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विधायक हत्याकांडः बिहार के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की अपील पर 28 अगस्त को फैसला सुनायेगी कोर्ट

By भाषा | Updated: August 21, 2020 20:06 IST

बिहार के तत्कालीन विधायक अशोक सिंह की हत्या के मामले झारखंड उच्च न्यायालय में आज एक बार फिर फैसला टाल दिया है। अदालत अब 28 अगस्त को फैसला सुनायेगी।

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ठळक मुद्देविधायक हत्याकांड में बिहार के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की अपील पर फैसला अब 28 को होगा।न्यायमूर्ति अमिताव गुप्ता और न्यायमूर्ति राजेश की खंड पीठ ने इस मामले में बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।

रांची:बिहार के तत्कालीन विधायक अशोक सिंह की हत्या के मामले में सजायाफ्ता पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह तथा उनके भाई दीनानाथ सिंह और रितेश सिंह की अपील पर झारखंड उच्च न्यायालय में आज एक बार फिर फैसला टल गया। अदालत अब 28 अगस्त को फैसला सुनायेगी। न्यायमूर्ति अमिताव गुप्ता और न्यायमूर्ति राजेश की खंड पीठ ने इस मामले में बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।

बिहार के मशरख से विधायक अशोक सिंह की 1995 में हत्या के मामले में प्रभुनाथ सिंह और उनके दो भाईयों को हजारीबाग अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनायी है। इस सजा के खिलाफ तीनों दोषियों ने उच्च नयायालय में अपील दायर कर रखी है। विधायक अशोक सिंह की उनके आवास पर ही बम से हमला करके हत्या कर दी गयी थी।

हमले के समय वह अपने आवास पर लोगों से मुलाकात कर रहे थे। इस मामले में अशोक सिंह की पत्नी चांदनी देवी ने पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हत्या के पीछे की वजह राजनीतिक लड़ाई बताया गया क्योंकि प्रभुनाथ सिंह को हराकर ही अशोक सिंह विधायक बने थे।

अशोक सिंह की पत्नी ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर मामले की सुनवाई बिहार से बाहर करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि आरोपी प्रभावशाली हैं और गवाहों को धमकी भी मिल रही है। इसके बाद न्यायालय ने इस मामले को हजारीबाग की अदालत में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।

निचली अदालत ने इस मामले में 18 मई, 2017 को अपना फैसला सुनाया था और प्रभुनाथ समेत तीनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी। इस मामले में पहले भी दो बार फैसला टल गया था। कुछ तकनीकी कारणों से फैसला टाला गया था। पहले 24 फरवरी को फैसला सुनाया जाना था। लेकिन इस दिन फैसला नहीं सुनाया जा सका। इसके बाद तीन मार्च की तिथि निर्धारित की गयी। इस दिन भी तकनीकी कारणों से फैसला नहीं सुनाया जा सका था। 

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