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भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल किया पूरा, कोरोना के खिलाफ 77.8 फीसद प्रभावी

By वैशाली कुमारी | Updated: July 3, 2021 10:26 IST

भारत की वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन के तीसरे और अंतिम चरण का ट्रायल पूरा कर लिया है। कंपनी ने इसके नतीजे भी जारी कर दिए हैं।

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ठळक मुद्देभारत बायोटेक द्वारा जारी ट्रायल के डेटा के मुताबिक, फाइनल चरण के ट्रायल में  वैक्सीन कोवैक्सीन कोरोना के खिलाफ 77.8 फीसदी प्रभावी पाई गई हैदुनिया भर में  खतरनाक डेल्‍टा वेरिएंट के खिलाफ यह टीका 65.2% असरदार पाया गया है भारत में अभी कोरोना के खिलाफ तीन वैक्सीनों का इस्तेमाल हो रहा है

भारत की वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन के तीसरे और अंतिम चरण का ट्रायल पूरा कर लिया है। कंपनी ने इसके नतीजे भी जारी कर दिए हैं। हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने कहा कि उसने कोवैक्सीन के लिए फाइनल फेज- 3 के डेटा का विश्लेषण कर लिया है और उसकी कोवैक्सीन कोरोना के गंभीर मरीजों और डेल्टा वेरिएंट के मरीजों पर असरदार पाई गई है।

भारत बायोटेक द्वारा जारी ट्रायल के डेटा के मुताबिक, फाइनल चरण के ट्रायल में  वैक्सीन कोवैक्सीन कोरोना के खिलाफ 77.8 फीसदी प्रभावी पाई गई है। वहीं, दुनिया भर में  खतरनाक डेल्‍टा वेरिएंट के खिलाफ यह टीका 65.2% असरदार पाया गया है। 

 भारत बायोटेक ने  कहा कि उसकी कोवैक्सीन सिम्पटोमैटिक कोरोना मरीजों के खिलाफ 77.8 फीसदी कारगर है। वहीं, कोवैक्सिन कोरोना के गंभीर मरीजों के खिलाफ 93.4 फीसदी प्रभावी है और कोरोना के डेल्टा वेरिएंट्स के खिलाफ यह 65.2 फीसदी कारगर है।  भारत बायोटेक ने 130 कोरोना के पुष्ट मामलों पर ये ट्रायल किया है।

अपने अंतिम चरण के डेटा के मुताबिक, कंपनी ने बताया कि असिम्पटोमैटिक कोरोना मरीजों के खिलाफ कोवैक्सिन 63.6% असरदार है। भारत बायोटेक ने यह भी बताया कि कोवैक्सीन का ट्रायल देश के 25 अलग-अलग अस्पतालों में किया गया था और इसमें करीब 25,800 वॉलंटियर्स शामिल हुए थे, इसमें 18 से 98 आयु वर्ग के लोगो ने भाग लिया था। तीसरे चरण के ट्रायल में भाग लेने वाले लोगों को प्लास्बो यानी वैक्सीन की दोनों डोज दी गई ।

इससे पहले, अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) ने माना था कि कोवैक्सीन डेल्टा ही नहीं अन्य दूसरे वैरिएंट के खिलाफ भी असरकारक है। इसकी स्टडी में पाया गया कि वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज सार्स-कोव-2 के अल्फा और डेल्टा वेरिएंट को पूरी तरह निष्क्रिय कर देती है।

बता दें की भारत में अभी कोरोना के खिलाफ तीन वैक्सीनों का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं भारत बायोटेक की कोवैक्सीन इनमें से एक है, यह स्वदेशी वैक्सीन है। दूसरी वैक्सीन कोविशील्ड भी स्वदेशी वैक्सीन है और इसके अलावा रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन भी लगाई जा रही है।

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