एचआईवी (HIV) से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसे इंडिकेटर की पहचान की है जिससे एचआईवी से लड़ने में मदद मिल सकती है। यह एक ऐसा मेथड है जिससे इम्यून सेल्स में छिपे एचआईवी रूप का सटीक तरीके से पता लगाया जा सकता है। जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी शोधकर्ताओं के अनुसार, यह एक खास प्रोटीन है जिसका नाम कोफिलिन (Cofilin) है। इससे कोशिकाओं में छिपे एचआईवी संक्रमण से लड़ने के लिए मदद मिल सकती है। 

हाल ही में जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक एचआईवी संक्रमित मरीजों में कोफिलिन डिसफंक्शन हेल्पर टी सेल की खराबी का एक प्रमुख कारक है। हेल्पर टी कोशिकाएं एक फॉरेन एंटीजन की उपस्थिति को पहचानकर शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाती हैं और फिर प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रतिक्रिया देने में मदद करती हैं। 

इससे एचआईवी वायरस के सक्रिय रूप को समाप्त किया जा सकता है या नहीं इसके लिए इस मेथड का क्लिनिकल ट्रायल भी किया गया। एक बंदर के परीक्षण में, एड्स वायरस के सिमियन रूप, सिमियन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (SIV) के प्रतिरक्षा नियंत्रण में स्थायी प्रभाव दिखाया है, लेकिन इसका  एचआईवी संक्रमित मानव रोगियों में समान परिणाम नहीं दिखा है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के साल 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में एचआईवी के लगभग 36.9 मिलियन मरीज हैं। एड्स और एचआईवी पर कंट्रोल करने और खत्म करने के लिए सभी देश कड़े प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में इंग्लैंड के हेल्थ सेक्रेट्री मैट हैनकॉक ने ऐलान किया है कि वो साल 2030 तक इंग्लैंड को एड्स/एचआईवी फ्री कंट्री बनाकर रहेंगे। 

एचआईवी और एड्स की फुल फॉर्म (full form of hiv aids)

एचआईवी को (Human Immunodeficiency Virus) इन्फेक्शन कहते हैं जबकि एड्स को (Aacquired Immune Deficiency Syndrome) कहते हैं। 

पुरुषों में एचआईवी के लक्षण (HIV symptoms in men)

लगातार थकान 
मांशपेशियों में खिंचाव 
जोड़ों में दर्द व सूजन 
गला पकना 
सिर दर्द 
वजन कम होना 
रेशैज होना

एचआईवी के कारण (causes of hiv)

एक संक्रमित व्यक्ति के साथ कंडोम पहने बिना गुदा या योनि संभोग करने से
सिरिंज और सुइयों को किसी ऐसे व्यक्ति के साथ साझा करना जिसे पहले से ही एचआईवी एड्स है 
एक शल्य चिकित्सा उपकरण या एक सुई लगना, जो एचआईवी संक्रमित रक्त से दूषित है 
संक्रमित योनि स्राव, वीर्य, एचआईवी संक्रमित रक्त में घावों और खुले घावों के संपर्क में आ रहा है 
शिशु अपनी मां से एचआईवी एड्स विकसित कर सकते हैं जो स्तनपान या जन्म के दौरान पहले ही संक्रमित हो चुके हैं 

एचआईवी और एड्स में अंतर (difference between aids and hiv)

एचआईवी क्या है? 
एचआईवी वायरस रोग प्रतिरक्षा प्रणाली की टी कोशिकाओं पर हमला करता है जबकि एड्स, एचआईवी संक्रमण के बाद सिंड्रोम के रुप में प्रकट होता हैं।

एचआईवी होने का मतलब एड्स नहीं
यदि कोई व्यक्ति एचआईवी संक्रमित है तो यह जरूरी नहीं कि उसे एड्स हुआ हो। एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति प्रोपर मेडिकेशन टर्म्स फॉलो कर सामान्य जीवन बिता सकते हैं। दरअसल एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को एड्स हो सकता है लेकिन हर एड्स से पीड़ित व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित हों यह जरूरी नहीं हैं। 

एचआईवी का इलाज (treatment for hiv/aids)

पिछले कई सालों में ट्रीटमेंट में काफी सुधार हुआ है। डॉक्टर मानते हैं कि एचआईवी से पीड़ित कोई मरीज अगर बेहतर ट्रीटमेंट और डाइट ले रहा है, तो वो लंबा जीवन जी सकता है। मरीज का इलाज कैसा चल रहा है। बेहतर जीवन के लिए डाइट, एक्सरसाइज का भी अहम रोल है। दूसरी अन्य गंभीर रोगों का शिकार एचआई के मरीज का इलाज मुश्किल होता है। एचआईवी के इलाज में मरीज की भावनात्मक देखभाल भी शामिल है।  

एचआईवी के स्टेज (stages of hiv)

पहला स्टेज (Stages 1 of HIV Infection)

एचआईवी वायरस का पहला लक्षण 2 से 6 हफ्तों के बीच में दिखाई देने लगता है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम बिगड़ने लगता है। इसमें वायरल फ्लू की ही तरह लक्षण जैसे सिर दर्द, डायरिया, उलटी, थकान, गले का सूखना, मसल्स में दर्द, सूजन, छाती पर लाल रैशेज और बुखार महसूस होते हैं। 

दूसरा स्टेज (Stages 2 of HIV Infection)

इसमें वायरल जैसे लक्षण नहीं दिखाई देते और ना ही उन्हें कोई बीमारी महसूस होती है। जब फ्लू जैसे लक्षण ना हो और शख्स को मालूम ना हो कि उसे एचआईवी वायरस ने घेरा हुआ है, तो ऐसी अवस्था में हर वक्त थकान, गले के आस-पास सूजन, 10 दिनों से ज्यादा बुखार, रात में पसीना आना होता है। 

तीसरा स्टेज (Stages 3 of HIV Infection)

एचआईवी वायरस के एडवांस और आखिरी स्टेज को एड्स कहते हैं।  ये तब होता है जब आपके शरीर के CD4-T सेल्स के नम्बर 200 से भी कम हो जाते हैं। हेल्दी इम्यून सिस्टम वाले शख्स में CD4-T सेल्स की संख्या 500 से 1,600 के बीच में होती है। 


Web Title: HIV cure and treatment found, successful test done on monkeys
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