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आंख-फेफड़ों को खराब कर रही है दिल्ली की 'जहरीली' हवा, टीबी, अस्थमा, जलन, साइनस से बचाएंगे ये 12 उपाय

By उस्मान | Updated: October 28, 2019 10:28 IST

हवा में पटाखों की तेज आवाज के साथ ही जहरीला धुंआ और राख भर गया और कई स्थानों पर वायु गुणवत्ता का स्तर 'गंभीर' स्तर को पार गया। 

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ठळक मुद्देदिल्ली के लोगों सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए खूब पटाखे जलाएआंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह लोधी रोड में में पीएम-2.5 का स्तर 500 दर्ज किया गया।

दिवाली के बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' स्तर पर पहुंच गयी है। दिल्ली के लोगों सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए खूब पटाखे जलाए, जिसका असर सोमवार सुबह देखने को मिला। हवा में पटाखों की तेज आवाज के साथ ही जहरीला धुंआ और राख भर गया और कई स्थानों पर वायु गुणवत्ता का स्तर 'गंभीर' स्तर को पार गया। 

आंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह लोधी रोड में में पीएम-2.5 का स्तर 500 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि शून्य से 50 के बीच के एक्यूआई को 'अच्छा', 51 से 100 को 'संतोषजनक', 101 से 200 को 'मध्यम', 201 से 300 को 'खराब', 301 से 400 को 'बहुत खराब', 401 से 500 को 'गंभीर'  और 500 से ऊपर को 'अति गंभीर' आपात स्थिति की श्रेणी में रखा जाता है।

प्रदूषण से है इन गंभीर समस्याओं का खतरा

गौरतलब है कि यह प्रदूषण का स्तर 'खतरनाक' श्रेणी में आता है। दिल्ली की हवा में प्रदूषण बढ़ने से इसका सबसे अधिक बुरा असर आंखों पर पड़ता है। इसके अलावा वायु प्रदूषण के कारण जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, खांसी, टीबी और गले में में इन्फेक्शन, साइनस, अस्थमा और फेफड़ों से सम्बंधित बीमारियां हो सकती हैं।  

हवा खराब होने से सबसे ज्यादा आंखों और फेफड़ों पर असर पड़ता है। प्रदूषण ख़राब होने से कई लोगों को आंखों का सूखापन, कंजंक्टिवाइटिस, आंखों में जलन, आंखों में खुजली, आंखों का लाल होना, धुंधला दिखना और आंखों में दर्द सबसे अधिक खतरा होता है।

प्रदूषण से होने वाली समस्याओं से ऐसे बचें

डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली की खराब हवा के कारण आंखों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बड़े सरकारी अस्पतालों में आंखों से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की भीड़ बढ़ रही है जिन्हें उचित चिकित्सा और देखभाल के लिए दाखिल तक किया जा रहा है।  

सबसे जरूरी है कि आप घर से बाहर न निकलें और तब तक न निकलें जब तक प्रदूषण कम नहीं हो जाता। आवश्यकता पड़ने पर ही बाहर निकलें और तब अगर आप बाहर निकल भी रहें हैं बचाव के लिए आवश्यक सामान जरुर रख लें।

अगर आप बाहर निकल रहे हैं तो मास्क लगाकर निकलें। हो सके तो पूरा चेहरा ढक लें। एक मास्क को एक बार ही प्रयोग करें। एक ही मास्क का प्रयोग बार-बार करके आप वायरस और कई तरह के इंफेक्शन फैलाने वाले बैक्टीरिया की चपेट में आ सकते हैं।

1) दिवाली के कम से कम दो दिन घर से बाहर निकलने से बचें। खासकर सुबह के समय जब सबसे अधिक प्रदूषण अधिक होता है। 

2) आंखों का चश्मा जरूर पहनें, इससे आंखों का प्रदूषण से काफी हद तक बचाया जा सकता है। 

3) सफर के बाद और सोने से पहले साफ पानी से आंखों को धोयें। 

4) आंखों को हाथों से छूने से बचें और हाथ धोने के बाद ही आंखों को टच करें। आंखें रगड़ने से बचें।

5) आंखों में जलन होने पर सिर्फ डॉक्टर द्वारा निर्धारित आई ड्रॉप का ही इस्तेमाल करें। 

6) इस दौरान कांटेक्ट लेंस न पहनें और आई मेकअप से बचें। 

7) जलन कम करने के लिए कूल कॉम्प्रेसएहतर होगा  का इस्तेमाल करना बेहतर होगा।  

8) लंबे समय तक स्क्रीन डिवाइस, जैसे मोबाइल फोन और लैपटॉप का उपयोग न करें। सु 

9) एक स्वस्थ आहार खाएं जिसमें ओमेगा 3  और एंटीऑक्सीडेंट, जैसे कि मछली, हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, पालक, बादाम, अखरोट और जामुन समृद्ध खाद्य पदार्थ शामिल हों। ये आंखों के लिए बेहद अच्छे हैं।

10) अपने घर बेहतर क्वालिटी वाला एयर पोलुशन लगवाएं। इससे घर की हवा साफ होती है। 

11) बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी ड्रॉप या दवा का इस्तेमाल करने से बचें। 

12) अगर आपकी समस्या काफी जटिल हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

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