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Pollution: प्रदूषण की वजह से बढ़ रही साइनस की समस्या, लक्षण दिखे तो नजरअंदाज न करें और बचाव के लिए करें ये काम

By सैयद मोबीन | Updated: December 18, 2023 18:10 IST

Pollution: पर्टिकुलेट मैटर यदि 2.5 माइक्रॉन से ऊपर है तो इससे हमें नाक और सांस की समस्या शुरू होती है. जैसा कि देखा गया है कि लंग का कलर आजकल चेंज होता रहता है.

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ठळक मुद्देगाड़ियों से, फैक्टरीज से निकलने वाले सूट से ये पर्टिकुलेट मैटर तैयार होते हैं.प्रमाण अभी प्रदूषण की वजह से बढ़ गया है.हम कोविडकाल में मास्क का उपयोग करते थे.

Pollution: देखा गया है कि आजकल वाहनों, फैक्टरीज, कंस्ट्रक्शन के कारण प्रदूषण बहुत बढ़ गया है. वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो गई है. खासकर पर्टिकुलेट मैटर जो धूल के या सीमेंट के या स्मोग के या डस्ट के छोटे-छोटे कण होते हैं, या गाड़ियों से, फैक्टरीज से निकलने वाले सूट से ये पर्टिकुलेट मैटर तैयार होते हैं.

यह पर्टिकुलेट मैटर यदि 2.5 माइक्रॉन से ऊपर है तो इससे हमें नाक और सांस की समस्या शुरू होती है. जैसा कि देखा गया है कि लंग का कलर आजकल चेंज होता रहता है. ब्लेकिश, और ब्लैक डॉट्स लंग में दिखते हैं. वैसे ही यह पर्टिकुलेट मैटर या प्रदूषण नाक से होते हुए जाता है तो लगातार एक्सपोजर के कारण नाक की समस्या या साइनस की समस्या हो सकती है. जिसे हम क्रोनिक राइनोसाइनोसाइटिस कहते हैं. इसका प्रमाण अभी प्रदूषण की वजह से बढ़ गया है.

बचाव के लिए करें ये काम

इसके लिए हमें प्रदूषण के एक्सपोजर को कम करना है. जैसे हम कोविडकाल में मास्क का उपयोग करते थे. उसी तरह घर से बाहर निकलते समय, ड्राइविंग के समय अपनी जगह पर पहुंचने तक मास्क का उपयोग कर सकते हैं. साधे मास्क का भी उपयोग कर सकते हैं या कपड़े का मास्क भी लगा सकते हैं. लेकिन इस मास्क को नियमित रूप से धोना चाहिए. साधा मास्क फेंकने से कूड़ा बढ़ाने से अच्छा है कि कपड़े का मास्क ही लगाएं, जिसे धोया जा सकता है.

लक्षण दिखे तो नजरअंदाज न करें

डॉ. (मेजर) चंदनखेडे ने बताया कि यदि हमें कुछ लक्षण दिखते हैं जैसे कि नाक में सूजन, नाक हमेशा भरी रहना, नाक में खुजली होना, सिर में दर्द होना, स्मेल न आना, नाक बंद होना, ये सारे लक्षण साइनस की समस्या के लक्षण हैं. इसे हमें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसे तुरंत ईएनटी स्पेशलिस्ट को दिखाना चाहिए और उनकी सलाह पर योग्य उपचार कराना चाहिए.

एहतियात बरतें, नाक की सफाई करते रहें : डॉ. चंदनखेडे 

ईएनटी व हेडनेक स्पेशलिस्ट डॉ. (मेजर) वैभव चंदनखेडे ने बताया कि एहतियात बरतने के लिए मैं यही कहूंगा कि मास्क का उपयोग करें, घर आने के बाद जिस तरह हम जलनीति करते हैं मतलब नाक की धुलाई, गुनगुने पानी में थोड़ा नमक डालकर हम इससे नाक की सफाई कर सकते हैं.

जलनीति प्रक्रिया हमारे आयुर्वेदिक में भी बताई गई है. इसका उपयोग हम नाक की स्वच्छता के लिए कर सकते हैं. दूसरा है गर्म पानी की भांप लेना. सुबह-शाम गर्म पानी की भांप ले सकते हैं ताकि जो भी गंदगी, पर्टिकुलेट मैटर या प्रदूषण के कण है, वह निकल जाए.

टॅग्स :डॉक्टरवायु प्रदूषण
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