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Covid-19 effects: वैज्ञानिकों का दावा, मरीजों को बहरा कर रहा है कोरोना, वायरस से ये भी हैं 5 बड़े खतरे

By उस्मान | Updated: October 14, 2020 15:17 IST

कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव : शरीर की कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है कोरोना वायरस

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ठळक मुद्देकुछ मरीजों में स्थायी रूप से अचानक बहरेपन की समस्या पैदा हो रही हैस्टेरॉयड से हो सकता है उपचार इसका कारण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन फ्लू जैसे वायरल संक्रमण के बाद भी इसी प्रकार की समस्या होती है

कोरोना वायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। चीन से निकले इस खतरनाक वायरस से दुनियाभर में अब तक 1,090,811 लोगों की मौत हो गई है और 38,361,289 लोग संक्रमित हुए हैं। भारत में कोरोना के मामले 7,237,082 हो गए हैं और संक्रमण से मरने वालों की संख्या 110,617 हो गई है।

इस बीच वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस संक्रमण के कारण कुछ मरीजों में स्थायी रूप से अचानक बहरेपन की समस्या पैदा होने की बात सामने आई है। ब्रिटेन में इस संबंध में किए गए एक अध्ययन में यह बताया गया है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बहरे होने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। 

स्टेरॉयड से हो सकता है उपचारब्रिटेन में 'यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन' के विशेषज्ञों समेत वैज्ञानिकों के अनुसार, इस संक्रमण के कारण बहरेपन की समस्या पैदा होने को लेकर जागरुकता बहुत जरूरी है, क्योंकि स्टेरॉयड के जरिए उचित उपचार से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। 

कारण स्पष्ट नहींउन्होंने कहा कि इसका कारण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन फ्लू जैसे वायरल संक्रमण के बाद भी इसी प्रकार की समस्या होती है। 'बीएमजे केस रिपोर्ट्स' पत्रिका में प्रकाशित अनुसंधान में 45 वर्षीय एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र किया गया है, जो अस्थमा का मरीज है। 

कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित होने के बाद अचानक उसकी श्रवण क्षमता नष्ट हो गई। इस व्यक्ति को संक्रमण से पहले श्रवण संबंधी कोई अन्य समस्या नहीं थी। व्यक्ति को स्टेरॉयड की गोलियां और टीके लगाए गए, जिसके बाद उसकी श्रवण क्षमता आंशिक रूप से लौट गई। 

बड़े लेवल पर परीक्षण की जरूरतअनुसंधानकर्ताओं ने एक अध्ययन में कहा, 'बड़ी संख्या में लोगों के संक्रमित होने के कारण बहरेपन की समस्या को लेकर और अनुसंधान करने की आवश्यकता है, ताकि इस समस्या का पता लगाकर उसका उपचार किया जा सके।' 

कोरोना वायरस के अन्य बड़े नुकसान

दिमागी बीमारी ब्रेन फोग का खतराएक अध्ययन के अनुसार, जो लोग कोरोना वायरस से उबरते हैं, वे पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) के कारण 'ब्रेन फॉग' (Brain fog) और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। ब्रेन फोग खुद एक बीमारी नहीं है लेकिन कई मानसिक बीमारियों का कारण बनती है।

फेफड़ों को हो सकता है नुकसान

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययनों ने कोविड-19 रोगियों के फेफड़े प्रभावित होने का इशारा किया है। एक स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़े सीटी स्कैन में काले दिखाई देते हैं जबकि कोविड-19 रोगियों में ग्रे-पैच दिखाई देते हैं, जिन्हें ग्राउंड-ग्लास एसेसिटी कहा जाता है। शोधकर्ताओं को संदेह है कि इससे फेफड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है।  

दिल के लिए खतरनाक

कोविड-19 से सांस की बीमारी होने से गंभीर रोगियों के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। शरीर में कम ऑक्सीजन का स्तर दिल पर दबाव बढ़ाता है। यह अध्ययन निष्कर्ष निकाला गया। कोरोना वायरस संवहनी सूजन, मायोकार्डिटिस और अतालता को प्रेरित कर सकता है। इस वायरस को हृदय की मांसपेशियों की सूजन को प्रेरित करने के लिए जाना जाता है। वुहान में इस वायरस ने लगभग 20 प्रतिशत रोगियों के हृदय को नुकसान बताया।

ब्रेन और किडनियों के डैमेज होने का खतरा

मस्तिष्क रक्त वाहिकाओं द्वारा ऑक्सीजन की निर्जन आपूर्ति पर निर्भर है। डॉक्टरों ने कोविड-19 रोगियों में पाया है कि उनमें रक्त के थक्के विकसित हो सकते हैं, जिससे मस्तिष्क आघात हो सकता है। रक्त का थक्का जमने से अन्य अंगों, जैसे फेफड़े, हृदय और गुर्दे को गंभीर नुकसान हो सकता है।  

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

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