योजना ‘वीबी-जी राम जी’ को लागू करने की तैयारी, बजट में 95,692.31 करोड़ रुपये?, मनरेगा के लिए 30,000 करोड़ रुपये
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 1, 2026 15:40 IST2026-02-01T15:38:57+5:302026-02-01T15:40:11+5:30
VB–G Ram G Yojana: वर्ष 2025-26 में इस विभाग के लिए 2,651 करोड़ रुपये का आवंटन था, जबकि संशोधित अनुमान के अनुसार वास्तविक खर्च 1,757.4 करोड़ रुपये रहा।

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नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने नयी योजना ‘वीबी-जी राम जी’ को लागू करने की तैयारी के साथ ही इसके लिए 95,692.31 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जबकि मनरेगा के लिए 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी राम जी) योजना के तहत साल में 125 दिनों के काम का वादा किया गया है। यह योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 के तहत बनी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल की दो दशक पुरानी ग्रामीण रोजगार योजना का स्थान लेगी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा योजना तब तक जारी रहेगी, जब तक ‘वीबी-जी राम जी’ पूरी तरह अमल में नहीं आ जाती और इसके तहत लंबित कार्य पूरे नहीं हो जाते। बजट दस्तावेजों के अनुसार, मंत्रालय के ग्रामीण विकास विभाग के लिए कुल 1,94,368.81 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
यह पिछले वित्त वर्ष के 1,86,995.61 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से थोड़ा अधिक है। वर्ष 2026-27 के लिए भूमि संसाधन विभाग को 2,654.33 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वर्ष 2025-26 में इस विभाग के लिए 2,651 करोड़ रुपये का आवंटन था, जबकि संशोधित अनुमान के अनुसार वास्तविक खर्च 1,757.4 करोड़ रुपये रहा।
वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों के मुताबिक, मनरेगा कार्यक्रम पर कुल खर्च 88,000 करोड़ रुपये रहा, जबकि शुरुआत में इसके लिए 86,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के लिए वर्ष 2026-27 का आवंटन 19,000 करोड़ रुपये रखा गया है, जो 2025-26 के बराबर ही है।
हालांकि, संशोधित अनुमान के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में इस पर खर्च 11,000 करोड़ रुपये हुआ था। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 2026-27 का आवंटन बढ़ाकर 19,200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पिछले साल यह राशि 19,005 करोड़ रुपये थी, जबकि संशोधित अनुमान के मुताबिक 16,000 करोड़ रुपये खर्च हुए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के लिए इस साल 54,916.70 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। पिछले बजट में यह राशि 54,832.00 करोड़ रुपये थी और संशोधित अनुमान में खर्च 32,500.01 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। संशोधित अनुमान (आरई) वास्तविक खर्च के रुझानों के आधार पर सरकार के व्यय का अद्यतन या ताजा अनुमान होता है।
शहरी आर्थिक क्षेत्रों के लिए 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को शहरी विकास को मजबूत करने के लिए एक बड़े कदम की घोषणा की। इसके तहत शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और प्रत्येक क्षेत्र के लिए पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है। इसका मकसद संबंधित योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना है।
सीतारमण ने लोकसभा में 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए शहरों को भारत के विकास, नवोन्मेष और अवसरों का इंजन बताया और कहा कि यह नई पहल दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों के साथ-साथ मंदिर नगरों पर केंद्रित होगी, जिन्हें आधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बजट का उद्देश्य विशिष्ट विकास कारकों के आधार पर शहर आर्थिक क्षेत्र का मानचित्रण करके शहरों की आर्थिक शक्ति को और अधिक बढ़ाना है। सीतारमण ने कहा, ‘‘सुधार-सह-परिणाम आधारित वित्तपोषण व्यवस्था के साथ चुनौतीपूर्ण तरीके से उनकी योजनाओं को लागू करने के लिए प्रत्येक सीईआर के लिए पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन प्रस्तावित किया गया है।’’
उन्होंने कहा कि पिछले दशक में, उनकी सरकार ने सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के व्यापक सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) जैसे नए वित्तपोषण साधन और एनआईआईएफ (राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी ढांचा कोष) और एनएबीएफआईडी (राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा और विकास वित्त पोषण बैंक) जैसी संस्थाएं शामिल हैं। सरकार पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों (टियर 2 और टियर 3) में अवसंरचना के विकास पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगी। ये शहर विकास केंद्रों के रूप में विकसित हुए हैं।