे सोने से हो सकती है मौत! जानिए इस तरह सोने के फायदे और नुकसान के बारे में

By विनीत कुमार | Updated: October 20, 2021 11:08 IST

अक्सर हम में से कई लोग बैठे-बैठे सो जाते है। इसके कुछ नुकसान भी हैं। वहीं कुछ मामलों में ये फायदेमंद भी है। जानिए इस बारे में।

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नई दिल्ली: क्या आपको कभी काम करते हुए अपने डेस्क पर नींद आई है? ये दरअसल बहुत आम है। शररी पर जब थकान हावी हो जाती है तो नींद आना लाजमी है। कई बार इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है फि चाहे जगह कोई भी हो। ऐसे में हम से कई लोग बैठे-बैठे झपकी ले लेते हैं।

हालांकि सवाल है कि बैठे-बैठे सोना स्वास्थ्य के लिए कितना अच्छा है? दरअसल, सोने की स्थिति नींद और स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हर पोजिशन शरीर के लिए फायदेमंद नहीं हो सकता है। बैठकर कर सोने के क्या फायदे और नुकसान हैं, आईए आपको बताते हैं।

बैठे-बैठे सोने के क्या हैं फायदे 

गर्भावस्था के दौरान आरामदायक: गर्भवती महिलाएं अक्सर अपने पेट के लिए उपयुक्त और आरामदायक स्थिति खोजने की कोशिश करती रहती हैं। बैठे-बैठे सोने से उनके पेट को आराम और सहारा मिल सकता है और ऐसे में ये फायदेमंद हो सकता है।

स्लीप एपनिया के मामलों में मदद: कई लोगों को सोने के दौरान सांस की तकलीफ होती है। इसे स्लीप एपनिया कहते हैं। ऐसे में बैठे-बैठे सोने से ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे पीड़ित लोगों को फायदा हो सकता है। 

एसिड रिफलक्स में मदद: बैठने से भोजन-नालिका के कार्य में सहायता मिल सकती है। इसलिए, जिन लोगों को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल परेशानी और पाचन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उन्हें बैठे-बैठे सोने से फायदा हो सकता है।

बैठे-बैठे सोने के क्या हैं नुकसान

पीठ दर्द का कारण: बैठे-बैठे लंबे समय तक सोने से शरीर एक ही स्थिति में रह जाता है। य़ह ठीक नहीं है। ऐसे में पीठ और शरीर में दर्द हो सकता है।

जोड़ों में अकड़न: गतिशीलता की कमी और कम खिंचाव के कारण जोड़ों में अकड़न हो सकती है। लेटने से शरीर में खिंचाव आता है। दूसरी ओर, बैठने से इस तरह के मूवमेंट शरीर में नहीं हो पाते हैं।

रक्त संचार में गड़बड़ी: लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से धमनियों में रक्त प्रवाह में रुकावट हो सकती है। 

क्या बैठे-बैठे सोने से मौत भी हो सकती है?

सोते समय लंब समय का ट्रैक या रिकॉर्ड रखना आसान नहीं होता है। जानकारों के अनुसार लंबे समय तक बैठे रहने से नसों में संकुचन ( (vein thrombosis) जैसी स्थिति हो सकती है। इस स्थिति की विशेष तौर पर शरीर के निचले हिस्सों खासकर पैरों या जांघों की नसों में रक्त के थक्के जमने का खतरा होता है। 

यह लंबे समय तक एक ही स्थिति में सोने से भी हो सकता है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो एक घातक स्थिति बन सकती है। इससे मृत्यु तक हो सकती है। डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (डीवीपी) के कुछ सामान्य लक्षण हैं जिसमें अचानक टखने या पैर में दर्द, त्वचा का लाल होना, टखने या पैर में सूजन, पैर में ऐंठन और त्वचा पर सनसनी जैसा महसूस करना आदि शामिल है।

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