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भारत की नागरिकता ले चुका पाकिस्तानी निकला ISI का जासूस, गुजरात एटीएस ने पकड़ा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 20, 2023 20:48 IST

पाकिस्तान से संचालित एक भारतीय व्हाट्सऐप नंबर के बारे में सैन्य खुफिया द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर, एटीएस ने आणंद जिले के तारापुर शहर से 53 वर्षीय लाभशंकर माहेश्वरी को पकड़ा।

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ठळक मुद्देपाकिस्तानी मूल के जासूस को गुजरात से पकड़ा गयागुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने किया गिरफ्तार गिरफ्तार किए गए आरोपी को 2005 में भारतीय नागरिकता दी गई थी

अहमदाबाद: गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने पाकिस्तानी मूल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर पाकिस्तानी अधिकारियों को व्हाट्सऐप के जरिए ट्रैकिंग मैलवेयर भेजकर भारतीय रक्षा कर्मियों की जासूसी करने में मदद करता था।

जासूसी के लिए गिरफ्तार किए गए आरोपी को 2005 में भारतीय नागरिकता दी गई थी। एक अधिकारी ने बताया कि रक्षा कर्मियों की जासूसी करने के लिए पाकिस्तान से संचालित एक भारतीय व्हाट्सऐप नंबर के बारे में सैन्य खुफिया द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर, एटीएस ने आणंद जिले के तारापुर शहर से 53 वर्षीय लाभशंकर माहेश्वरी को पकड़ा।

आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 123 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के इरादे से छिपाना) और 121-ए (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश) और सूचना प्रौद्योगिकी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एटीएस के पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश जाट ने बताया कि जांच से पता चला है कि पाकिस्तानी मूल के माहेश्वरी को 2005 में भारतीय नागरिकता प्रदान की गई थी। वह पड़ोसी देश में रह रहे रिश्तेदार से मिलने के लिए स्वयं, अपनी पत्नी और परिवार के दो अन्य सदस्यों के लिए वीजा प्रक्रिया को तेज करने के एवज में साजिश का हिस्सा बनने को सहमत हुआ था।

एटीएस के पुलिस अधीक्षक ने संवाददाताओं को बताया, "भारतीय सैन्य खुफिया विभाग को हाल ही में जानकारी मिली कि पाकिस्तानी सेना या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने किसी तरह एक भारतीय सिम कार्ड हासिल कर लिया था, जिसका इस्तेमाल व्हाट्सऐप के जरिए भारतीय रक्षा कर्मियों को मैलवेयर भेजकर जासूसी करने के लिए किया जा रहा था। सूचना के आधार पर, हमने माहेश्वरी को आनंद के तारापुर से पकड़ा, जहां वह किराने की दुकान चलाता है। पिछले साल, जब माहेश्वरी और उसकी पत्नी ने पाकिस्तान के लिए ‘विजिटर वीजा’ के लिए आवेदन किया था, तब पड़ोसी देश में रहने वाले उसके रिश्तेदार किशोर रामवानी ने उसे पाकिस्तान दूतावास से जुड़े एक व्यक्ति से संपर्क करने के लिए कहा था।"

उन्होंने बताया, "अज्ञात व्यक्ति के हस्तक्षेप के बाद माहेश्वरी और उनकी पत्नी को वीजा मिला। भारत लौटने के बाद, उन्होंने अपनी बहन और भतीजी के लिए वीजा प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए फिर से उस व्यक्ति से संपर्क किया।" जाट ने बताया, "बदले में, पाकिस्तान दूतावास (उच्चायोग) में संपर्क रखने वाले व्यक्ति ने माहेश्वरी को एक सिम कार्ड का उपयोग करके अपने मोबाइल फोन पर व्हाट्सऐप शुरू करने के लिए कहा, जो उसे जामनगर के निवासी सकलैन थैम से प्राप्त हुआ था। फिर माहेश्वरी ने उस व्यक्ति के साथ व्हाट्सऐप शुरू करने के लिए ओटीपी साझा किया।"

उन्होंने बताया, "निर्देश के अनुसार, माहेश्वरी ने खुद को एक आर्मी स्कूल का कर्मचारी बताकर रक्षा कर्मियों को संदेश भेजना शुरू कर दिया और उनसे स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट पर अपने बच्चों के बारे में जानकारी अपलोड करने के लिए एक 'एपीके' फ़ाइल डाउनलोड करने का आग्रह किया। आरोपी ने सैन्यकर्मियों को यह दावा करते हुए एप्लिकेशन इंस्टॉल करने का लालच दिया था कि यह सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का हिस्सा था।"

जाट ने बताया, "वास्तव में, वह 'एपीके' फाइल एक ‘रिमोट एक्सेस ट्रोजन’ थी, यानी कि एक प्रकार का मालवेयर जो मोबाइल फोन से सभी जानकारी, जैसे संपर्क, स्थान और वीडियो निकालता है, और डेटा को भारत के बाहर एक कमान एवं नियंत्रण केंद्र को भेजता है। अब तक, हमने पाया कि कारगिल में तैनात एक सैनिक का मोबाइल फोन उस मालवेयर से प्रभावित था। हमें अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि और कितने लोगों को निशाना बनाया गया।"

उन्होंने कहा, "प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जब माहेश्वरी की बहन इस साल पाकिस्तान गई थी, तो वह उस सिम कार्ड को अपने साथ ले गई और उसे एक रिश्तेदार को सौंप दिया, जिसने उसे वहां एक अधिकारी को दे दिया।"

अधिकारी के मुताबिक सिम कार्ड थैम ने एक पाकिस्तानी ऑपरेटिव के निर्देश पर खरीदा था और एक अन्य जामनगर निवासी असगर मोदी द्वारा सक्रिय किया गया था। उन्होंने कहा कि माना जा रहा है कि दोनों देश छोड़ चुके हैं। 

टॅग्स :गुजरातISIक्राइमभारतीय सेनाIndian army
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